MBBS में दाखिले के लिए लगाए स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के फर्जी सर्टिफिकेट, 64 अभ्यर्थियों का प्रवेश निरस्त
लखनऊ में NEET UG 2025 की काउंसलिंग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों के फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग करके MBBS में प्रवेश लेने के मामले सामने आए हैं। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने जांच में 64 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उनके प्रवेश रद कर दिए हैं। इन छात्रों को काउंसलिंग से प्रतिबंधित कर दिया गया है और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। यूपी नीट यूजी 2025 के पहले चक्र की काउंसिलिंग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के मामले सामने आए हैं। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की जांच में नौ जिलों से जारी 64 अभ्यर्थियों के ऐसे प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह ने फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश निरस्त कर दिए हैं। इन सभी को अन्य चक्र की काउंसिलिंग से प्रतिबंधित करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
किंजल सिंह ने बताया कि यूपी नीट यूजी काउंसिलिंग में राज्य कोटे की 4442 सीटें हैं। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित उपश्रेणी के अंतर्गत दो प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की 88 सीटों पर प्रवेश होना है। पहली काउंसिलिंग में इस कोटे से 79 सीटों का आवंटन किया गया, जिसमें से 71 अभ्यर्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया पूरी की थी।
इसी दौरान स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय फिरोजाबाद में प्रवेश लेने वाली एक अभ्यर्थी का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी का प्रमाणपत्र फर्जी होने की आशंका हुई। इस प्रमाणपत्र को आगरा जिलाधिकारी कार्यालय से जारी किया गया था। इसकी जांच कराई गई। 21 अगस्त को जिलाधिकारी आगरा कार्यालय ने बताया कि यह प्रमाणपत्र फर्जी है।
इसके बाद पहले चक्र की काउंसिलिंग से अन्य मेडिकल कालेजों में अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की जांच की गई तो वे भी प्रथमदृष्टया संदिग्ध मिले। इस पर आगरा, गाजीपुर, बलिया, भदोही, मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद और बुलंदशहर के जिलाधिकारियों को प्रमाणपत्र जांच के लिए भेजे गए।
इन जिलों से मिली जांच रिपोर्ट में 64 प्रमाणपत्र फर्जी होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय के काउंसिलिंग बोर्ड की बैठक में फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों का प्रवेश निरस्त करने का फैसला किया गया। सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को इन अभ्यर्थियों का प्रवेश निरस्त करने का पत्र भेज दिया गया है।
सभी अभ्यर्थियों को 2025 की काउंसिलिंग से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। संबंधित जिलाधिकारियों को फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
सबसे ज्यादा 15 प्रमाणपत्र मेरठ से जारी हुए हैं, जबकि 12-12 सहारनपुर और बलिया से जारी हुए हैं। इसके बाद भदोही, गाजीपुर से नौ-नौ, वाराणसी से तीन, गाजियाबाद से दो, आगरा और बुलंदशहर से जारी एक-एक प्रमाणपत्र फर्जी मिला है।
वर्ष 2024 में प्रवेश लेने वालों की भी होगी जांच
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित का प्रमाणपत्र लगाकर वर्ष 2024 काउंसिलिंग से एमबीबीएस में प्रवेश लेने वालों की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह ने बताया कि इस बार प्रवेश के लिए हुए फर्जीवाड़े को देखते हुए यह फैसला किया गया है। यदि कहीं गड़बड़ी मिली तो प्रवेश निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
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