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    यूपी में 'स्मार्ट गवर्नेंस’ के लिए अब AI तय करेगा शासन की रफ्तार, विभागों से मांगी गई कार्ययोजना

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 08:53 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश सरकार 'स्मार्ट गवर्नेंस' की दिशा में कदम बढ़ा रही है। फाइलों की धीमी गति को तेज करने और पारंपरिक निगरानी की जगह AI-आधारित समाधान लागू करन ...और पढ़ें

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    शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। प्रदेश सरकार अब शासन को ‘स्मार्ट’ बनाने में जुट गई है। फाइलों की सुस्त रफ्तार को गति देने व पारंपरिक निगरानी तंत्र की जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित समाधान लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

    'स्मार्ट गवर्नेंस’ के लिए डाटा से निर्णय और तकनीक से समाधान पर जोर दिया जाएगा। किन-किन क्षेत्रों में एआइ तकनीक के माध्यम से कार्य को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है, इस पर मंथन शुरू हो गया है।

    मुख्य सचिव एसपी गोयल ने एक माह में सभी विभागों से अपने यहां उपलब्ध सेवाओं और कार्यप्रणाली का परीक्षण कर नवाचार आधारित सुधार की दिशा में विस्तृत कार्य योजना तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्य सचिव का मानना है कि वर्तमान में एआइ आधारित समाधान, प्रशासनिक दक्षता, डाटा विश्लेषण, शिकायत निस्तारण, सेवा वितरण, निगरानी और निर्णय प्रक्रिया को सशक्त बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

    ऐसे में प्रत्येक विभाग अपनी उपलब्ध सेवाओं और कार्यप्रणाली का परीक्षण कर नवाचार आधारित सुधार की दिशा में ठोस प्रस्ताव तैयार करें।

    इसमें विभागों को नागरिक सेवाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता बढ़ाने, शिकायत निवारण तंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने, कार्यों की निगरानी एवं मूल्यांकन में डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा मानव संसाधन की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर देने के लिए कहा गया है।

    सभी विभागों से कहा है कि वे इस संबंध में अपनी विस्तृत कार्ययोजना अधिकतम एक माह के भीतर शासन को प्रस्तुत करें, ताकि चरणबद्ध तरीके से एआइ आधारित प्रशासनिक सुधार लागू किया जा सके। प्रदेश में इसे डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    इस पहल को केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। प्रभावी ढंग से लागू होने के बाद प्रदेश में शासन की छवि अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बन सकती है।

    यह होंगे लाभ-

    • डाटा आधारित निर्णय से नीतियां बनेंगी अधिक सटीक
    • एआइ से शिकायत निवारण होगी अधिक प्रभावी
    • डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता में होगी वृद्धि
    • सेवाओं की समय सीमा तय कर एआइ स्वतः करेगा निगरानी
    • संसाधनों का बेहतर हो सकेगा उपयोग
    • निगरानी और मूल्यांकन होगा मजबूत
    • डिजिटल टूल्स के उपयोग से कर्मचारियों की बढ़ेगी कार्यकुशलता
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