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    Meerut: सब रजिस्ट्रार के संदेह ने खोल दिया करोड़ों का स्टांप घोटाला, इन जिलों तक पहुंची जांच की आंच

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 12:57 AM (IST)

    मेरठ में स्टाम्प घोटाला साढ़े 11 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है जिसमें 1577 फर्जी स्टाम्प वाले बैनामे शामिल हैं। एक उपनिबंधक के संदेह ने इस घोटाले का खुलासा किया। जांच में पता चला कि वर्ष 2020 से 2023 तक 999 बैनामों में साढ़े सात करोड़ के संदिग्ध स्टाम्प पेपर थे। विधानसभा की प्राक्कलन समिति इस मामले की जांच कर रही है।

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    साढ़े 11 करोड़ के पार पहुंच गया स्टांप घोटाला। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, मेरठ। स्टांप घोटाला अभी तक साढ़े 11 करोड़ के पार पहुंच गया है। फर्जी स्टांप लगे बैनामों की संख्या भी अब 1577 तक पहुंच गई है। इस घोटाले का राजफाश भी एक उपनिबंधक के शक ने करा दिया।

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    शक के आधार पर एक बैनामे में लगे एक स्टांप पेपर का सत्यापन ट्रेजरी से कराया गया और बस घोटाले की परतें खुलकर सामने आती चली गई।

    15 जनपदों तक पहुंची जांच की आंच

    स्टांप घोटाला भले ही मेरठ में हुआ लेकिन उसकी जांच प्रदेश के 15 जनपदों तक फैली। वर्ष 2020 से 2023 तक की जांच में कुल 999 बैनामों में साढ़े सात करोड़ के संदिग्ध स्टांप पेपर सामने आए थे। इन स्टांप पेपरों के संबंध में कानपुर ट्रेजरी से रिपोर्ट मांगी गई थी। दरअसल कानपुर ट्रेजरी ही पूरे प्रदेश में जनपदों की ट्रेजरी को स्टांप पेपर जारी करती है।

    कानपुर ट्रेजरी ने 15 जनपदों के नाम और स्टांप पेपरों के नंबर भेजे। जिन्हें घोटाले में शामिल स्टांप पेपर जारी किए गए थे। इसके बाद इन सभी जनपदों की ट्रेजरी से उन लोगों के नाम पते और मोबाइल नंबर मांगे गए जिनके नाम से इन स्टांप पेपर को जारी किया गया था।

    विधान सभा की प्राक्कलन समिति कर रही जांच

    स्टांप घोटाले की जांच ने पिछले कुछ महीनों में तेजी पकड़ी है। स्टांप घोटाले की राशि की वसूली के लिए बैनामा कराने वाले लोगों से वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई तो लोगों ने विरोध किया। जिसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित विशाल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। अब वह जेल में है।

    विधानसभा की प्राक्कलन समिति भी इस मामले में जांच कर रही है। प्रदेश के सभी जनपदों में वर्ष 2015 से 2020 के बीच हुए बैनामों की भी जांच कराई जा रही है। इन बैनामों में प्रयोग किए गए कुछ स्टांप पेपर को जांच के लिए नासिक प्रेस भी भेजा गया है।

    वर्ष 2009 से 2014 के बीच के हैं अधिकांश स्टांप

    प्रदेश में जनपदों की ट्रेजरी को स्टांप पेपर का वितरण कानपुर ट्रेजरी से किया जाता है। जिला प्रशासन की मांग पर कानपुर ट्रेजरी ने इन सभी 999 बैनामों में प्रयोग किए गए स्टांप पेपर के संबंध में बताया गया है कि उक्त स्टांप पेपर 15 जनपदों को जारी किए गए।

    जिसमें से अधिकांश गाजियाबाद के हैं। बड़ी संख्या में स्टांप वर्ष 2009 से लेकर 2014 के बीच जारी हुए। इस रिपोर्ट में 462 बैनामों में इस्तेमाल किए गए 1500 से ज्यादा स्टांप पेपर का विवरण हैं।

    आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई है जांच

    स्टांप घोटाले की जांच की विधानसभा की प्राक्कलन समिति लगातार समीक्षा कर रही है। समिति ने इस घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने की घोषणा की है। ताकि आरोपित की संपत्ति को भी जब्त किया जा सके।

    तेजी से जांच के लिए लखनऊ और मेरठ में एक एक विशेष अधिकारी की तैनाती करने का निर्देश समिति ने रजिस्ट्री और स्टांप अधिकारियों को दिया। समिति ने वर्ष 2015 से 2020 के बीच में हुए बैनामों के सत्यापन का कार्य तेजी से पूरा करने का भी निर्देश दिया है।