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    मुजफ्फरनगर में सहायक अध्यापक की हत्या के दोषी हेड कॉन्स्टेबल को उम्रकैद, 2 साल बाद कोर्ट का फैसला

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 09:43 AM (IST)

    मुजफ्फरनगर में सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार की हत्या के दोषी हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 18 मार्च 2024 को सरकारी कार्बाइन से गोलियां बरसाकर चंदौली जिले के सहायक अध्यापक की हत्या करने के दोषी हेड कांस्टेबल को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

    सहायक अध्यापक व उनके साथी पुलिस सुरक्षा में वाराणसी से यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाएं मुजफ्फरनगर लाए थे। यहां हेड कांस्टेबल ने तंबाकू नहीं देने पर सहायक अध्यापक की हत्या कर दी थी। हेड कांस्टेबल पर हत्या के साथ ही एससी-एसटी एक्ट भी लगा था।

    जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा के अनुसार चंदौली जिले के थाना बलुआ के ग्राम बैराठ निवासी अनुसूचित वर्ग के जितेंद्र राम ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराए मुकदमे में बताया था कि उनके भाई धर्मेंद्र कुमार वाराणसी के महगांव स्थित राजकीय स्कूल में सहायक अध्यापक थे।

    14 मार्च 2024 को वाराणसी से एक कंटेनर में यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाएं लेकर सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार व संतोष कुमार और सुरक्षा की दृष्टि से वाराणसी पुलिस लाइन में तैनात दारोगा नागेंद्र सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव कार्बाइन के साथ आए थे।

    इनके साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जितेंद्र मौर्य व कृष्ण प्रताप भी थे। सभी लोग प्रयागराज, शहाजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद, बिजनौर जिले में उत्तर पुस्तिकाएं उतारते हुए 18 मार्च की रात लगभग एक बजे मुजफ्फरनगर में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एसडी इंटर कालेज पहुंचे।

    यह इंटर कालेज एसएसपी आवास के सामने है। कॉलेज का गेट बंद होने के कारण चालक साधू यादव ने कंटेनर को कालेज के गेट के पास ही खड़ा कर दिया।

    शिक्षक संतोष कुमार और दारोगा नागेंद्र सिंह चौहान चालक के केबिन में आराम करने लगे, जबकि पीछे की तरफ सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव और दोनों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विश्राम कर रहे थे।

    देर रात लगभग 1:46 बजे हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव निवासी ग्राम जलीलपुर फुसमा थाना दोहरीघाट जिला मऊ ने कार्बाइन से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार की हत्या कर दी थी।

    इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट) सीताराम के न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए।

    बुधवार को दोनों पक्षों के तर्क वितर्क सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने पर न्यायाधीश ने हेड कांस्टेबल चंद्रप्रकाश यादव को हत्या का दोषी माना और आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

    पहले से नशे में था, फिर भी तंबाकू मांग रहा था हेड कांस्टेबल

    सहायक अध्यापक की हत्या के बाद सिविल लाइंस थाना पुलिस ने हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में पता चला था कि वह शराब के नशे था।

    उसके बाद भी कंटेनर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से बार-बार तंबाकू (सुरती) मांग रहा था। जब सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार ने विरोध किया, तो कार्बाइन से गोलियां बरसा दी थीं। धर्मेंद्र के शरीर के तीन गोलियां आर-पार निकल गई थीं।

    उत्तर पुस्तिकाएं भी हुईं थी रक्तरंजित

    धर्मेंद्र हत्याकांड के दौरान यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल भी रक्तरंजित हो गए थे। दो दिन तक कापियों को मूल्यांकन केंद्रों पर पहुंचाने की कार्रवाई की गई।

    हत्याकांड के बाद कापियों को मुजफ्फरनगर के एसडी इंटर कालेज में नहीं उतारा गया था। यहां से कापियों को सहारनपुर भेजा गया। प्रदेशभर में यह मामला चर्चा का विषय बना था। शिक्षक संगठनों ने भी हंगामा कर विरोध जताया था।

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