नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसान कोटे की जमीन पर बंदरबांट का आरोप, किसानों को नहीं मिल रहे हक के प्लॉट
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों ने आरोप लगाया है कि प्राधिकरण उनकी आरक्षित जमीन प्रभावशाली लोगों में बांट रहा है। हजारों किसान अपने हक के भूखंडों के ...और पढ़ें

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसान कोटे की जमीन पर बंदरबांट का आरोप। (AI Generated Image)
HighLights
किसानों का आरोप, प्राधिकरण कर रहा जमीन की बंदरबांट।
हजारों किसान अपने हक के भूखंडों का इंतजार कर रहे।
प्रभावशाली लोगों को अच्छे भूखंड, किसानों को वंचित रखा।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों के हक की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण उनके भूखंडों के लिए आरक्षित जमीन प्रभावशाली लोगों में बंदरबांट कर रहा है। हजारों किसान सालों से अपने भूखंड (प्लाट) का इंतजार कर रहे हैं। जिन किसानों को पूर्व में अर्जित भूमि के बदले भूखंड आवंटित किए गए थे, उनकी लाेकेशन बदलने का भी आरोप है।
जिन किसानों को ड्रा के माध्यम से अच्छी लोकेशन पर भूखंड मिल गए थे, वहां मानचित्र संसोधित कर प्रभावशाली लोगों के भूखंड लगा दिए गए हैं। आम किसानों के भूखंड खराब लोकेशन अथवा अतिक्रमण वाली जमीन पर लगाने का आरोप है। नोएडा के शहदरा गांव के ब्रहमपाल व जयपाल आदि का आरोप है कि पहले उन्हें अच्छी लोकेशन पर 45 मीटर चौड़ी सड़क पर 267 वर्ग मीटर का भूखंड आवंटित किया गया था।
बिना सूचना दिए उनका भूखंड पीछे की तरफ नौ मीटर चौड़ी सड़क पर लगा दिया गया। एक प्रभावशाली व्यक्ति को उनका 45 मीटर चौड़ी सड़क् का भूखंड आवंटित कर दिया गया।
इसी तरह ग्रेटर नोएडा में रोजा जलालपुर और रोजा याूकबूपुर में मामले प्रकाश में आए हैं। किसान ब्रजेश कुमार ने बताया कि उन्हें पहले 120 वर्ग मीटर का भूखंड आवंटित किया गया था। बिना सूचना उसकी लोकेशन बदल दी। जिस सूची में उनका नाम था, उस सूची में और भी कई प्रभावशाली लोगों के नाम थे। एक-एक कर उन्हें अच्छी लोकेशन पर भूखंड दे दिए गए, लेकिन 10 वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें भूूूखंड नहीं दिया गया है।
ग्रेटर नोएडा के ऐमनाबाद गांव में भी कई किसानों के भूखंडों की लोकेशन बदल कर उनके आवंटन रोकने का आरोप लगा है। किसानों का कहना है कि पूर्व में जिस लाेकेशन पर भूखंड लगाए गए थे, वहां प्रभावशाली लोगों को जमीन का आवंटन कर दिया गया। किसान 15 वर्ष से भूखंडों के लिए भटक रहे हैं।
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क्या है मामला
नियमों के मुताबिक, जिन किसानों की जमीन अर्जित की जाती है, उन्हें ग्रेटर नोएडा में 6% आबादी भूखंड व नोएडा में 5% विकसित भूखंड मिलते हैं। इसके अलावा सेक्टर की आवासीय योजनाओं में भी किसानों के लिए 17.5% प्लाट आरक्षित रखने का प्रविधान है।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। किसान संगठनों का आरोप है कि प्राधिकरण न तो 5% वाले प्लाट दे रहा है और न ही 17.5% कोटे के आवासीय भूखंड किसानों को मिल रहे हैं।
प्राधिकरण पर सवाल
सूत्रों के अनुसार किसान कोटे के हजारों प्लाट लंबित हैं। आरक्षित जमीन पर व्यावसायिक प्रोजेक्ट और ग्रुप हाउसिंग स्कीम लाई जा रही हैं। प्रभावशाली लोगों को बिना देरी के भूखंड आवंटित कर दिए जाते हैं। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण के कुछ अधिकारी और दलाल मिलकर इस बंदरबांट को अंजाम दे रहे हैं।
किसानों को भूखंड आवंटित करने का प्रयास किया जा रहा है। सूची बनकर तैयार है। जमीन तलाशी जा रही है। शीघ्र आवंटन होगा।
एनजी रवि , सीईओ, ग्रेटर नोएडा
किसानों की सूची तैयार कर ली गई है। जून के अंत अथवा मध्य जुलाई तक भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे।
कृष्णा करूणेश, सीईओ, नोएडा