हिंदू नववर्ष रौद्र में दो-दो ज्येष्ठ का संयोग, 59 दिन की तपिश के बाद आएगी बारिश; ज्योतिषियों ने बताए कई संकेत
हिंदू नववर्ष 'रौद्र' 19 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसमें दो ज्येष्ठ माह (अधिमास) पड़ने के कारण गर्मी 59 दिन तक चलेगी और वर्षा देर से होगी। ज्योतिषीय गण ...और पढ़ें

इस बाद हिंदू नववर्ष में दो ज्येष्ठ माह पड़ रहे हैं। फोटो: सांकेतिक

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। 19 मार्च से शुरू हो रहे हिंदू नववर्ष में दो महीने ज्येष्ठ होने के कारण भीषण गर्मी झेलनी पड़ेगी। वहीं देर से वर्षा होगी। इस वर्ष दो ज्येष्ठ के माह पड़ रहे हैं। इसमें से एक शुद्ध ज्येष्ठ होगा, दूसरा ज्येष्ठ का अधिमास (मलमास) होगा।
हिंदू नया संवत्सर दो ज्येष्ठ लेकर आ रहा है। इससे ज्येष्ठ 59 दिन का होगा। इससे आगे के महीने देर से आएंगे और वर्षा देर से होगी। इस महीने में ज्यादातर मांगलिक कार्य शास्त्रों में वर्जित रहते हैं। विशेष उपासना के लिए अधिकमास में विशेष मुहूर्त होते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 19 मार्च से शुरू हो रहे नए संवत्सर का नाम रौद्र है। इसका राजा गुरु और मंत्री मंगल रहेगा। संवत्सर में शुद्ध ज्येष्ठ आषाढ़ का कृष्णपक्ष दो मई से शुरू होकर 16 मई तक चलेगा। 17 मई से 15 जून तक अधिमास यानी मलमास होगा।
इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। पूजा-उपासना, धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। शुद्ध ज्येष्ठ का शुक्ल पक्ष 14 जून से 29 जून तक होगा। दो ज्येष्ठ होने के कारण आषाढ़ हर वर्ष की तुलना में देर से आएगा।
समय वैश्य, रोहिणी समुद्र में इस बार समय का वास वैश्य के घर में है। पंडित रामदरश तिवारी का कहना है कि समय का वास वैश्य के घर होने का अर्थ है कि अन्न समेत सभी खाद्य वस्तुएं महंगी होंगी। रोहिणी का वास इस वर्ष समुद्र में है। इससे भरपूर वर्षा के संकेत हैं।
ऐसा रहेगा नया संवत्सर
पंडित विपिन तिवारी के अनुसार इस संवत्सर का राजा गुरु और मंत्री मंगल है। इसके प्रभाव से देश में तेजी से प्रगति होगी। विद्या-बुद्धि, तकनीक के क्षेत्र में भारत कई नए मानदंड स्थापित करेगा। सत्ता अपना प्रभाव बनाए रखेगी।
यह रहने वाली है स्थिति
- जल स्तंभ : इस वर्ष रेवती नक्षत्र 90 प्रतिशत होने के कारण भरपूर वर्षा होगी
- वायु स्तंभ : मृगशिरा नक्षत्र 60 प्रतिशत है, इससे आंधी-तूफान से क्षति होगी
- तृण स्तंभ : भरणी नक्षत्र 55 प्रतिशत रहेगा। पशुओं के लिए चारे की कमी न होगी।
- अन्न स्तंभ : पुनर्वसु नक्षत्र 55 प्रतिशत रहेंगे, इससे बेहतरीन उपज होगी और किसान खुशहाल होंगे।
दुर्गों का यह है ज्योतिष
देश की सुरक्षा मापने के चार ज्योतिषीय दुर्ग हैं। इन्हें आर्षमान कहते हैं। संवत्सर में दुर्गों के ज्योतिष का विवेचन है। प्रथम दुर्ग में आर्षमान प्रतिशत इस वर्ष 55 होगा। इससे आपदाएं कम होंगी। मूल्यों में स्थिरता होगी। द्वितीय दुर्ग में पौष अमावस्या को मूल नक्षत्र इस बार शून्य है।
सीमाओं पर संघर्ष की स्थिति बनेगी। तृतीय दुर्ग में श्रावण पूर्णिमा को श्रवण नक्षत्र इस वर्ष शून्य प्रतिशत है। देश में अंदरूनी संघर्ष बढ़ेंगे। चतुर्थ दुर्ग में कार्तिक पूर्णिमा पर कृतिका नक्षत्र प्रतिशत 80 है। है। देश की सैन्य क्षमता बढ़ेगी।
ऐसे होता है अधिकमास
पं. विपिन तिवारी के अनुसार हर चौथे साल अधिकमास चंद्रमा की गति से आता है। चंद्र परिक्रमा 27 दिन में पूरी होती है। सूर्य चक्र 30 दिन का है। ऐसे में चंद्रमास में हर माह तीन दिन बढ़ते हैं, जो हर चौथे साल में मलमास के रूप में जोड़े जाते हैं।
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