भैंस चराते समय नहर पार करने के लिए रेशमा लाठी से लगाती थी छलांग, पोल वाल्ट में विदेश से ले आईं कांस्य पदक
प्रयागराज की रेशमा पटेल ने बर्मिंघम में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स के पोल वाल्ट में कांस्य पदक जीता। कभी औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लेने वाली रेशमा ने बचपन में भैंस चराते हुए नहर पार करने की लाठी वाली छलांग को अपनी ताकत बनाया। रेशमा ने 2.50 मीटर की छलांग लगाकर यह मुकाम हासिल किया।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगम नगरी के तिली का पूरा अब्दालपुर गांव की निवासी रेशमा पटेल ने बर्मिंघम (अलाबामा, अमेरिका) में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स के पोल वाल्ट में 2.50 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। यह पदक कोई साधारण उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, हौसले और गांव की बाग, नहरों से शुरू हुए सपनों की उड़ान है। रेशमा ने कभी पोल वाल्ट की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। बचपन में भैंस चराते हुए नहर पार करने के लिए लाठी से छलांग लगाती थीं। उन्होंने इसे अपनी ताकत बनाया। उस नन्हीं बच्ची को क्या पता था कि यही देसी अभ्यास एक दिन विश्व मंच पर कामयाबी दिलाएगा।
तिली का पूरा गांव की गलियों में धूल उड़ाते, खेतों में भैंस चराते रेशमा की जिंदगी सादगी से भरी थी। पिता विजय बहादुर पटेलऔर माता निर्मला देवी की लाडली रेशमा अपने भाई अंतरराष्ट्रीय एथलीट इंद्रजीत पटेल और अंतरराष्ट्रीय एथलीट बहन रोजी के साथ गांव के बाग में खेलती थी। नहर पार करने के लिए वह लाठी के सहारे एक झटके में उड़ान भरती, मानो आसमान उसका इंतजार कर रहा हो। रेशमा कहती हैं, "नहर पार करना खेल जैसा था। हजारों बार लाठी थामकर छलांग लगाई। मुझे नहीं पता था कि यह अभ्यास मुझे विश्व मंच पर ले जाएगा। पदक का तो ख्याल भी नहीं था, बस इतना जानती थी कि मैं छलांग लगा सकती हूं।"
शनिवार को जब रेशमा ने पोल वाल्ट में हिस्सा लिया, तो दर्शकों की सांसें थम गईं। बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के उन्होंने ऐसी उड़ान भरी कि दुनिया दांतों तले उंगली दबा बैठी। 2.50 मीटर की छलांग ने उन्हें कांस्य पदक दिलाया। रेशमा की आंखों में चमक थी जब उन्होंने कहा, "यह मेडल मेरे गांव की मिट्टी, मेरे माता-पिता और भाई-बहन की दुआओं का नतीजा है।" पिता विजय बहादुर गर्व से कहते हैं, "हमारी रेशमा ने साबित कर दिया कि मेहनत और हिम्मत के आगे कोई रुकावट नहीं।" माता निर्मला देवी भावुक होकर बोलीं, "वह बचपन से ही नन्हा तूफान थी। आज उसने दुनिया को दिखा दिया।"
रेशमा की इस जीत ने तिली का पूरा को गौरव से भर दिया। भाई इंद्रजीत कहते हैं, "बहन की उड़ान अब तो हमें भी सपने देखने की हिम्मत देती है।" बहन रोजी ने कहा, "रेशमा ने हमें सिखाया कि सपने बड़े हों या छोटे, मेहनत से सब मुमकिन है।" पहले पैदल चाल में स्वर्ण और अब पोल वाल्ट में कांस्य जीतकर रेशमा ने साबित कर दिया कि गांव की गलियों से शुरू होने वाली उड़ान विश्व मंच तक पहुंच सकती है।
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