Updated: Wed, 13 Aug 2025 01:46 PM (IST)
प्रयागराज के बंधवा में स्थित बड़े हनुमान मंदिर का 36 करोड़ का कॉरिडोर पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो गया। गंगा-यमुना में बाढ़ के कारण दीवार के पत्थर टूटकर गिर गए। गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पीडीए के अनुसार नावें टकराने से नुकसान हुआ जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप नहीं थी।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बंधवा के बड़े हनुमान मंदिर का 36 करोड़ रुपये की लागत से बना कारिडोर पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। लहरों के झटकों से दीवार में लगे पत्थर कहीं टूटे तो कहीं उखड़कर गिर गए। दीवार का बाहरी हिस्सा कई जगह बर्बाद हो गया।
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प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की कारस्तानी सामने आ गई। इसकी गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 दिसंबर 2024 को कारिडोर के प्रथम चरण में निर्मित कार्यों का उद्घाटन किया था।
संगम तट के पास स्थित बड़े हनुमान जी प्रयागराज के कोतवाल हैं। इनकी प्रसिद्धि दुनियाभर में है। महाकुंभ 2025 में यहां दर्शन के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, नागरिक, तमाम पड़े पदों पर आसीन लोग आए।
नेता-अभिनेता, अन्य क्षेत्रों में प्रसिद्ध लोग आए थे। मंदिर की खूबसूरती बढ़ाने और दर्शन-पूजन की सुगमता के लिए योगी सरकार ने महाकुंभ से पहले बड़ी योजना तैयार कराई थी जिस पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने दिन-रात काम कराया।
दिसंबर में प्रथम चरण का कार्य पूरा किया गया। दीवारों पर लाल पत्थर लगाए गए। इसे पूरा मंदिर परिसर कवर हो गया। जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले हफ्ते तक गंगा और यमुना में बाढ़ आई, जिससे हनुमान जी का मंदिर डूबा रहा।
इसके पहले भी जुलाई के दूसरे हफ्ते में हनुमानजी का महास्नान हुआ था मगर तब दो दिन में ही जलस्तर नीचे चला गया था। बताते हैं कि बाढ़ का पानी हनुमान मंदिर कॉरिडोर की बाहरी दीवार से टकराता रहा। यहां तक कि पूरी दीवार ही कई दिनों तक पानी में डूबी रही।
पानी घटा तो दीवारें बर्बाद हो चुकी थीं। कई जगह पत्थर टूट कर गिर चुके थे। दर्जनों पत्थर अपनी जगह पर गिरकर चकनाचूर हो गए। दीवार कई मीटर तक खराब हो गई है।
वहीं पीडीए के अफसर सफाई दे रहे हैं कि नावों के टकराने से पत्थर टूटे जबकि वहां नावों का संचालन किया ही नहीं गया। विशेषज्ञों का कहना है कि दीवार निर्माण सामग्री और पत्थर की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं थी, जिसके कारण यह हालात उत्पन्न हो गए।
परियोजना में किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी मानक के मुताबिक थे। बाढ़ के दौरान नावें आ-जा रही थीं। इनके टकराने से दीवार के पत्थर क्षतिग्रस्त हुए। जहां दीवार क्षतिग्रस्त हुई, उसे दोबारा बनवाया जाएगा।
कौशलेंद्र चौधरी, कार्यवाहक मुख्य अभियंता, प्रयागराज विकास प्राधिकरण
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