महानगर नियोजन समिति चुनाव में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महानगर नियोजन समिति का चुनाव न कराने पर सख़्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त को 10 दिनों में प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखने का निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव को दो सप्ताह में अपेक्षित जानकारी देने को कहा गया है अन्यथा उन्हें कोर्ट में पेश होना होगा। यह आदेश कमलेश कुमार सिंह की याचिका पर दिया गया है।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। प्रदेश में महानगर नियोजन समिति का चुनाव नहीं कराने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयुक्त को निर्देशित किया है कि वह महानगर नियोजन समिति का चुनाव कराने के लिए 10 दिनों की अवधि के भीतर प्रमुख सचिव, नगर विकास को पत्र लिखें।
प्रमुख सचिव इस पत्र के परिपेक्ष्य में आयोग को अपेक्षित दस्तावेजी जानकारी दो सप्ताह की अवधि के भीतर उपलब्ध कराएं। ऐसा नहीं होने की स्थिति में अगली सुनवाई तिथि 29 अगस्त को संयुक्त आयुक्त राज्य चुनाव आयोग और प्रमुख सचिव, शहरी विकास कोर्ट में उपस्थित हों।कोर्ट ने प्रयागराज निवासी कमलेश कुमार सिंह व दो अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया है।
खंडपीठ को बताया गया कि हाई कोर्ट आठ सितंबर 2021 को इस संबंध में आदेश पारित कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
संविधान के अनुच्छेद 243 जेडई तथा उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 57-ए के अंतर्गत प्रावधानित महानगरीय नियोजन के लिए समिति गठित करने के संबंध में राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश महानगर नियोजन समिति (प्रक्रिया का विनियमन और इसके कार्यों का निष्पादन) नियम 2011 अधिसूचित किया है।
इसके नियम सात में राज्य चुनाव आयोग को समिति अध्यक्ष और सदस्यों के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उनके संचालन हेतु अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है।
22 मई 2014 की एक अन्य अधिसूचना द्वारा महानगरीय क्षेत्र के लिए महानगर योजना समिति की सदस्य संख्या 30 निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने 29 जनवरी 2015 को पत्र भेजकर राज्य चुनाव आयोग से महानगर योजना समिति के गठन के लिए कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया था।
कोर्ट को अवगत कराया गया कि सितंबर 2021 में जनहित याचिका (संख्या 4735/2016) की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट राज्य सरकार के इसी पत्र के आधार पर चुनाव आयोग को महानगर योजना समिति के गठन के लिए शीघ्र कदम उठाने का निर्देश दे चुकी है।
याचीगण कहना है कि लगभग पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद राज्य चुनाव आयोग ने महानगर योजना समिति के गठन के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। यह संविधान और कानून द्वारा सौंपे गए कर्तव्य और जिम्मेदारी का पूर्णतः परित्याग है।
कोर्ट को राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि 27 अगस्त 2024 को प्रमुख सचिव, नगरीय विकास को पत्र भेज महानगर नियोजन समिति के चुनाव के लिए कुछ जानकारी मांगी गई है। अब फिर पत्र लिखा जाएगा। कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 243-जेडई के तहत प्रदत्त संवैधानिक अधिदेश की अनदेखी की गई है।
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