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    Dhyan Chand Birth Anniversary : दद्दा यानी ध्यानचंद की नगरी की प्रतिभाएं, ब्रिटिश काल से लेकर अब तक खेल की बढ़ा रहे शान

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 05:50 PM (IST)

    प्रयागराज हमेशा से खेलों का गढ़ रहा है। यहाँ मेजर ध्यानचंद जैसे कई खिलाड़ियों ने देश का नाम रौशन किया है। भूमि और आंचल सोनकर नामक दो बहनों ने कयाकिंग में अपनी अलग पहचान बनाई है। श्रेयस मिश्र शतरंज में अपनी श्रेष्ठता साबित कर रहे हैं। प्रयागराज में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।

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    ध्यानचंद के गृह जनपद प्रयागराज की प्रतिभाओं ने कई खेलों में उच्च स्तरीय प्रदर्शन किया है।

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। दद्दा यानी ध्यानचंद तो याद होंगे....हां, हां वहीं, जिनका जलवा ऐसा था कि उन्होंने तानाशाह हिटलर के सामने उनके ही देश जर्मनी की टीम को 8-1 से हाकी में कूट दिया था। आज दद्दा का जन्मदिन है और उसके उपलक्ष्य में पूरी संगम नगरी और देश खेल दिवस मना रहा है।

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    प्रयागराज हमेशा से खेलों का गढ़ रहा है। यहां से निकली प्रतिभाएं भारतीय टीम का मान बढ़ाती रही हैं। हाकी से शुरुआत करें तो संगम नगरी में हाकी का इतिहास भी उतना ही पुराना है, जितना की दद्दा का नाम। मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयागराज में हुआ और परोक्ष रूप से हाकी का स्वर्ण जब ब्रिटिश भारत को मिला तो वह प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) से जुड़ा था। भारतीय हाकी टीम में शामिल साक्षी शुक्ला अभी अर्जेंटीना से लौटी हैं।

    सुजीत कुमार, दानिश मुजतबा ओलंपिक पदक विजेता टीम के सदस्य रहे। प्रयागराज में तैनात गुरुजीत कौर और निशा वारशी भी ओलंपिक में पदक विजेता महिला हाकी टीम की सदस्य रही। वहीं, टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हाकी टीम के कोच प्रिंस पीयूष दुबे भी यहीं के रहने वाले हैं।

    क्रिकेट में 59 रणजी खिलाड़ी, मो. कैफ जैसा शानदार क्रिकेटर देने वाले प्रयागराज में बैडमिंटन में अभिन्न श्याम, जिमनास्टिक में आशीष कुमार, एथलेटिक्स में अजय सरोज, इंद्रजीत पटेल, हैंडबाल में तेजस्विनी सिंह, बास्केटबाल में वैष्णवी यादव विभिन्न खेलों के 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने इस शहर में खेलों को अलग पहचान बनाई।

    सफलता की लहरों पर सवार हुई दो बहनों की जोड़ी

    चुंगी के पास एक झुग्गी-झोपड़ी में, दो बहनें भूमि और आंचल सोनकर अपने सपनों की लहरों पर सवार हैं। इनके पिता, राजा बाबू सोनकर, सड़क किनारे चाय का ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। गरीबी और अभावों के बीच पलीं इन बेटियों ने कयाकिंग जैसे अनजान खेल में न सिर्फ अपनी जगह बनाई, बल्कि असंभव को संभव कर दिखाया। यह कहानी है उनकी मेहनत, जुनून और हिम्मत की, जो हर बाधा को पार कर रही है।

    इन बहनों का प्रयागराज वोट क्लब में हुआ था दाखिला

    तीन साल पहले, जब इन बहनों का दाखिला प्रयागराज बोट क्लब में हुआ, तब कयाकिंग उनके लिए एक अनजान दुनिया थी। यह खेल, जिसमें पुरुषों का दबदबा है और महंगे संसाधनों की जरूरत होती है, इनके लिए आसान नहीं था। फिर भी, प्रशिक्षकों धवन कुशवाहा और नितिन सोनकर के मार्गदर्शन में, दोनों बहनें हर दिन 8-10 घंटे पसीना बहातीं। उनकी मेहनत रंग लाई। 2022 में भोपाल में हुई कयाक और कैनो नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की टीम में जगह बनाई।

    शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया

    देश भर की टीमों के बीच उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। इसके बाद, 2023 में मध्य प्रदेश में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में यूपी का प्रतिनिधित्व किया। मई 2023 में बिजनौर में पहली इंटर-स्टेट प्रतियोगिता में भूमि ने क-ेवन 500 मीटर में कांस्य पदक जीता। सितंबर 2023 में उत्तराखंड के टिहरी में ओपेन नेशनल गेम क्वालिफायर में दोनों बहनों ने के-टू 500 में फाइनल तक का सफर तय किया। दिसंबर 2023 में भोपाल में 34वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप और दिसंबर 2024 में 35वीं नेशनल चैंपियनशिप में के-टू 200 मीटर में फाइनल में पहुंचकर पांचवां स्थान हासिल किया।

    बहनों का सपना 

    राज्य और यूनिवर्सिटी स्तर पर भी उनके नाम कई पदक हैं। ‘शुरुआत’ संस्था इनके सपनों की डोर थामे है। हर माह 10,000 रुपये की डाइट और प्रशिक्षण का खर्च उठाकर संस्था इनकी राह आसान कर रही है। संस्था के संस्थापक अभिषेक शुक्ला बताते हैं तीन महीने पहले, दोनों बहनों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए भोपाल भेजा गया, जहां वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास कर रही हैं। भूमि और आंचल का सपना छोटा नहीं है। वे चाहती हैं कि उनकी कयाक की लहरें उनकी बस्ती से निकलकर ओलंपिक तक पहुंचें।

    फुटबाल में बढ़ रहे इनके कदम...

    प्रयागराज के युवा फुटबालरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हर्षित ओझा, कार्तिकेय वर्मा, उत्कर्ष गुप्ता, कुमार अंश, निशांत मिश्रा शामिल हुए। इसमें झलवा के रहने वाले नार्दन फुटबाल अकादमी के हर्षित ओझा ने इस वर्ष नेशनल फुटसल चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2019 से प्रशिक्षण ले रहे हर्षित के पिता भी राष्ट्रीय वालीबाल खिलाड़ी हैं। यूपीपी में कार्यरत पिता की प्रेरणा से अब हर्षित भी अपनी चमक बिखेरने को तैयार हैं। फाफामऊ के रहने वाले आदित्य इस वर्ष हिमाचल प्रदेश की अंडर 17 टीम का प्रतिनिधित्व डा. बीसी राय ट्राफी में करेंगे।

    शतरंज में श्रेष्ठता साबित कर रहे श्रेयस

    जार्ज टाउन के रहने वाले श्रेयस मिश्र अब शतरंज में अपनी श्रेष्ठता साबित कर रहे हैं। नौ वर्ष की उम्र से शुरु हुई उनकी चाल अब बड़े-बड़ों के पसीने छुड़ा देती है। अंडर 11, अंडर 13, अंडर 19 में यूपी का प्रतिनिधित्व कर चुके श्रेयस रजत पदक विजेता रहे। जबकि दिल्ली, मुंबई,उदयपुर, जयपुर, विशाखापट्टनम, हैदराबाद, अगरतला गुड़गांव, चंडीगढ़, नोएडा, इंदौर, पटना गोरखपुर, वाराणसी, आगरा जैसे शहरों में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना दम दिखा चुके हैं। चार वर्षों तक सीबीएसई जोनल चैंपियन रहने के बाद अब वह राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक विजेता रहे। इसी वर्ष उदयपुर में होने वाली नेशनल सीबीएसई चैंपियनशिप में वह ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

    फट गया था दद्दा का सिर, फिर मारे 12 गोल...

    पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी व इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कप्तान श्याम बाबू गुप्ता कहते हैं कि एक बार मेजर जब पंजाब रेजीमेंट की ओर से वह खेल रहे थे। विपक्षी दल के एक खिलाड़ी ने ध्यानचंद के सिर पर स्टिक मार दी। घायल होकर वह बाहर गए और पट्टी बांधकर पुन: मैदान में उतरकर छह गोल दागे। उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी की पीठ थमथपाई , कहा कि मुझे चोट न लगती तो एक गोल ही काफी था। एक बार प्रसिद्ध गायक केएल सहगल ध्यानचंद का मैच देखने गए। पहले हाफ में कोई गोल न होने पर वह बहुत निराश हुए। दद्दा ने 12 गोल मारे और इतने ही गोल से मैच जीत लिया। अफसोस आज दद्दा के शहर में ही दद्दा उपेक्षित हैं। हम सबको संकल्प लेना होगा कि दद्दा के शहर में फिर से हाकी को जीवंत करना होगा।