Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    UP News: महाकुंभ 2025 की भीड़ ने घटाई प्रयागराज एयरपोर्ट की रैंकिंग, 20 पायदान फिसला

    Updated: Wed, 09 Jul 2025 12:54 PM (IST)

    महाकुंभ 2025 के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण प्रयागराज एयरपोर्ट की रैंकिंग 20 पायदान गिरकर 37वें स्थान पर आ गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सर्वेक्षण में स्वच्छता बैगेज डिलीवरी और कर्मचारियों के व्यवहार जैसे 33 मापदंडों पर ग्राहक संतुष्टि का आकलन किया गया। सांसद प्रवीण पटेल ने एयरपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट पर चिंता जताई और इसे शीर्ष 10 में वापस लाने के लिए रणनीति बनाने का सुझाव दिया।

    Hero Image
    प्रयागराज एयरपोर्ट रैंकिंग में 20 पायदान नीचे फिसला। जागरण

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज एयरपोर्ट पर यात्रियों की भारी भीड़ के कारण ग्राहक संतुष्टि में कमी आई है, जिसके चलते एयरपोर्ट की रैंकिंग 20 पायदान नीचे खिसककर 37वें स्थान पर पहुंच गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) द्वारा जारी ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है। यह सर्वेक्षण देश के उन छोटे हवाई अड्डों पर किया जाता है, जहां वार्षिक यात्री आवागमन 20 लाख से कम होता है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सर्वेक्षण में शामिल 33 मापदंडों जैसे स्वच्छता, बैगेज डिलीवरी, पार्किंग, रेस्तरां, वाई-फाई, शॉपिंग, कर्मचारियों का व्यवहार, चेक-इन प्रक्रिया, सुरक्षा जांच, उड़ान जानकारी, और बैंकिंग सुविधाओं के आधार पर यह रैंकिंग तय की गई है। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज एयरपोर्ट पर एक दिन में 28 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन हुआ, जिसके कारण बैठने और खड़े होने की जगह तक की कमी हो गई। इस भीड़ ने एयरपोर्ट की सेवाओं पर दबाव बढ़ाया, जिससे यात्री अनुभव प्रभावित हुआ।

    पिछली छमाही (जुलाई-दिसंबर 2024) में प्रयागराज एयरपोर्ट 17वें स्थान पर था और वर्ष 2024 में यह शीर्ष 10 में शामिल था। लेकिन इस बार की रैंकिंग में यह केवल चार अन्य एयरपोर्ट्स से ऊपर रहा। उत्तर प्रदेश के अन्य एयरपोर्ट्स में कानपुर चकेरी 18वें, आगरा 20वें, अयोध्या 36वें, और गोरखपुर 39वें स्थान पर हैं। वहीं, उदयपुर, खजुराहो और भोपाल संयुक्त रूप से इस सूची में शीर्ष पर हैं।

    एएआइ हर छह महीने में जनवरी-जून और जुलाई-दिसंबर की अवधि के लिए यह सर्वेक्षण करता है, जिसमें केवल घरेलू उड़ान संचालित करने वाले एयरपोर्ट शामिल होते हैं। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज एयरपोर्ट ने यात्री और विमान आवाजाही में रिकार्ड बनाया, लेकिन भीड़ के दबाव ने सुविधाओं और यात्री संतुष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डाला।

    एयरपोर्ट सलाहकार समिति के अध्यक्ष सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि रैंकिंग में नीचे गिरना सही नहीं है। गंभीरता के साथ ‌ इस पर विचार करना होगा। अच्छी रणनीति बनाकर एयरपोर्ट को पुनः शीर्ष 10 में स्थान दिलाना होगा। भविष्य में बड़े आयोजनों के दौरान बेहतर प्रबंधन और संसाधनों की आवश्यकता होगी। यात्रियों की सुविधा और संतुष्टि सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छता, कर्मचारियों की दक्षता, और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना होगा।

    किसका क्या रहा प्रदर्शन

    यह सर्वेक्षण, जो 5.00 के पैमाने पर यात्रियों की संतुष्टि को मापता है, देश के 43 हवाई अड्डों के प्रदर्शन को दर्शाता है। जहां उदयपुर, खजुराहो और भोपाल ने पूर्ण 5.00 स्कोर हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, वहीं गोरखपुर, दरभंगा और प्रयागराज जैसे हवाई अड्डों में संतुष्टि स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई। औसत CSI स्कोर 2024 के 4.70 से घटकर 2025 में 4.59 हो गया, जो -0.11 की औसत कमी को दर्शाता है।

    उदयपुर, खजुराहो और भोपाल हवाई अड्डों ने राउंड-I 2025 में 5.00 का पूर्ण स्कोर प्राप्त किया, जो यात्रियों के लिए उत्कृष्ट सुविधाओं और सेवाओं का प्रमाण है। उदयपुर ने राउंड-II 2024 के 4.98 से मामूली सुधार (+0.02) दिखाया, जबकि खजुराहो (+0.07) और भोपाल (+0.16) ने भी अपनी स्थिति मजबूत की। गया हवाई अड्डे ने 4.48 से 4.99 (+0.51) तक का प्रभावशाली सुधार दर्ज किया, जो इसे शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल करता है।

    सर्वेक्षण में शिमला हवाई अड्डा सबसे बड़ा आश्चर्य रहा, जिसने राउंड-II 2024 के 3.95 स्कोर से राउंड-I 2025 में 4.88 (+0.93) का स्कोर हासिल किया। यह सुधार हवाई अड्डे की सेवाओं, बुनियादी ढांचे और यात्री अनुभव में बड़े पैमाने पर किए गए प्रयासों को दर्शाता है। इसी तरह, देवघर हवाई अड्डे ने 4.30 से 4.92 (+0.62) तक का उल्लेखनीय सुधार दिखाया, जो इसे ग्रामीण क्षेत्रों में उभरते हवाई अड्डों के लिए एक प्रेरणा बनाता है। कोल्हापुर (+0.38), रांची (+0.27), और सिलचर (+0.25) ने भी संतुष्टि स्कोर में अच्छी प्रगति दर्ज की।

    प्रयागराज में चिंताजनक गिरावट

    दूसरी ओर, कई हवाई अड्डों में ग्राहक संतुष्टि में गिरावट देखी गई। गोरखपुर हवाई अड्डा इस सूची में सबसे नीचे रहा, जहां CSI स्कोर 4.95 से गिरकर 3.20 (-1.75) हो गया। दरभंगा में भी 4.81 से 3.20 (-1.61) की भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रयागराज, जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है, ने भी 4.82 से 3.87 (-0.95) का स्कोर दिखाया, जो यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करने में चुनौतियों को उजागर करता है।

    सर्वेक्षण से पता चलता है कि छोटे और क्षेत्रीय हवाई अड्डों ने कई बड़े हवाई अड्डों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। उदयपुर, खजुराहो, और गया जैसे हवाई अड्डों ने लगातार उच्च स्कोर बनाए रखा, जो क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर बढ़ते निवेश और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है।

    हालांकि, प्रयागराज, गोरखपुर, और दरभंगा जैसे हवाई अड्डों में गिरावट चिंता का विषय है, क्योंकि ये धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। बागडोगरा (-0.93), कुल्लू-मनाली (-0.55), और राजकोट (-0.53) भी उन हवाई अड्डों में शामिल हैं, जहां संतुष्टि स्तर में उल्लेखनीय कमी आई।

    कुछ हवाई अड्डों ने स्थिर प्रदर्शन दिखाया। उदाहरण के लिए, डिब्रूगढ़ का स्कोर 4.53 पर अपरिवर्तित रहा। जम्मू (+0.01), लेह (+0.01), और विजयवाड़ा (+0.03) जैसे हवाई अड्डों ने मामूली सुधार दर्ज किया, जबकि गग्गल (कांगड़ा) (-0.03), वडोदरा (-0.03), और तूतीकोरिन (-0.05) में मामूली कमी देखी गई। तेजपुर और जैसलमेर हवाई अड्डों का सर्वेक्षण राउंड-II 2024 में अनुसूचित उड़ानों की अनुपलब्धता के कारण नहीं हो सका, लेकिन राउंड-I 2025 में इनका स्कोर क्रमशः 4.47 और 4.45 रहा।

    क्या बोले सलाहकार समिति के सदस्य

    प्रयागराज एयरपोर्ट सलाहकार समिति के सदस्य चंद्रशेखर ओझा का मानना है कि संतुष्टि स्कोर में कमी का कारण बुनियादी ढांचे की कमी, भीड़भाड़, और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में अंतर हो सकता है। विशेष रूप से, गोरखपुर और दरभंगा जैसे हवाई अड्डों पर तेजी से बढ़ते यात्री यातायात को संभालने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

    दूसरी ओर, शिमला और देवघर जैसे हवाई अड्डों ने यात्री सुविधाओं, जैसे कि चेक-इन प्रक्रिया, स्वच्छता, और कनेक्टिविटी में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके परिणामस्वरूप उनके स्कोर में वृद्धि हुई।

    यह सर्वेक्षण भारतीय हवाई अड्डों के लिए एक मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहां उदयपुर, खजुराहो, और भोपाल जैसे हवाई अड्डों ने उत्कृष्टता का परिचय दिया, वहीं गोरखपुर, दरभंगा, और प्रयागराज जैसे हवाई अड्डों को अपनी सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है।

    शिमला और देवघर जैसे हवाई अड्डों की सफलता यह दर्शाती है कि सही रणनीति और निवेश के साथ क्षेत्रीय हवाई अड्डे भी वैश्विक मानकों को छू सकते हैं। यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एएआइ को कम प्रदर्शन करने वाले हवाई अड्डों पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि भारत का विमानन क्षेत्र विश्व स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा को और मजबूत कर सके।