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    'विवेचना में गिरफ्तार न हुए तो समन पर उपस्थित होने की दशा में ज्यूडिशियल कस्टडी या रिमांड नहीं', महत्वपूर्ण फैसले में इलाहाबाद HC

    Updated: Fri, 15 Aug 2025 11:56 AM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि विवेचना के दौरान गिरफ्तार न होने पर समन के बाद उपस्थित होने और जमानत अर्जी दाखिल करने पर अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में नहीं लिया जाए। बंधपत्र लेकर प्रतिभूति बाद में जमा करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अभियुक्त को कई मामलों में जमानत मिली है प्रतिभूति जमा न कर पाने के कारण रिहाई न रोकी जाए।

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    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवेचना के दौरान गिरफ्तार नहीं हुए अभियुक्त को समन के बाद उपस्थित होने तथा जमानत अर्जी दाखिल करने पर न्यायिक अभिरक्षा में नहीं लिया जाए। बंधपत्र लेकर प्रतिभूति बाद में जमा करने की अनुमति दी जाए। यदि अभियुक्त को कई मामलों में जमानत प्राप्त है तो प्रतिभूति जमा न कर पाने के कारण रिहाई न रोकी जाए।

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    यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने गोरखपुर की कृष्णा हार्डवेयर पेंट्स सेंटर की मालिक बच्ची देवी की याचिका पर दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सभी जिला जजों व न्यायिक अधिकारियों को पालन करने का निर्देश दिया है।

    कहा है कि जहां बिना गिरफ्तारी चार्जशीट दाखिल हो और अभियुक्त ने विवेचना में सहयोग किया हो, समन पर पेश होने की दशा में ट्रायल कोर्ट नियमित या अग्रिम जमानत अर्जी सुनने के लिए न्यायिक अभिरक्षा में न लें।

    सत्र अदालत से विचारणीय मामलों में मजिस्ट्रेट धारा 230,231 बीएनएसएस का पालन करें। बिना देरी केस सत्र अदालत को भेजें। यदि चार्जशीट दाखिल होने तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई अथवा गिरफ्तारी पर रोक है तो यह संरक्षण ट्रायल पूरा होने तक प्रभावी रहेगा।

    संयुक्त निदेशक (अभियोजन) बिना गिरफ्तारी चार्जशीट वाले मामलों में अभिरक्षा में लिए गए अभियुक्तों का रिकार्ड संरक्षित रखें। जेल अधीक्षकों व अपर पुलिस महानिदेशक (अभियोजन) को भी ऐसे मामलों का रिकार्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।

    कोर्ट ने कहा है कि डायरेक्टर जेपीआरआई न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण जारी रखें और सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला बार एसोसिएशन के सहयोग से अधिवक्ताओं में जागरूकता लाने का प्रयास करें। इस संबंध में प्रति माह रिपोर्ट हाई कोर्ट भेजने का निर्देश भी कोर्ट ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कोर्ट ने कहा, ‘प्रतिभूति जमा नहीं कर पाने के कारण अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने से इन्कार नहीं किया जाए।’

    याची के खिलाफ एशियन पेंट का मिलावटी उत्पाद बेचने के आरोप में केस ट्रायल चल रहा है। याचिका में केस कार्रवाई व चार्जशीट रद करने की मांग की गई है। उसका कहना है कि वह डीलर से माल लेकर बेचती है। मिलावट के लिए उसे जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

    पुलिस ने बिना गिरफ्तारी चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट ने याची को आरोप निर्मित किए जाते समय अपना पक्ष ट्रायल कोर्ट में रखने व उस पर कानून के मुताबिक विचार करने का आदेश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट में हाजिर होने से छूट दे दी है और अगली तिथि पर जमानत बंधपत्र जमा करने का आदेश देते हुए गैर जमानती वारंट रद कर दिया है।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई अभियुक्त सात दिनों के भीतर जमानती पेश नहीं कर पाता है तो जेल अधीक्षक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को सूचित करें। अभियुक्त की रिहाई के लिए वकील की व्यवस्था की जाएगी ताकि वह बाहर आ सके।

    अगर कई राज्यों में कई मामले दर्ज हैं तो अदालत गिरीश गांधी बनाम भारत संघ के मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उसे तुरंत रिहा करेगी। रजिस्ट्रार जनरल को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आदेश की एक प्रति रखें ताकि नए दिशानिर्देश जारी करने पर विचार किया जा सके। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति संबंधितों को भेजने का निर्देश हुआ है।

    बिना गिरफ्तारी चार्जशीट वाले आरोपियों को जेल पर रोक

    कोर्ट ने उन आरोपियों को सीधे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने पर भी रोक लगा दी है जिन्हें पुलिस ने जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया था। कहा है कि ट्रायल कोर्ट अभियुक्त को जमानत बांड पर रिहा कर सकता है।