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    प्रयागराज के SRN अस्पताल का हाल, DM के निरीक्षण के दूसरे ही दिन OPD से गायब रहे डाक्टर साहब, मरीजों की परेशानी

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 06:16 PM (IST)

    प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं नजर आ रहा है। एक दिन पूर्व उीएम के निरीक्षण के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधारी। त्वचा रोग विभाग में सीनियर डाक्टर गायब रहे जिससे मरीजों को परेशानी हुई। दवा वितरण केंद्रों पर दवाएं खत्म हो गईं जिससे मरीजों को भटकना पड़ा। अन्य विभागों में भी डाक्टरों की लापरवाही देखने को मिली।

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    त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में बैठे रेजिडेंट और ठीक सामने खाली सीनियर डाक्टर की कुर्सी। जागरण

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जिलाधिकारी (DM) के निरीक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई के दूसरे ही दिन स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (SRN Hospital) में मरीजों को बड़ा झटका दिया गया। त्वचा रोग विभाग की ओपीडी जूनियर रेजीडेंट के हवाले छोड़ सीनियर डाक्टर लापता रहे। दवा के लिए मरीज दर-दर भटके।

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    जांच शुल्क जमा करने के लिए सैकड़ों लोग कतार में धक्के खाते रहे और सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में डाक्टरों की मनमानी के चलते दूरदराज से आए लोगों को इलाज आधा-अधूरा मिला। जिनके हाथ में लगाम दी गई है, वही मरीजों का इलाज सुविधाजनक बनाने की बजाए कागजी कार्यवाही में व्यस्त रहे।

    त्वचा रोग की ओपीडी में विशेषज्ञ डाक्टर की कुर्सी खाली

    शुक्रवार दिन में 12.15 बजे त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में विशेषज्ञ डाक्टर की कुर्सी खाली रही जबकि कक्ष के दरवाजे पर किसी ड्यूटी डाक्टर का नाम तक नहीं लिखा गया था। बोर्ड पर विशेषज्ञ कक्ष लिखकर काम चलाया गया। यही हाल दोपहर 1.40 बजे तक रहा। जूनियर रेजीडेंट ही मरीजों का हाल देखकर दवाएं लिखते रहे।

    मरीजों का दर्द 

    कक्ष के बाहर बड़ी देर से खड़े विकास शर्मा ने बताया कि फूलपुर से आए हैं। पता होता कि सीनियर डाक्टर नहीं बैठेंगे तो आते ही न। पीठ पर दाने निकल रहे हैं जब डाक्टर ही नहीं बैठेंगे तो पूरा इलाज कैसे हो पाएगा। मेहंदौरी से आईं ज्ञानमती ने बताया कि ओपीडी में एक मैडम ने देखा और दवाएं लिखी दीं। चेहरे की त्वचा पर बार-बार चकत्ते निकल रहे हैं। उमस भरे सीजन में परेशानी काफी बढ़ गई है।

    दोपहर डेढ़ बजे चले गए डाक्टर

    पीएमएसएसवाई भवन के भूतल पर नेफ्रोलाजी विभाग में एक सीनियर डाक्टर की ड्यूटी लगी थी। दोपहर 1.30 बजे उन्होंने कुर्सी छोड़ दी। दो रेजीडेंट ही बैठे मरीज देखते रहे।

    खत्म हो गई दवाएं, भटके मरीज

    अस्पताल में दवा वितरण के दो काउंटर हैं। शुक्रवार को मेडिसिन ओपीडी के पास वाले दवा वितरण केंद्र में सांस के मरीजों के लिए दवा खत्म हो गई। इनके अलावा कतार में लगी रोहिणी का जब विंडो तक पहुंचने का नंबर आया तो उन्हें चार में से दो दवा मिली। दो दवा के लिए कहा गया कि जन औषधि केंद्र पर जाएं। इसी तरह से पुराना केंद्रीय पैथालाजी वाले कक्ष में दवा वितरण हो रहा था तभी कतार के बीच से राधेश्याम निकल पड़े। बताया कि ब्लड प्रेशर की दवा जो डाक्टर ने लिखी है वह विंडो से नहीं दी जा रही है। जो दवा लिखी उसके लिए कहा गया कि खत्म हो गई है।

    इस पर भी डालें एक नजर 

    3000 मरीजों के हुए पंजीकरण

    900 मरीजों की दैनिक होती है जांच

    150 मरीज (औसत) पहुंचते हैं प्रत्येक ओपीडी में

    02 बजे तक निर्धारित है ओपीडी का समय

    02 केंद्र हैं दवा वितरण के

    02 ब्लाकों में होता है ओपीडी का संचालन

    02 डाक्टरों पर आखिर किसकी मेहरबानी

    डीएम के निरीक्षण में भी अनुपस्थित रहे डाक्टर 

    एसआरएन अस्पताल में एक विभागाध्यक्ष समेत दो डाक्टर अलानिया ओपीडी नहीं करते हैं। जबकि प्राइवेट प्रैक्टिस और अस्पताल संचालन में इनका पूरा समय व्यतीत होता है। ताज्जुब है कि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज से इन डाक्टरों का वेतन बराबर जारी होता है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने गुरुवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था तब भी इन डाक्टरों की उपस्थिति नहीं थी।

    क्या कहती हैं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक

    प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. नीलम सिंह का कहना है कि साढ़े 11 बजे राउंड किया तब त्वचा रोग की ओपीडी में डाक्टर थे। इसके बाद कहां गए, किसे सूचना देकर गए यह नहीं पता। विभागाध्यक्ष से इसकी जानकारी ली जाएगी। सभी ओपीडी के बाहर ड्यूटी रोस्टर चस्पा है। डाक्टरों को समय से अपनी कुर्सी पर बैठना चाहिए।