Sambhal Violence: विदेशी हथियार, पाकिस्तानी कारतूस... जामा मस्जिद की नालियों में फोरेंसिक टीम को क्या-क्या मिला?
संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। जांच में जामा मस्जिद के आसपास नालियों से नौ एमएम के कारतूस मिले जिनमें से एक पाकिस्तान और दूसरा अमेरिका में बना था। कब्रिस्तान से 7.65 एमएम के कारतूस भी मिले जिन पर यूएसए मेड लिखा था और यह कारतूस देश में प्रतिबंधित है। हिंसा की साजिश में दुबई में बैठा शारिक साठा शामिल था

जागरण संवाददाता, संभल। नवंबर, 2024 की हिंसा में विदेशी हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। तीन दिसंबर 2024 को पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने जामा मस्जिद के आसपास नालियों और झाड़ियों में जांच शुरू की थी।
नालियों की गंदगी छानने पर उसमें कुल छह खोखे मिले थे। इनमें से तीन देसी (.32 बोर) के थे। वहीं, इतने ही नौ एमएम विदेशी कारतूस के थे। इनमें से एक पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (पीओएफ) का कारतूस और दूसरा अमेरिका में बना था।
इसके अलावा एनएफ स्टार लिखा तीसरा कारतूस था। सभी कारतूसों को बैलेस्टिक जांच के लिए भेजा गया था। वहीं, पांच दिसंबर को एक बार फिर जांच के दौरान जामा मस्जिद के पास ही कब्रिस्तान से तीन खोखों के साथ ही एक मिसफायर कारतूस (चलाने के बाद फायर न होना) मिला।
ये कारतूस देश में प्रतिबंधित हैं
खास बात कि इसमें से दो खोखे 7.65 एमएम के और एक 12 बोर का था। वहीं, 7.65 बोर वाले कारतूस पर भी यूएसए मेड लिखा था। यह कारतूस देश में प्रतिबंधित है। जांच में यह भी पता चला कि हिंसा की साजिश रचने वालों में दुबई में बैठा शारिक साठा अहम किरदार था।
मूल रूप से संभल में रहने वाला साठा अंतरराष्ट्रीय ऑटो लिफ्टर है। वह 2016 से फरार होकर दुबई में छिपा है। पुलिस का शिकंजा कसने के बाद उसका दबदबा कम होता जा रहा है। इसलिए उसने अपने गुर्गों को भेजकर हिंसा कराई। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में शारिक साठा को भी नामजद किया है।
234 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
साठा 2016 से फरार है और दुबई में छिपा है। हिंसा मे दर्ज 12 मुकदमों में 11 में 234 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
इस मामले में पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए बलवा के छह मुकदमों में बीती 20 फरवरी, इसके बाद हिंसा में मारे गए दो युवकों के स्वजन की ओर से दर्ज मुकदमों में 17 अप्रैल और अन्य दो मृतकों के स्वजन की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमों में 21 अप्रैल को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए गए।
आखिर में 18 जून को जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली व सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 23 लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। यह मुकदमा भी पुलिस की ओर से दर्ज कराया गया था। मुकदमों में करीब 3750 अज्ञात व 37 नामजद आरोपियों को चिह्नित किया गया।
168 आरोपितों की जमानत अर्जियां खारिज हो चुकी है। छह लोगों को हाईकोर्ट से जमानत मिली है। एक महिला को जिला कोर्ट से राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने 50 आरोपितों पर आरोप तय कर दिए हैं। 96 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जामा मस्जिद के सदर समेत छह लोगों को जमानत मिल चुकी है।
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