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    ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगी मामौर झील; धरातल पर आकार ले रही परियोजना

    By Abhishek Kaushik Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Fri, 19 Jun 2026 04:44 PM (IST)

    मामौर झील को 2.51 करोड़ रुपये की लागत से ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देगी और स्थानीय लोगों के लिए रो ...और पढ़ें

    कैराना स्थित मामौर झील। जागरण

    कैराना स्थित मामौर झील। जागरण

    HighLights

    1. मामौर झील 2.51 करोड़ रुपये से ईको-टूरिज्म हब बनेगी।

    2. प्रवेश द्वार, चारदीवारी निर्माण के लिए नींव की खोदाई शुरू।

    3. पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    संवाद सूत्र, कैराना (शामली)। वर्षों से गंदे पानी के जलाशय और किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने के कारण चर्चा में रहने वाली मामौर झील अब नई पहचान की ओर बढ़ रही है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत झील को ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने और उसके सुंदरीकरण की कवायद शुरू हो गई है। गुरुवार को आवास विकास परिषद सहारनपुर के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रवेश द्वार और चारदीवारी आदि निर्माण के लिए नींव की खोदाई कराई, जिससे परियोजना ने धरातल पर आकार लेना शुरू कर दिया है।

    चार जून को शामली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभिन्न विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दी थी। इसमें मामौर झील भी शामिल थी। करीब 2.51 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने तेजी से कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    आवास विकास परिषद सहारनपुर के सहायक अभियंता गुफरान हुसैन ने बताया कि झील परिसर में आकर्षक प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय, कैंटीन, पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच, झील के चारों ओर एक मीटर चौड़ा पक्का मार्ग तथा हरियाली बढ़ाने के लिए घास और पौधारोपण कराया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य झील को एक विकसित ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और सांस्कृतिक महत्व को नई पहचान मिलेगी तथा यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। तहसीलदार अर्जुन सिंह चौहान ने बताया कि झील के आसपास कुछ लोगों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को हटाकर भूमि आवास विकास परिषद के सिपुर्द कर दी गई है, जिससे निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं रहेगी।

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