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    ओबरा तापीय परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता वाली 9वीं इकाई बंद, गहराया बिजली संकट

    Updated: Fri, 22 Aug 2025 05:35 PM (IST)

    बारिश कम होने से यूपी में बिजली की मांग बढ़ी है। ओबरा तापीय परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता वाली 9वीं इकाई तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई है जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। कंडेन्सर ट्यूब में लीकेज की समस्या आने से उत्पादन में कमी आई है।

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    इंजीनियर जल्द समस्या ठीक करने में लगे हैं ताकि बिजली आपूर्ति सामान्य हो सके।

    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। बार‍िश में कमी आने के बाद यूपी में बिजली की मांग में वृद्धि के बीच ओबरा तापीय परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता वाली 9वीं इकाई गुरुवार देर शाम बंद हो गई, जिससे राज्य के कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। इससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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    इंजीनियरों ने इस इकाई में आई तकनीकी समस्या को शीघ्र हल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से मानसून के बदलते तेवर के कारण यूपी के कई इलाकों में उमस भरी गर्मी बढ़ गई है, जिससे बिजली की मांग में अचानक इजाफा हुआ है। इसी संदर्भ में, कई दिनों से बंद पड़ी बिजली इकाइयों से उत्पादन को पुनः शुरू करने का प्रयास किया जा रहा था।

    गुरुवार शाम को ओबरा तापीय परियोजना की 9वीं इकाई के कंडेन्सर ट्यूब में लीकेज की समस्या उत्पन्न हो गई, जिसके कारण उत्पादन में कमी आने लगी। परियोजना प्रबंधन ने इस समस्या को देखते हुए लगभग सात बजकर 22 मिनट पर उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया।

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    इकाई के बंद होने के बाद परियोजना के कुल उत्पादन में लगभग 100 मेगावाट की गिरावट दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप, कई स्थानों पर आपात बिजली कटौती भी करनी पड़ी। ओबरा परियोजना के 'ब' ताप घर की 10वीं इकाई से 100 मेगावाट, 11वीं इकाई से 62 मेगावाट, 12वीं इकाई से 119 मेगावाट और 13वीं इकाई से 118 मेगावाट उत्पादन हो रहा था। इसके अलावा, 'स' ताप घर की दूसरी इकाई से 378 मेगावाट का उत्पादन जारी था।

    इस स्थिति ने राज्य में बिजली संकट को और बढ़ा दिया है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इंजीनियरों का प्रयास है कि जल्द से जल्द तकनीकी समस्या का समाधान कर उत्पादन को पुनः प्रारंभ किया जा सके। इस बीच, राज्य सरकार ने भी बिजली की आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। बिजली की इस स्थिति ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि उद्योगों और व्यवसायों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है। बार‍िश नहीं होने की वजह से ब‍िजली की मांग में भी पर्याप्‍त इजाफा हुआ है। 

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