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    चैत्र नवरात्र में देवी दुर्गा की पालकी पर आगमन शुभ संकेत नहीं, काशी के ज्योतिषाचार्यों ने दी म‍िलने वाली चुनौती की जानकारी

    By shailesh asthanaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Mon, 09 Mar 2026 04:49 PM (IST)

    काशी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, विक्रम संवत् 2083 का रौद्र संवत्सर और चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा का पालकी पर आगमन शुभ नहीं है। यह आर्थिक मंदी, ...और पढ़ें

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    चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा की पालकी सवारी: आर्थिक मंदी और चुनौतियों का संकेत।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी के ज्योतिषाचार्य आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, विक्रम संवत् 2083 और शक संवत् 1948 का यह वर्ष रौद्र नामक संवत्सर है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च 2026 से इस वर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। वर्षभर संकल्प आदि में रौद्र संवत्सर का ही व्यवहार किया जाएगा। भारतीय कालगणना के अनुसार, सृष्टि के आदिकाल से 1955885127 सौर वर्ष और कलयुग के आरंभ से 5127 सौर वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। रौद्र नाम का यह संवत्सर वर्ष पर्यंत राजनीतिक और प्राकृतिक सामंजस्य की दृष्टि से उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा।

    ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सवारी तय करने का आधार भी महत्वपूर्ण है। रविवार या सोमवार को हाथी (गज) पर सवारी, शनिवार या मंगलवार को घोड़ा (तुरंगम) पर, गुरुवार या शुक्रवार को पालकी (डोली) पर और बुधवार को नौका (जहाज) पर सवारी का फल अलग-अलग होता है। विशेष रूप से, पालकी सवारी का फल महत्वपूर्ण है।

    शशिसूर्ये गजारूढ़ा, शनिभौमे तुरंगमे।
    गुरुशुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता।।
    फलम् - गजे च जलदा देवी , छत्रभङ्ग तुरंगमे।
    नौकायां सर्व सिद्धिस्यात् दोलायां मरणं धुव्रम्।।

    चैत्र नवरात्रि में माता की सवारी का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे आने वाले समय का शुभ-अशुभ संकेत मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ दुर्गा इन नौ दिनों के लिए जब पृथ्वी पर आती हैं, तो एक विशेष वाहन पर सवार होकर आती हैं। प्रत्येक वाहन का अलग फल संकेत माना गया है। देवी पुराण के अनुसार, पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता है। यह संकेत है कि देश में आर्थिक मंदी आ सकती है।

    प्रकृति अपने रौद्र रूप में जान-माल का नुकसान कर सकती है। मां दुर्गा का इस तरह आना देश-दुनिया में महामारी के बढ़ने के संकेत भी देता है। यह अस्थिरता और चुनौतियों का संकेत है। इस वर्ष रौद्र संवत्सर के दौरान राजनीतिक और प्राकृतिक घटनाओं में उतार-चढ़ाव की संभावना है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस समय देश में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, भक्तों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

     काशी के ज्योतिषाचार्यों ने इस वर्ष की चुनौतियों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा की पालकी पर आगमन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी कई संकेत प्रदान करता है। भक्तों को चाहिए कि वे इस समय विशेष ध्यान रखें और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ें।