बीएचयू ट्रामा सेंटर में बाउंसरों ने पिता का इलाज कराने गए साफ्टवेयर इंजीनियर को पीटा, देखें वीडियो...
वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर में बाउंसरों द्वारा मरीज और तीमारदार के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। साफ्टवेयर इंजीनियर दिलीप मौर्य अपने पिता का इलाज कराने आये थे जहां बाउंसरों ने उनसे दुर्व्यवहार किया और मारपीट की। दिलीप ने बाउंसरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बीएचयू ट्रामा सेंटर में एक बार फिर बाउंसरों द्वारा मरीज और उनके तीमारदार के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। करेमुआ, भैंसहीं, चंदौली के निवासी और पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर दिलीप मौर्य शनिवार को अपने पिता सियाराम मौर्या का इलाज करवाने के लिए बीएचयू ट्रामा सेंटर की ओपीडी में पहुंचे थे।
उन्होंने डाक्टर सौरभ सिंह को दिखाने के लिए पर्चा कटवाया और ओपीडी नंबर 9 में अपने नंबर का इंतजार कर रहे थे। दिलीप ने बताया कि वहां काफी भीड़ थी, जिसके कारण उन्होंने सर सुंदरलाल चिकित्सालय में बाउंसर के पद पर तैनात अपने बहनोई से फोन पर बात करने का निर्णय लिया। इसी दौरान, वहां मौजूद बाउंसरों ने उनसे बात करने को कहा। इस पर बाउंसर नाराज हो गए और दिलीप को धकेलते हुए गाली-गलौज करने लगे।
देखें वीडियो :
#Varanasi ट्रामा सेंटर में मरीज को दिखाने आये सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बाउंसरों ने पीट दिया तो वह फफक कर रो पड़े... @bhupro pic.twitter.com/f0B42TnkU8
— Abhishek sharma (@officeofabhi) August 30, 2025
जब दिलीप ने इसका विरोध किया, तो चार से पांच बाउंसरों ने मिलकर उनकी पिटाई कर दी और उनकी शर्ट भी फाड़ दी। दिलीप ने बताया कि बाउंसरों ने उन्हें कमरे में बंद करके उनके सीने, पीठ और सिर पर भी मारा, जिससे उन्हें काफी दर्द हो रहा है।
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घटना के बाद, प्रॉक्टरकर्मी मौके पर पहुंचे, जहां दिलीप फफक कर रो पड़े। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा, "मैं सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, मैं भी टैक्स पे करता हूँ। अपने पिता को दिखाने आया था, लेकिन हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।" मारपीट की सूचना मिलने पर लंका पुलिस मौके पर पहुंची। दिलीप मौर्य ने बाउंसरों के खिलाफ लिखित तहरीर दी है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
यह घटना अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। बीएचयू ट्रामा सेंटर में मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ इस तरह की हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं। अस्पताल में बाउंसरों की तैनाती का उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन यदि वे ही मरीजों और तीमारदारों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
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दिलीप मौर्य की इस घटना ने न केवल उनके लिए बल्कि अन्य मरीजों के लिए भी एक भयावह अनुभव उत्पन्न किया है। अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों को इस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो कि एक संवेदनशील मुद्दा है। अस्पताल प्रशासन को इस मामले में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। मरीजों और उनके तीमारदारों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना अस्पताल की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। बाउंसरों की भूमिका को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है ताकि वे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें, न कि उन्हें डराने-धमकाने का कारण बनें। इस प्रकार की घटनाएं न केवल मरीजों के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय हैं। हमें उम्मीद है कि संबंधित जिम्मेदारों को इस मामले को गंभीरता से लेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे।
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