एपीके फाइल से 42 लाख की ठगी करने वाले पांच साइबर ठग धनबाद से गिरफ्तार
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एपीके फाइल से 42 लाख की ठगी करने वाले पांच साइबर ठग धनबाद से गिरफ्तार
जागरण संवाददाता, वाराणसी : ढेर सारी कवायद के बाद भी साइबर ठग लोगों को लूटने से बाज नहीं आ रहे। हालांकि पुलिस भी अपना काम पूरी तन्मयता से कर रही है। इसी क्रम में जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने एपीके फाइल से मोबाइल हैक करके 42 लाख रुपये की ठगी करने वाले पांच साइबर ठगों को धनबाद से गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने चौबेपुर के तिवारीपुर निवासी रिटायर्ड एकाउंटेंट मदन मिश्रा के बैंक खाते से रुपये उड़ा दिए थे। पकड़े गए साइबर ठगों के पास से कार, नगदी, कागजात आदि बरामद हुए।
डीसीपी क्राइम आकाश पटेल ने बताया कि मदन मिश्रा ने पिछले साल आठ दिसंबर को साइबर क्राइम थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने बताया था कि उनकी जानकारी के बिना सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की नगर निगम शाखा के बैंक खाते से 42 लाख रुपये निकाल लिए गए। एसीपी विदुष सक्सेना के नेतृत्व में साइबर क्राइम की टीम ने अपनी जांच शुरू की तो पता चला कि साइबर ठगों ने मदन मिश्रा के मोबाइल पर संदेश के रूप में ट्रोजन व एसएमएस बेस्ड एपीके फाइल भेजी थी। उन्होंने गलती से उसे डाउनलोड कर लिया। इससे साइबर ठगों ने उनका मोबाइल हैक कर उसमें मौजूद जानकारी की मदद से उनके बैंक खाते से 42 लाख रुपये उड़ा दिए। कुछ दिनों बाद मदन बैंक गए तो उन्हें इसकी जानकारी हुई।
पुलिस टीम ने जिस नंबर से मैसेज भेजा गया था और जिस बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर किए गए थे उसकी जांच की। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस व डिजिटल फूटप्रिंट के माध्यम से जानकारी मिली की साइबर ठगी करने वाले ठग झारखंड के धनबाद के रहने वाले हैं। धनबाद पुलिस से सहयोग से उनको गिरफ्तार कर लिया। साइबर ठगों की पहचान धनबाद के कालाडाबर निवासी सगे भाई शमीम अंसारी, नसीम असामी, उनके पिता फकरूद्दीन, शाहबुद्दीन अंसारी और जिलिंगटाड के साहब लाल मरांडी के रूप में हुई। इनके पास से 14 एंड्रायड मोबाइल, सिम कार्ड, मुखिया की मुहर पैड के साथ, ब्लैंक आधार अपडेशन फार्म, बिना नंबर की ब्रेजा कार, 66 हजार रुपये बरामद किए गए है। साइबर ठगों ने पूछताछ में बताया कि एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन का एक्सेस ले लेते हैं। इंटरनेट बैंकिंग, यूजर आइडी, पासवर्ड, ओटीपी हासिल करके बैंक खातों से म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। ग्राम प्रधान के फर्जी लेटर पैड, मुहर व आधार अपडेशन फार्म का अवैध रूप से प्रयोग करते हुए विभिन्न व्यक्तियों का आधार का पता आदि बदल दिया जाता है। उन आधार कार्ड के माध्यम से विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाते हैं और उनका प्रयोग साइबर अपराध में करते हैं। फकरूद्दीन के खिलाफ धनबाद में दो मुकदमे दर्ज हैं।
मुकदमा दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस लगातार मामले की जांच में लगी रही। पता चला कि मदन मिश्रा का बैंक खाता जुलाई में हैक कर लिया गया था। उसमें से रुपये म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। उन बैंक खातों को पीछा करते हुए पुलिस झारखंड में साइबर ठगी के लिए कुख्यात जामताड़ा के करीबी गांव कालाडाबर पहुंची। यहां एक बैंक एटीएम से ठगी के रुपये निकाले जा रहे थे। उस एटीएम के कैमरों की फुटेज को खंगाला गया तो ठगों के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के लिए मामले का राजफाश करना आसान नहीं था। इस मामले में पता ही नहीं चल पा रहा था कि ठगी हुई कैसे। मदन के मोबाइल डाटा को रिकाल किया गया। साइबर ठगों की पहचान होने के बाद उन्हें उनके गांव से गिरफ्तार करना आसान नहीं था। धनबाद पुलिस की मदद से वाराणसी की साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और वाराणसी ले आई।
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