Saiyaara फिल्म में अभिनेत्री की 'उस' बीमारी का सच जानकार आप भी चौंक जाएंगे
फिल्म सैयारा वैसे तो धूम मचाए हुए है और दर्शकों के रोने और अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया देने की खबरें तो खूब चर्चा में रही हैं। मगर फिल्म देखने वाले प्रेम में छली गई अभिनेत्री के मानसिक बीमारी की चपेट में आने की बात को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। वाराणसी के मनोविज्ञानी इसपर स्थिति स्पष्ट करते हैं।

जागरण संवाददाता, (सोनू सिंंह) वाराणसी। चर्चा में बनी हुई फिल्म Saiyaara में अभिनेत्री की उस बीमारी के बारे में भर दर्शकों के बीच खूब चर्चा हो रही है, लेकिन दिल टूटने पर युवाओं में बीमारी का सच मनोविज्ञानी सामने ला रहे हैं।इसके पीछे सपनों में अनचाहा भय और संशय का खौफ ही नहीं बल्कि प्रेम की बीती गूंजें अब वैवाहिक विश्वास पर विपरीत प्रभाव के रूप में भी सामने आ रही हैं।
वाराणसी के सखी वन स्टाप सेंटर में पहुंचने वाले जान बचाने के मामले फिल्म सैयारा या काफी कुछ उस जैसी ही कहानी कहते नजर आते हैं। फिल्म में प्रेम और फिर विवाह टूटने की घटना से बीमारी उपजी बताई गई है। विवाह में जहां दो आत्माएं मिलती हैं, वहीं अब उसमें अतीत की परछाइयां शंका और भय का बीज बो रही हैं। साजन के सपनों में जब कोई पुरानी छाया घुल जाए, तो दांपत्य की बुनियाद तक डगमगाने लगती है। बीते दिनों इंदौर, मेरठ, रायपुर, लुधियाना और मुंबई जैसे शहरों में सामने आए पत्नी और प्रेमी द्वारा मिलकर पति की हत्या के सनसनीखेज मामले भी खूब चर्चा में रहे हैं।
तमाम घटनाओं की भयावह प्रतिध्वनि अब वाराणसी तक भी पहुंच रही है, जहां पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल परिसर में संचालित सखी वन स्टाप सेंटर में ऐसे मामले आने लगे हैं, जिनमें प्राणों की रक्षा हेतु परिजन गुहार लगाने को विवश हैं। सेंटर में दर्ज 10 प्रतिशत मामलों में विवाह से पूर्व के प्रेम संबंधों के कारण वैवाहिक जीवन पर संकट मंडराता देखा गया है।
तीन महीनों में उभरी चुपचाप लेकिन चिंताजनक लहर
सेंटर की प्रभारी रश्मि दुबे बताती हैं कि बीते तीन माह से एक नई प्रवृत्ति उभर कर सामने आई है, जिसमें पत्नी के अतीत के रिश्ते वर्तमान जीवन में जहर घोल रहे हैं। इन प्रकरणों की विशेष बात यह है कि पति स्वयं नहीं, बल्कि उसकी मां या बहन तक सखी सेंटर पहुंचकर बेटे की जान बचाने की गुहार लगा रही हैं। यह सामाजिक बदलाव बेहद चिंतनशील है, जहां नारीत्व के प्रति आदर और संस्कारों की परंपरा के बीच भय ने घर कर लिया है।
- मई 2025 में कुल 45 केस सखी सेंटर में दर्ज हुए। रामनगर, लंका और चोलापुर थाना क्षेत्रों से आए तीन मामलों में परिजनों ने बहू के पुराने प्रेमी से मिलकर पति की हत्या की आशंका जताई।
- जून माह में आए 40 मामलों में से लोहता, कपसेठी, जंसा और कछवा क्षेत्रों के चार मामले ऐसे थे, जिनमें प्रेम संबंधों के चलते घर की शांति बिखरने लगी थी।
- जुलाई में अब तक 44 केस दर्ज हुए हैं। जिसमें मिर्जामुराद, जंसा और लोहता थाना क्षेत्र से आए तीन मामलों में पूर्व प्रेमी द्वारा विवाहिता के जीवन में हस्तक्षेप की बात सामने आई।
काउंसलिंग का प्रयास, परंतु घाव गहरे हैं...
सेंटर की काउंसलर खुशबू सिंह तथा केस वर्कर प्रियंका तिवारी और पूजा सिंह इन मामलों में संवेदनशीलता और दृढ़ता से काउंसिलिंग कर रही हैं। प्रभारी रश्मि दुबे के अनुसार, पहले जहां प्रेम प्रसंगों को सामान्य समझाकर सुलझाया जा सकता था, वहीं अब इंदौर के राजा रघुवंशी, मेरठ के सौरभ, रायपुर के किशोर और लुधियाना सहित अब मुंबई में टाइल्स के नीचे पति को दबाने के केस लोगों की स्मृतियों में डर की तरह बस चुके हैं। अब तक केवल लोहता थाना क्षेत्र के एक मामले में दोनों पक्षों की सहमति से समाधान संभव हुआ है, शेष में स्थिति जटिल बनी हुई है। कहीं आंखों में अनकहा भय है, तो कहीं दिलों में अविश्वास और सदमे सरीखी चुप्पी भी है।
सखी वन स्टाप सेंटर, संकट की घड़ी में उम्मीद की रोशनी
हर जनपद में संचालित सखी वन स्टाप सेंटर महिलाओं के लिए एक समग्र सहायता केंद्र है। वाराणसी में यह सेंटर पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल परिसर में स्थित है, जहां संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी परामर्श, चिकित्सा, आश्रय, पोषण और सुरक्षा जैसे सभी आवश्यक संसाधन एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर पीड़िता को पांच दिनों तक सेंटर में आश्रय भी दिया जाता है। यहां कैंट थाना अंतर्गत सखी पुलिस चौकी भी संचालित है, जिसमें महिला चौकी प्रभारी शिल्पी पांडेय के नेतृत्व में कांस्टेबल प्रतीक्षा दीक्षित, आकांक्षा सिंह और प्रिया सिंह तैनात हैं। ये अधिकारी प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ नारी सुरक्षा में संलग्न हैं।
जब अतीत वर्तमान का पीछा करने लगे
जिस प्रेम को कभी स्मृति की मधुर छाया माना जाता था, वह अब वैवाहिक जीवन के विश्वास को निगलने वाला साया बनता जा रहा है। रिश्तों की नींव अब केवल संस्कार नहीं, सतर्कता और संवाद पर भी टिकी है। सखी वन स्टाप सेंटर जैसे संस्थान आज केवल मदद का केंद्र नहीं, बल्कि टूटते भरोसे को जोड़ने का प्रयास बन गए हैं। शायद अब वक्त आ गया है कि विवाह से पहले केवल कुंडली नहीं, अतीत के साए भी परखे जाएं...।
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