काशी में पुनर्विकास के 31 माह बाद भी मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट का नहीं बदला स्वरूप
वाराणसी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के पुनर्विकास कार्य 31 महीने बाद भी अधूरे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शिलान्यास के बावजूद, ये परियोजनाएं बारिश, ब ...और पढ़ें

महाश्मशान मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास ऐसे होने वाला है। जागरण
जागरण संवाददाता, वाराणसी। नव्य भव्य श्रीकाशी विश्वनाथ धाम दर्शनार्थियों को लुभा रही है तो वहीं सड़क, सेतु, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए बेहतर कार्य को जनता महसूस भी कर रही है। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास की एक तरफ सूची तैयार हो रही है तो वहीं कुछ बड़ी परियोजनाओं के पूर्ण न होने का मलाल लापरवाही की अलग कहानी भी सुना रही है।
महाश्मशान मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास पिछले 31 माह से चल रहा है लेकिन जमीन पर अब तक आकार नहीं लिया। कभी बारिश ने तो कभी बाढ़ ने राह रोकी। कभी विवाद आड़े आया तो कभी बजट का रोडा।
प्रशासन सीएसआर फंड से होने वाले इस निर्माण को लेकर कभी सख्त नहीं दिखी। लिहाजा काम जारी है, हर साल निर्माण पूर्ण होने की डेटलाइन जारी हो रही है। जबकि इस परियोजना से जनजन का जुड़ाव है और निर्माण का इंतजार है।
प्रधानमंत्री ने इन दोनों घाट का शिलान्यास जुलाई, 2023 में की थी। लेकिन इन दोनों परियोजनाओं के निर्माण में कभी तेजी नहीं दिखी। मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर रूपा फाउंडेशन लगभग 18 करोड़ व हरिश्चंद्र घाट पर जिंदल ग्रुुप लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। मणिकर्णिका पर अब तक ढांचा नहीं खड़ा हुआ तो वहीं हरिश्चंद्र पर ढांचा खड़ा हुआ तो छत नहीं पड़ी।
मणिकर्णिका का पुनर्विकास कार्यदायी एजेंसी अभियंत्रण के जिम्मे
महाश्मशान मणिकर्णिका का पुनर्विकास कार्यदायी संस्था अभियंत्रण के जिम्मे है। रूपा फाउंडेशन की ओर से इस संस्था को जून, 2026 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है। पहले इस कार्य को कार्यदायी एजेंसी बीआइपीएल (ब्रिजटेक इंफ्राविज़न प्राइवेट लिमिटेड) को करना था लेकिन दिसंबर, 2025 में इस संस्था ने कार्य करने से मना कर दिया था।

महाश्मशान मणिकर्णिका। जागरण
नई कार्यदायी एजेंसी कार्य करा रही है। कार्य के दौरान ही घाट पर मूर्ति टूटने को लेकर लंबा विवाद चला। हालांकि विवाद के थमने के बाद पुन: कार्य तेजी आई है। एजेंसी का दावा है कि बरसात से पहले ढांचा खड़ा कर देंगे और साल के अंत तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
ये होने हैं महत्वपूर्ण कार्य
- चुनार के बलुआ पत्थर व जयपुर के गुलाबी पत्थरों घाट को संवारने के साथ 32 क्रेमाटाेरियम का निर्माण, प्रदूषण से मुक्ति के लिए ऊर्जा एजेंसी की ओर से अत्याधुनिक चिमनी का निर्माण
- विजिटर मार्ग, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, वेटिंग हाल, दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र डेवलप
- मणिकर्णिका कुंड, रत्नेश्वर महादेव मंदिर समेत अन्य छोटे मंदिरों का भी जीर्णोद्धार होना है।
- छत की पड़ी तो चिमनी का
चिमनी में उलझा अब हरिश्चंद्र घाट
जिंदल ग्रुप के सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्था जेएसडब्ल्यू (जिंदल साउथ वेस्ट) फाउंडेशन के सीएसआर फंड से हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास हो रहा है। इस घाट के निर्माण में भी कभी बिजली का ट्रांसफार्मर हटाया जाना तो कभी छोटे छोटे मंदिरों के शिफ्ट करना रोड़ा बना। हालांकि एजेंसी की ओर से यहां तेजी से कार्य कराया जा रहा है।
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ढांचा खड़ा हो चुका है लेकिन छत नहीं पड़ी है। एजेंसी का कहना है कि जब तक चिमनी उपलब्ध नहीं होगी, छत नहीं पड़ सकती है। इस घाट पर सात चिमनी लगनी हैं, एक चिमनी की लागत लगभग पचास लाख है। बताया जा रहा है कि ऊर्जा एजेंसी को पैसा का भुगतान होना है। कब चिमनी मिलेगी, कब छत पड़ेंगी? फिलहाल सब मौन है। इस घाट से छोटे मंदिरों को शिफ्ट किया जाना था लेकिन यह भी कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है।
इस घाट पर 13 शवदाह गृह (क्रेमाटोरियम) का निर्माण होना है। घाट पर बिजली के साथ ही लकड़ी से भी शवदाह की व्यवस्था रहेगी। प्रदूषण से बचाव के लिए ऊर्जा गैस इक्विपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड एजेंसी की ओर से 100 फीट की चिमनी लगायी जानी है।
इस घाट पर जलते शवदाह नहीं दिखेंगे। पर्यटकों की पहुंच के लिए अलग से मार्ग भी होगा। इसके अलावा घाट पर पंजीकरण कक्ष, सामुदायिक वेटिंग एरिया, हाल, सामुदायिक शौचालय, रैंप, स्टोर रूम, कोर्ट यार्ड, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था, सड़़क आदि निर्मित होंगे।
जो हो न सका
- प्रधानमंत्री ने सात जुलाई 2023 को किया था शिलान्यास
- विकास की रफ्तार में नियोजन की कमी, कभी तेजी तो कभी दिख रही सुस्ती
- महाश्मशान पर ढांचा नहीं खड़ा हुआ तो हरिश्चंद्र घाट पर नहीं पड़ रही छत
महत्वपूर्ण: मणिकर्णिका घाट
- भू-तल का कुल क्षेत्रफल 29.350 वर्ग फीट
- दाह संस्कार का क्षेत्रफल 12,250 वर्गफीट
- प्रथम तल कुल क्षेत्रफल 20, 200 वर्गफीट
- निर्माण का आर्किटेक्ट एजेंसी इडिफिस
- निगरानी के लिए नगर निगम है नोडल
- प्राइवेट कार्यदायी संस्था अभियंत्रण
महत्वपूर्ण: हरिश्चंद्र घाट
- 13,250 वर्ग फीट क्षेत्र में हो रहा हरिश्चंद्र घाट का पुनर्विकास
- सड़क मार्ग से 1.8 मीटर ऊपर शवदाह स्थल
- कवर्ड एरिया में जलेंगे शव, कार्यदायी संस्था बीआईपीएल
- डिजाइनर एडिफाइस(मुंबई), नगर निगम नोडल



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