प्रकृति की गोद में रोमांच की अनुभूति करातीं चकराता की वादियां, देहरादून से महज कुछ घंटे दूर
चकराता उत्तराखंड का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है जो प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों को बहुत पसंद आता है। यहां आप हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों शंकुधारी देवदार के जंगलों और खूबसूरत झरनों का नज़ारा ले सकते हैं। चकराता में कई साहसिक गतिविधियां भी की जा सकती हैं। चकराता पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा देहरादून में हैं।

विजय मिश्रा, जागरण देहरादून। Chakrata: आप प्रकृति को करीब से निहारने के साथ रोमांच का भी शौक रखते हैं तो उत्तराखंड का चकराता हिल स्टेशन आपका इंतजार कर रहा है। सूर्य रश्मियों में नहाई हिमालय की पर्वत मालाओं और शंकुधारी देवदार के जंगल से घिरा चकराता पर्यटन प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है। चकराता की ऊंची पर्वत शृंखलाएं कई साहसिक गतिविधियों का निमंत्रण देती हैं।
पेशेवर पर्वतारोही 10 हजार फीट ऊंची खरम्बा चोटी पर चढ़ सकते हैं। यह चकराता का सबसे ऊंचा पर्वत है। इसके अलावा यहां ट्रेकिंग, कैंपिंग और गांवों की सैर भी की जा सकती है। आसपास कई प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक स्थल, गुफाएं और खूबसूरत झरने हैं। कुछ ट्रेक इन्हीं झरनों से होकर गुजरते हैं। देहरादून जिले में समुद्रतल से 2,118 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चकराता एक सैन्य छावनी क्षेत्र है।
कालसी: चकराता और देहरादून के बीच डाकपत्थर के पास यमुना नदी के किनारे बसा छोटा-सा नगर कालसी अपनी विरासत के लिए जाना जाता है। देहरादून से 46 किमी दूर स्थित इस नगर में प्रसिद्ध मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख मौजूद हैं, जिनका निर्माण 450 ईसा पूर्व में हुआ। एएसआइ के अधीन संरक्षित यह उत्तर भारत में मौजूद अशोक का एकमात्र शिलालेख है। कालसी में यमुना और टोंस नदी की विशाल घाटी है।
चिरमिरी नेक: चकराता से चार किमी दूर चिरमिरी नेक को प्रकृति ने अद्भुत सुंदरता प्रदान की है। देवदार के जंगलों से घिरी चिरमिरी नेक चकराता की सबसे ऊंची चोटी है। मौसम साफ होने पर यहां से हिमालय की बंदरपूंछ, रोहिणी आदि चोटियों के साथ आसपास की पहाड़ियों के शानदार नजारे का आनंद ले सकते हैं। यहां विभिन्न प्रजाति के पक्षियों के साथ रंग- बिरंगी तितलियों के दीदार भी होते हैं। चिरमिरी हिमालय के उन कुछ स्थानों में से एक है, जहां से विंटरलाइन दिखाई देती है।
टाइगर फाल: भीड़भाड़ से दूर पहाड़ों के बीचोंबीच स्थित यह शानदार झरना चकराता से पांच किमी दूर है। चार किमी तक आप टैक्सी से जा सकते हैं, लेकिन एक किमी की दूरी पैदल ही तय करनी होगी। ट्रेकिंग के शौकीन यहां तक पैदल पहुंचकर रोमांच का अनुभव भी कर सकते हैं। चकराता टैक्सी स्टैंड से शुरू होने वाले इस ट्रेक के रास्ते में हरे-भरे खेत और बर्फ से ढके पहाड़ों के नयनाभिराम दृश्य और झरना सुकून देते हैं।
कोटी-कनासर: चकराता से 26 किमी दूर स्थित कोटी-कनासर पिकनिक व ट्रेकिंग के लिए आदर्श स्थान है। यहां कोटी कनासर नामक छोटा-सा गांव है। कनासर पुराने देवदार के पेड़ों के लिए जाना जाता है। एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा 6.35 मीटर परिधि वाला देवदार का पेड़ यहीं है। कनासर से बुधेर गुफा और देववन तक ट्रेकिंग भी कर सकते हैं, जो क्रमशः दो व तीन घंटे की दूरी पर स्थित हैं।
चकराता के आसपास कई सारे दर्शनीय स्थल
- चकराता से 22 किमी दूर है लोखंडी गांव।
- यहां आप यहां देवदार के पेड़ों के बीच संकरे रास्तों पर ट्रेकिंग का लुत्फ भी उठा सकते हैं।
- लोखंडी से लगभग पांच किमी दूर मोइला टाप के पास स्थित हैं ये ऐतिहासिक बुधेर गुफाएं। किवंदती है कि बुधेर गुफाओं का निर्माण पांडवों ने कराया था।
- चकराता से दो किमी दूर किमोना फाल और तीन किमी दूर चिंता हरण महादेव मंदिर।
- इसके अलावा मोइला टाप प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए लोकप्रिय गंतव्य है, जो ट्रेकिंग, कैंपिंग व बर्ड वाचिंग समेत कई तरह की गतिविधियां प्रदान करता है।
- बुग्याल (घास का मैदान) इसके आकर्षण को और बढ़ा देता है। मोइला टाप चकराता से 23 किमी दूर है।
- इसके अलावा देवदार के घने जंगल से घिरे देववन जाया जा सकता है जहां वन्यजीव और पक्षियों की कई प्रजाति पाई जाती हैं। यह चकराता से 13 किमी दूर है।
ऐसे पहुंचें
चकराता पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा देहरादून में हैं। इनसे चकराता की दूरी क्रमश: 90 और 110 किमी है। आप चाहें तो वाहन बुक करके या बस से भी चकराता जा सकते हैं। चकराता और इसके आसपास खाने-ठहरने की कोई समस्या नहीं है। अच्छे होटल, होम स्टे और गेस्ट हाउस यहां बने हुए हैं। वर्षा के सीजन को छोड़ यहां गर्मी और सर्दियों में घूमने आया जा सकता है।
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