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    देहरादून में ऐतिहासिक झंडेजी मेले का भव्य शुभारंभ, गुरु भक्ति में डूबे श्रद्धालु

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 12:59 AM (IST)

    देहरादून के श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में ऐतिहासिक झंडेजी का आरोहण कर मेले का शुभारंभ हुआ। ...और पढ़ें

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    देहरादून का ऐतिहासिक झंडा मेला आरोहण के साथ मेला शुरू हो गया।

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। श्री गुरु राम राय दरबार साहिब परिसर में ऐतिहासिक झंडेजी जी के आरोहण के साथ मेला शुरू हो गया।

    उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बने।

    शाम चार बजकर 12 मिनट पर दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज के दिशा-निर्देशन में 94 फीट ऊंचे झंडेजी का आरोहण हुआ।

    इसके साथ ही पूरा वातावरण गुरु महाराज व झंडेजी के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार ने दर्शनी गिलाफ चढ़ाया। मंगलवार को श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुआई में नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।

    Jhande ji

    झंडेजी के दर्शन के लिए दरबार साहिब परिसर के अलावा आसपास की दुकानों व घरों की छतों पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

    झंडेजी का आरोहण होते ही पूरा माहौल श्री गुरु राम राय महाराज की जय, जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल, सच्चे दरबार की जय, दरबार साहिब की जय और झंडा चढ़या चढ़या ए देरादून, संगतां मनाले खुशियां, खुशियां नाल मनाईये जन्मदिन सद्गुरु दा, देखो-देखो गुरां दा झंडा चढ़या से गूंज उठा।

    संगतें ढोल की थाप पर नृत्य करने लगीं। भावावेश में कई श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं। जिस वक्त आरोहण की प्रक्रिया चल रही थी, झंडेजी को उठाने के लिए लगी चार रस्सियों में एक टूट गई।

    हालांकि, सेवादारों ने तत्परता से दूसरी रस्सी लगाकर प्रक्रिया को शुरू कराया। वहीं, विभिन्न राज्यों से आई कुछ संगतें झंडेजी का आरोहण संपन्न होने के बाद शाम को ही दरबार साहिब में माथा टेक अपने शहरों के लिए रवाना हुईं।

    Jhanda Mela Start

    जैसे-जैसे नजदीक आता गया पल, बढ़ता रहा उत्साह

    हर वर्ष होली के पांचवें दिन चैत्र मास की पंचमी पर दरबार साहिब परिसर में ऐतिहासिक झंडेजी के आरोहण के साथ मेला शुरू होता है।

    झंडेजी के आरोहण के अद्भुत पल का दीदार व इस पुण्य को अर्जित करने के लिए तकरीबन दो हफ्ते पहले श्रद्धालुओं के दून पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे यह पल नजदीक आता गया, श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता गया।

    रविवार सुबह पूजा अर्चना के साथ पुराने झंडेजी (ध्वज दंड) को उतारने की प्रक्रिया शुरू हुई। झंडेजी को दूध, घी, शहद, गंगाजल से स्नान करवाया। नये झंडेजी पर गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया के तहत सादे, सनील व अंत में चढ़ने वाला दर्शनी गिलाफ को छूकर पुण्य अर्जित करने के लिए लालायित नजर आया।

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    बढ़ती गई जयकारों की गूंज

    दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुआई में सुनहरे गोटों युक्त मखमली वस्त्र से सुसज्जित झंडेजी के आरोहण की प्रक्रिया शुरू हुई।

    लकड़ी की कैंचियों और लोहे की रोड के सहारे श्रद्धालुओं ने झंडेजी को धीरे-धीरे खड़ा किया गया। जैसे-जैसे झंडेजी उठते गए जयकारों की गूंज भी बढ़ती गई। गुरु महाराज की भक्ति में रंगे बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्ग हर जगह जयकारों की गूंज रही।

    दर्शनी गिलाफ को छूकर मांगी मन्नत

    झंडेजी के सबसे बाहर लगने वाले दर्शनी गिलाफ को लेकर जैसे ही अनिल कुमार गोयल का परिवार दरबार साहिब परिसर पहुंचा, दर्शनी गिलाफ को छूने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। हर एक इसे छूकर मन्नत मांगता दिखा। हर कोई यही दुआ करते नजर आया कि हमें भी इसका सौभाग्य मिल जाए।

    दरबार साहिब परिसर में बरसाए फूल

    दरबार साहिब परिसर की छत से जैसे झंडेजी चढ़ते गए संगत पर पुष्पवर्षा हुई। झंडेजी के आरोहण की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंत तक अलग-अलग समय पर फूल बरसाए गए।

    इसके अलावा भी फूलों से भरी टोकरियों और थैले से भी श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई। पुष्पवर्षा होते ही दरबार परिसर गुरु महाराज के जयकारों से गूंज उठा।

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    दो घंटा 39 मिनट में दर्शनी गिलाफ चढ़ाने से लेकर आरोहण

    झंडेजी के आरोहण से पूर्व विशेष बात यह है कि इस दौरान झंडेजी को जमीन पर नहीं रखा जाता। खास बात है कि गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होने के अंत तक संगतें झंडेजी को हाथों में थामे रहती हैं।

    इस बार दोपहर दो बजकर दो मिनट से दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई और दो घंटे 10 मिनट बाद यानी शाम चार चार बजकर 12 मिनट पर झंडेजी का आरोहण हुआ।

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    बाज ने की झंडेजी की परिक्रमा

    हर वर्ष की तरह इस बार भी एक बाज ने झंडेजी व दरबार साहिब की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर गुरु महाराज के जयकारे लगाए। झंडेजी के आरोहण के दौरान बाज की इस उपस्थिति को श्री गुरु राम राय महाराज की सूक्ष्म उपस्थिति माना जाता है।

    इंटरनेट मीडिया से भी देखा सजीव प्रसारण

    झंडेजी के आरोहण के सजीव प्रसारण के लिए श्री झंडा जी मेले के मेला आयोजन समिति ने परिसर में पांच बड़ी एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की थी।

    इसके अलावा मातावाला बाग में लगी एक स्क्रीन पर भी प्रसारण होता रहा। जो किसी कारणवश आयोजन स्थल तक नहीं जा सके, उन्होंने दरबार साहिब के जारी किए क्यूआर कोड, फेसबुक, यूट्यूब के माध्यम से सजीव प्रसारण देखा। वहीं, दरबार साहिब में ड्रोन कैमरे से कवरेज की गई।

    संगत के लिए जगह-जगह लंगर व भंडारा

    शहर में दिनभर विभिन्न जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए लंगर चलते रहे। गुरुराम राय मार्केट में भव्य भंडारा सुबह छह से रात 12 बजे तक चलता रहा।

    इसके अलावा मातावाला बाग चौक, सहारनपुर चौक, जैन धर्मशाला, तिलक रोड, दर्शनी गेट, दरबार साहिब परिसर, हनुमान चौक पर भंडारे की व्यवस्था की गई थी। विभिन्न धार्मिक, सामाजिक व व्यापारिक संगठनों ने पानी, फल, हलवा, कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया।

    पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर कमाया पुण्य

    दरबार साहिब परिसर में स्थित पवित्र सरोवर परिसर में गुरु महाराज के भजन करने वाली टीम सरोवर से ही भजनों का गुणगान करती रही।

    इसके अलावा हर कोई इस सरोवर में डुबकी लगाता नजर आया। पवित्र सरोवर के पास जाने वालों ने भी हाथ जोड़कर मन्नत मांगी।

    नगर परिक्रमा कल, 27 तक रहेगा मेला

    कल मंगलवार को दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुआई में नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।

    सुबह साढ़े सात बजे दरबार साहिब से विभिन्न क्षेत्र होते हुए दोपहर ढाई बजे वापस दरबार साहिब पहुंचकर संपन्न होगी। वहीं 27 मार्च रामनवमी के दिन झंडा मेले का समापन होगा।

    मेले में उमड़ी खरीदारों की भीड़

    झंडे मेले के पहले दिन दुकानों में भी खरीदारों की भीड़ उमड़ी रही। कास्मेटिक, क्राकरी, कपड़े, साज सज्जा व दैनिक उपयोग में आने वाले सामान की खूब खरीदारी हुई।

    इसके अलावा झंडेजी पर माथा टेकने व प्रसाद चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके लिए सहारनपुर चौक से लेकर आढ़त बाजार तक विभिन्न जगहों पर खील बताशे, चने आदि प्रसाद की दुकानें सजाई गई।

    कब क्या हुआ

    • सुबह सात बजे झंडेजी (ध्वज दंड) को उतारने की रस्म शुरू हुई।
    • 08:30 बजे झंडेजी को उतारा गया। पुराने गिलाफ उतारने का क्रम शुरू हुआ।
    • 10:00 बजे झंडेजी को दूध, दही, घी, गंगाजल से स्नान कराया गया।
    • 11:40 बजे सादे गिलाफ व सनील के गिलाफ चढ़ाए गए।
    • 02:02 बजे दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू
    • 02:02 बजे दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया।
    • 03:40 बजे दरबार साहिब के सज्जानदानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को आशीर्वाद दिया।
    • 03:44 बजे दरबार साहिब के सज्जादा गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने आरोहण शुरू करने का संदेश दिया।
    • 03:42 बजे झंडेजी के आरोहण की प्रक्रिया शुरू
    • 04:12 बजे श्री गुरु महाराज के जयकारों के साथ झंडेजी का आरोहण।
    • 05:00 बजे के बाद बाहर से आई संगतों के विदा होने का क्रम शुरू।

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    देशवासियों पर बनी रहे श्री गुरु राम राय जी महाराज की कृपा: श्रीमहंत

    दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने देशवासियों को झंडा महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह प्रेम, सद्भावना, अमन-चैन,भाईचारा का संदेश देने वाला मेला है।

    झंडेजी के समक्ष शीश नवाने से हर किसी की मनोकामना पूरी होती है। संगत की झंडेजी के प्रति आस्था बढ़ रही है। उन्होंने मेले में आई संगतों पर श्री गुरु राम राय जी महाराज की कृपा सदैव बनी रहने की कामना की।

    गुरु महाराज की कृपा से मिला दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का मौका

    इस बार दर्शनी गिलाफ चढ़ाने वाले व्यापारी अनिल कुमार गोयल ने बताया कि वर्षों पूर्व परिवार ने सुख-समृद्धि के लिए दर्शनी गिलाफ की बुकिंग की थी। गुरु महाराज की कृपा है कि आज उनका नंबर आया है।

    हम इसे सौभाग्य समझते हैं। कहा कि हम बचपन से ही दरबार साहिब आते हैं, इसलिए यहां आकर मन को सुकून मिलता है। पीपलमंडी में मै. पीतांबर दास एंड संस के नाम से अनिल कुमार गोयल फुटकर एवं थोक विक्रेता हैं। यहां उनकी 75 वर्ष पुरानी दुकान है।

    चावल और मसाले की खूब हुई बिक्री

    झंडेजी मेले में विभिन्न राज्यों से पहुंची संगत यहां से कुछ न कुछ खरीदकर ले जाती है। कोई इसे धार्मिक महत्ता बताकर ले जाता है तो कई दून की पहचान उत्पादों को अपने साथ लेकर जाते हैं। झंडेजी मेले के पहले दिन दुकानों में चावल और मसाले की लोगों ने खूब खरीदारी की।