महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज की आइस रिंक में कोरिया-मलेशिया जैसा अनुभव, खिलाड़ी बोले- अब नहीं जाना पड़ेगा विदेश
हल्द्वानी के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में स्थित हिमाद्रि आइस रिंक भारतीय स्केटर्स के लिए विदेश जैसा अनुभव प्रदान कर रही है। यहां उन्हें ओलिंपिक मानकों के अनुसार प्रशिक्षण मिल रहा है जिससे उनके समय और पैसे की बचत हो रही है। एशियाई ओपन स्केटिंग ट्रॉफी में भाग लेने वाले स्केटर्स ने इस रिंक की सराहना की और भविष्य में यहाँ प्रशिक्षण जारी रखने की बात कही।

तुहिन शर्मा, जागरण देहरादून। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज स्थित हिमाद्रि आइस रिंक भारतीय स्केटर्स के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्हें प्रशिक्षण के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं हुई। उन्हें यहां ओलिंपिक मापदंड के अनुसार प्रशिक्षण मिला, जिसकी उन्होंने खुलकर सराहना की। इससे स्केटर्स के रुपये और समय दोनों की बचत हुई। आगे भी उन्होंने यहां प्रशिक्षण जारी रखने की बात कही है। जबकि इससे पहले तक भारतीय स्केटर्स प्रशिक्षण के लिए मलेशिया, कोरिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया आदि देशों के साल में कई बार चक्कर लगाते थे।
60 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी आइस रिंक में बुधवार से एशियन ओपन शार्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्राफी का आगाज हुआ। जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से 95 स्केटर्स प्रतिभाग कर रहे हैं। ट्राफी की तैयारी के लिए भारतीय स्केटर्स ने जून से हिमाद्रि आइस रिंक में प्रशिक्षण शुरू कर दिया था। ट्राफी के शुभारंभ के दौरान स्केटर्स ने अपने अनुभवों का साझा करते हुए कहा कि भारत में इससे पहले इतनी बड़ी आइस रिंक उन्होंने कभी नहीं देखी।
स्केटर्स ने अपने भविष्य की शुरुआत करते हुए बताया कि शुरू में वे दिल्ली व मुंबई की छोटी-छोटी रिंक में तैयारी करते थे। जब एशियन व विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने की बारी आई तो उन्हें विशेष प्रशिक्षण की जरूरत पड़ी। जिसके लिए उन्हें मलेशिया, कोरिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया आदि देशों में प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ा। जहां भारी भरकम खर्च के अलावा उनके समय का भी नुकसान होता था।
कोरियन कोच के माध्यम से मिला प्रशिक्षण
भारतीय स्केटर्स को प्रशिक्षित करने के लिए आइस स्केटिंग एसोसिएशन ने कोरिया से विशेष तौर पर दो कोच बुलाए थे। जिन्होंने सभी स्केटर्स को तैयार किया। इससे स्केटर्स को तनिक भी विदेश के रिंक की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।
ओलिंपिक व विंटर गेम की तैयारी
स्केटर्स ने कहा कि इस ट्राफी के माध्यम से वे वर्ष 2036 के ओलिंपिक व विंटर गेम की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा देश के लिए मेडल लाने का है। इसके लिए वे पूरी लगन व जोश के साथ आगे भी अपना प्रशिक्षण जारी रखेंगे।
मैंने 2017 में आइस स्केटिंग की शुरुआत दिल्ली के एक छोटे रिंक से की। इसके बाद प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के लिए मुझे मलेशिया, साउथ कोरिया, सिंगापुर में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ा। यह काफी महंगा था। साल में तीन से चार बार मैं विदेश जाकर प्रशिक्षण लेता था। लेकिन हिमाद्रि आइस रिंक में मुझे ओलिंपिक मापदंड के अनुसार प्रशिक्षण मिला।
- आदवे कोठारी, पुणे, भारतीय जूनियर बी टीम।
मैंने 2017 में मुंबई के एक छोटे रिंक से आइस स्केटिंग की शुरुआत की। वहां ओलिंपिक स्तर की सुविधा और ट्रैक न होने के कारण मुझे मलेशिया, कोरिया और सिंगापुर में प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ा। एक साल में करीब छह-छह महीने तक मैं विदेश में ही रहता था। हिमाद्रि आइस रिंक में प्रशिक्षण लेने के बाद मुझे बिल्कुल विदेशों की रिंक सा अनुभव हुआ।
- ईशान, पुणे, भारतीय जूनियर ए टीम।
मैंने दो साल पहले मुंबई के एक छोटे आइस रिंक से आइस स्केटिंग की शुरुआत की। एशियन विंटर गेम से पहले मैं प्रशिक्षण लेने के लिए कोरिया गई। वहां दो-दो महीने तक कई बार प्रशिक्षण लिया। हिमाद्रि आइस रिंक में मुझे ओलिंपिक मापदंड के अनुसार प्रशिक्षण मिला। इतने बड़े ट्रैक का अनुभव सिर्फ विदेश में मिला था। लेकिन यहां जरा भी उसकी कमी महसूस नहीं हुई।
- साय सहाना, बेंगुलुरु, भारतीय जूनियर सी टीम।
मैंने 2017 में रोलर स्केटिंग से अपनी शुरुआत की। पहले दिल्ली के एक छोटे आइस रिंक में प्रशिक्षण लेती थी, लेकिन जब आइस स्केटिंग की तरफ रुख किया तो बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता हुई। जिसके लिए मुझे कोरिया जाना पड़ा। हिमाद्रि आइस रिंक में आने के बाद मुझे पूरी तरह से कोरिया की रिंक सा एहसास हुआ। अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी मैं यहीं पर तैयारी करूंगी।
- नयना श्री तल्लुरी, तेलंगाना, भारतीय जूनियर ए टीम।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।