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    भारत में कॉम्पिटिशन के लिए पहुंचे थे जापानी स्केटर्स, देहरादून में चखी ऐसी डिश कि मुंह से निकला 'Wow'

    Updated: Thu, 21 Aug 2025 04:19 PM (IST)

    देहरादून के मोमोज का स्वाद जापानी स्केटर्स को खूब भाया। एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी में भाग लेने आए स्केटर्स ने चाव से मोमोज खाए। उन्हें चाऊमीन और बर्गर भी पसंद आए। आइस रिंक के प्रवेश द्वार पर जलभराव से लोगों को परेशानी हुई जिसे बाद में फायर ब्रिगेड ने ठीक किया। विस्‍तार से पढ़ें पूरी खबर ।

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    जापानी स्केटर्स को भाया दून के मोमोज का स्वाद। जागरण

    तुहिन शर्मा, जागरण देहरादून। भारत के तमाम राज्यों में अपने स्वाद व आकार के लिए मशहूर देहरादून के मोमोज का स्वाद जापानी स्केटर्स को भी खूब भाया।

    एशियन ओपन शार्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्राफी में प्रतिभाग करने पहुंचे जापान के स्केटर्स ने चटकारे लेकर लहसुन की लाल चटनी के साथ वेज और नानवेज दोनों तरह के मोमोज का आनंद लिया। उन्‍हें मोमोज इतने पसंद आए कि स्‍वाद चखते ही मुंह से 'वाव' शब्‍द निकला।

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    इसके साथ ही लाल चटनी के साथ बनी चाऊमीन और बर्गर का भी स्वाद चखा और भारतीय कोल्डड्रिकं पीकर अपना गला तर किया। स्केटर्स के देहरादून के मोमोज और चटनी की विशेष तौर पर सराहना की।

    महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज स्थित हिमाद्री आइस रिंक में ट्राफी के शुभारंभ पर खाने-पीने के स्टाल लगाए गए। जहां काफी, कोल्डड्रिंक, मोमोज, चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा, चिली पनीर, चिली चिकन आदि खाद्य सामग्रियां मौजूद रही। इसके अलावा ट्रैक सूट और फलों के स्टाल भी रहे।

    फलों के स्टाल में चकराता के सेब के साथ अमरूद आदि फल लगाए गए। विभिन्न देशों से पहुंचे स्केटर्स ने स्टाल से खाद्य सामग्री लेकर विभिन्न चीजों के स्वाद चखे। स्केटर्स ने भारतीय खाने के साथ सेल्फियां भी ली।

    आइस रिंक प्रवेश द्वार पर जलभराव से परेशान हुए लोग

    एशियन ओपन शार्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्राफी के शुभारंभ से पहले रायपुर क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई। जिससे हिमाद्री आइस रिंक प्रवेश द्वार जलभराव हो गया। इस दौरान शुभारंभ में आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    लोग प्रवेश द्वार तक अपने वाहन लेकर पहुंचे और वाहन से निकलकर पानी पर पैर रखे बिना सीधे आइस रिंक में प्रवेश किया। काफी देर तक जलभराव होने के बाद फायर ब्रिगेड के वाहन को बुलाया गया। जिसने पंपिंग के माध्यम से से बारिश के पानी को सामने खाली प्लाट में भरा।