National Sports Day: ...क्योंकि पहाड़ के फेफड़ों में है दम, इसलिए दुनिया में उत्तराखंड का सीना चौड़ा कर रहे युवा
उत्तराखंड के धावक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ओलिंपियन नीतेंद्र रावत मनीष रावत अंकिता ध्यानी और सूरज पंवार जैसे धावकों ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड लंबी दूरी के धावकों की नर्सरी है। भौगोलिक स्थिति और खानपान यहां के धावकों को मजबूत बनाते हैं कम ऑक्सीजन में भी बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

हिमांशु जोशी, जागरण देहरादून। पहाड़ की सांसों में बसी ताजगी, ऊंचाई का जोश और मेहनत की पगडंडियों से निकला जुनून, जज्बा, जोश और जिजीविषा। कदमों की रफ्तार से मंजिल छूने की तमन्ना..।
उत्तराखंड के गांवों की पगडंडियों से निकलकर देश-विदेश के मैदानों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले धावक बता रहे हैं कि मौका मिलने पर कैसे सफलता दौड़ी चली आती है। संघर्ष, धैर्य और संकल्प के संगम से कैसे दुनिया में देश का सीना चौड़ा हो सकता है।
ओलिंपियन नीतेंद्र रावत, मनीष रावत, परमजीत सिंह बिंष्ट, अंकिता ध्यानी, सूरज पंवार के साथ ही मानसी नेगी, भागीरथी बिष्ट और सोनिया ऐसे नाम हैं, जो राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्होंने अपनी प्रतिभा से प्रमाणित किया है कि उत्तराखंड लंबी रेस के धावकों की नर्सरी बन रहा है।
पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो 1500 मीटर, 3000 मीटर, 5000 मीटर, 20 किमी वाक रेस, हाफ मैराथन और मैराथन में उत्तराखंड के धावकों ने राष्ट्रीय खेलों से लेकर ओलिंपिक तक बेहतर प्रदर्शन किया है। पूर्व ओलिंपियन और प्रशिक्षक उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति, खानपान, रहन-सहन को इसका प्रमुख कारण मानते हैं।
वर्ष 2016 में रियो ओलिंपिक में वाक रेस में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके नितेंद्र रावत का मानना है कि लंबी रेस में पहाड़ के धावक इसलिए बेहतर होते हैं, क्योंकि उनका शरीर कम आक्सीजन में जीने और दौड़ने का आदी होता है। इससे उनके फेफड़े अन्य की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होते हैं।
पहाड़ों में अभ्यास करने से शरीर में लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी) और फेफड़ों की क्षमता दोनों बढ़ते हैं। 20 किमी वाक रेस में रियो ओलिंपिक में हिस्सा ले चुके मनीष रावत भी इससे इत्तेफाक रखते हैं।
द्रोणाचार्य अवाडी एवं एथलीट प्रशिक्षक अनूप बिष्ट का कहना है कि लंबी रेस में सफलता के लिए फेफड़ों का मजबूत होना जरूरी है, क्योंकि यह सीधे आक्सीजन सप्लाई और स्टेमिना पर असर डालता है।
फेफड़े अच्छी तरह काम करेंगे तो लैक्टिक एसिड धीरे बनेगा, जिससे मांसपेशियां देर से थकेंगी। वह कहते हैं हैं कि पहाड़ों पर रास्ते संकरे, ऊबड़-खाबड़ व चढ़ाई उत्तराई वाले होते हैं। इन पर रोजमर्रा की जिंदगी में चलते-भागते पैरों की मांसपेशियां और स्टेमिना बेहतर हो जाता है।
लंबी रेस में चमक रहे उत्तराखंड के सितारे
- नितेंद्र सिंह रावत, 20 किलोमीटर वाक रेस, रियो ओलिंपिक (वर्ष 2016)
- मनीष रावत, 20 किमी वाक रेस रियो ओलिंपिक (वर्ष 2016)
- परमजीत सिंह बिष्ट, 20 किमी वाक रेस, पेरिस ओलिंपिक (वर्ष 2024)
- सूरज पंवार, 20 किमी वाक रेस पेरिस ओलिंपिक (वर्ष 2024)
- अंकिता ध्यानी, 2000 मीटर स्टीपेज चेज व 5000 मीटर, पेरिस ओलिंपिक (वर्ष 2024)
- मानसी नेगी, 20 किमी वाक रेस, अंतरराष्ट्रीय धावक
- भागीरथी बिष्ट, मैराथन, अंतरराष्ट्रीय धावक
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