उत्तराखंड में नदियां विकराल, धारी देवी मंदिर को छू रही नदी; हनुमान जी के दरबार में पहुंची अलकनंदा
उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है जिससे श्रीनगर और रुद्रप्रयाग में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। श्रीनगर में धारी देवी मंदिर परिसर के पास पानी पहुंच गया और दुकानों में घुसा। रुद्रप्रयाग में हनुमान मंदिर में पानी घुसने से अफरा-तफरी मची है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क कर दिया है और नदी किनारे रहने वालों को अलर्ट जारी किया गया है।

श्रीनगर गढ़वाल/ रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जिस कारण श्रीनगर और रुद्रप्रयाग में अलकनंदा उफान पर आ गई है।
श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर धारी देवी मंदिर परिसर के पास पहुंच गया है। मौके पर जल पुलिस की टीम लोगों को अलर्ट कर रही है। मंदिर क्षेत्र में स्थित कुछ दुकानों में नदी का पानी घुस गया है।
अलकनंदा नदी का पानी ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर धारी देवी से थोड़ी आगे पपड़ासू के पास तक पहुंच गया है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील से भी लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन अलर्ट पर है। नदी किनारे लोगों को अलर्ट किया गया है।
वहीं भारी बारिश से रुद्रप्रयाग में भी अलकनंदा नदी उफान पर है। यहां अलकनंदा नदी का पानी हनुमान मंदिर में घुस गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के लोगों को अलर्ट किया गया है।
गुरुवार देर रात से हुई अतिवृष्टि और ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाओं के बाद शुक्रवार सुबह अलकनंदा नदी रौद्र रूप में आ गई। सुबह करीब दस बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 536 मीटर को पार कर गया। इससे नगर क्षेत्र में दहशत फैल गई। धारी देवी मंदिर परिसर और अल्केश्वर घाट पूरी तरह जलमग्न हो गए। करीब आधे घंटे तक अल्केश्वर घाट पर बाढ़ का पानी दस फीट की ऊंचाई तक पहुंचा रहा। इस दौरान घाट पूरी तरह डूब गया और आसपास रहने वाले लोग सहम गए। पंचपीपल के पास भी बड़ी संख्या में लोग नदी का रौद्र रूप देखने पहुंच गए।
सुबह साढ़े नौ से एक घंटे तक नदी का उफान बना रहा, जिससे लोगों को वर्ष 2013 की भीषण बाढ़ की यादें ताजा हो उठीं। हालांकि इस बार तटवर्ती क्षेत्रों में बनाई सुरक्षा दीवार के कारण पानी शक्ति विहार जैसे आवासीय क्षेत्रों में नहीं घुसा। इसी बीच धारी देवी मंदिर क्षेत्र में नदी एक मीटर नीचे बहती रही। मंदिर परिसर की कई दुकानें जलमग्न हो गईं। सुरक्षा को देखते हुए सेंट थेरेसा कान्वेंट स्कूल और चिल्ड्रन एकेडमी सहित नदी किनारे स्थित स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। नगर से पहले स्थित जलविद्युत परियोजना की झील ने भी पानी रोका, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर जीवीके कंपनी को हजारों क्यूमैक्स पानी छोड़ना पड़ा।
इसके बाद धारी देवी और गोवा बीच क्षेत्र में जलस्तर कुछ कम हुआ पर नगर क्षेत्र में नदी उफान पर रही। इससे अलकेश्वर घाट, शारदानाथ स्नान घाट और एनआइटी घाट पूरी तरह डूब गए। मिनी गोवा बीच के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर जाने से यातायात घंटों प्रभावित रहा।
यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया। बाद में जलस्तर सामान्य होने पर मार्ग खोल दिया गया। स्थिति को देखते हुए कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत ने उपजिलाधिकारी श्रीनगर को एहतियातन कदम उठाने और तटवर्ती क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपाय करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सभी विभागों को अलर्ट पर रखा है।
रामगंगा बांध से छोड़ा गया 5000 क्यूसेक पानी
कालागढ़ : पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा से कालागढ़ स्थित रामगंगा बांध का जलस्तर बढ़ गया है। शुक्रवार सुबह जलस्तर 357.200 मीटर दर्ज होने पर बांध प्रशासन ने सात जिलों को बाढ़ चेतावनी जारी कर शाम तक झील से 5000 क्यूसेक पानी रामगंगा नदी में छोड़ा। अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार झा ने बताया कि पानी छोड़े जाने की मात्रा घटाई-बढ़ाई जा सकती है। इधर, पावर हाउस से मशीन नंबर दो से बिजली उत्पादन भी जारी है। केंद्रीय जल आयोग की टीम हर दो घंटे में नदी के जलस्तर की माप ले रही है।
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