मतदाता सूची से हटे बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम, TMC में हैं इस खानदान के बेटे
मुर्शिदाबाद में पूर्व नवाब मीर जाफर के 346 वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद यह कार्रवाई हुई ...और पढ़ें

मतदाता सूची से हटे मीर जाफर के वंशजों के नाम

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राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। मुर्शिदाबाद में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक घटनाक्रम के तहत, बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम मतदाता सूची से हट जाने से वह परेशान हैं।
चुनाव आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद, नवाबी खानदान के लगभग 346 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हट गए हैं।
यह जानकारी सामने आने के बाद न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि 15वीं और 16वीं पीढ़ी के इन वंशजों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
SIR के बाद हटे नाम
लालबाग के बूथ नंबर 121 से गायब हुआ नवाबी इतिहास हालिया पूरक मतदाता सूची के अनुसार, लालबाग नव आदर्श हाई स्कूल स्थित बूथ संख्या 121 से नवाबी परिवार के सदस्यों के नाम हट गए हैं।
इनमें 82 वर्षीय सैयद रजा अली मिर्जा उर्फ (छोटे नवाब) और उनके पुत्र सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा शामिल हैं, जो वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद भी हैं।
फहीम मिर्जा का कहना है कि वर्ष 2002 से उनके नाम सूची में थे, लेकिन इस बार सुनवाई के दौरान सभी दस्तावेज पेश करने के बावजूद उन्हें अपात्र मान लिया गया। विभाजन की यादें और सुप्रीम कोर्ट का हवाला नवाब परिवार ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक विडंबना करार दिया है।
सैयद रजा अली मिर्जा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पूर्वज सैयद वासिफ अली मिर्जा ने विभाजन के समय पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव ठुकराकर भारत को चुना था।
परिवार का दावा है कि उनके प्रयासों के कारण ही आजादी के बाद तीन दिनों तक पाकिस्तान का हिस्सा रहे मुर्शिदाबाद को वापस भारत में शामिल किया गया था।
फहीम मिर्जा ने तर्क दिया कि जब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने उनके वंश को कानूनी मान्यता दी है, तो चुनाव आयोग उनकी भारतीय पहचान पर सवाल कैसे उठा सकता है?
ट्रिब्यूनल का रास्ता और मतदान से वंचित होने का डर मुर्शिदाबाद के जिलाधिकारी आर अर्जुन ने स्पष्ट किया है कि अभी तक परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर उन्हें कानूनी ट्रिब्यूनल के माध्यम से अपनी नागरिकता पुन: सत्यापित कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
परिवार की चिंता यह है कि ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण वह 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे विरासत बनाम वैधानिकता यह मामला केवल कुछ नामों के हटने का नहीं, बल्कि उस विरासत के सम्मान का भी है जिसने कभी बंगाल, बिहार और ओडिशा पर शासन किया था।
'किल्ला निजामत' के पास रहने वाले इन वंशजों का कहना है कि कल तक जिनके पूर्वज रियासत की अदालतों में न्याय करते थे, आज उन्हें अपनी पहचान के लिए सरकारी दफ्तरों की कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
भाजपा के निवर्तमान विधायक गौरीशंकर घोष ने कहा है कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम छूटा है, तो वे 'फार्म 6' भरकर इसे सुधार सकते हैं, लेकिन आयोग की प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
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