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    आरजी कर कांड में बड़ा मोड़: सबूत मिटाने और साजिश रचने के आरोपों की नए सिरे से जांच करेगी SIT

    Updated: Thu, 21 May 2026 08:01 PM (IST)

    कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म-हत्याकांड में सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने के आरोपों की नए सिरे से जांच के लिए सीबीआई के नेतृत् ...और पढ़ें

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    कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मामले में SIT गठित की

    HighLights

    1. कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मामले में SIT गठित की

    2. सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने की होगी जांच

    3. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तीन IPS अधिकारी निलंबित किए

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। देश को झकझोर कर रख देने वाले आरजी कर मेडिकल कालेज और अस्पताल के बहुचर्चित दुष्कर्म-हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले में सबूतों को नष्ट करने और पूरी घटना को दबाने के गंभीर आरोपों की नए सिरे से जांच करने का एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

    न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने इस मामले की गहन पड़ताल के लिए सीबीआइ के पूर्वी क्षेत्र के संयुक्त निदेशक की अगुवाई में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है।

    टीम के बाकी दो सदस्यों का चयन अगले 48 घंटों के भीतर कर लिया जाएगा। अदालत ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि इस जघन्य अपराध के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए पीड़िता के माता-पिता द्वारा उठाए गए सभी सवालों और दावों की गहराई से पड़ताल की जाए।

    सीबीआइ को 25 जून तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

    हाई कोर्ट ने इस जांच के दायरे को बेहद विस्तृत और कड़ा रखा है। एसआइटी को उस मनहूस रात पीड़िता द्वारा डिनर किए जाने के समय से लेकर अगले दिन उसके अंतिम संस्कार तक के पल-पल के घटनाक्रम और कड़ियों को फिर से जोड़ने को कहा गया है। सीबीआइ को किसी भी संदिग्ध या आवश्यक व्यक्ति से पूछताछ करने का पूरा अधिकार दिया गया है।

    गौरतलब है कि पीड़िता के माता-पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर आशंका जताई थी कि इस जघन्य कृत्य में एक से अधिक लोग शामिल थे और तत्कालीन प्रशासन ने असली गुनाहगारों को बचाने की कोशिश की थी।

    कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआइ को निर्देश दिया है कि वह घटना स्थल का दोबारा दौरा करे, केस डायरी, आडियो-वीडियो रिकार्डिंग्स और तस्वीरों समेत सभी दस्तावेजों की री-वेरिफिकेशन करे और आगामी 25 जून तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।

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    सुवेंदु सरकार ने तीन अफसरों को किया निलंबित 

    यह अदालती आदेश बंगाल की नवगठित भाजपा सरकार द्वारा आरजी कर फाइलों को दोबारा खोलने के ठीक बाद आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल सहित तीन आइपीएस अधिकारियों को मामले की शुरुआती जांच में ढिलाई बरतने और लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।

    सरकार का दावा है कि पुलिस अधिकारियों के फोन काल और वाट्सएप चैट खंगाले जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री की भूमिका की भी जांच होगी।

    ज्ञात हो कि अगस्त 2024 में हुई इस वारदात के बाद नागरिक स्वयंसेवक संजय राय को जनवरी 2025 में कोर्ट द्वारा मौत तक उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन ताजा आदेश ने साफ कर दिया है कि इंसाफ की लड़ाई अभी अधूरी है और पर्दे के पीछे छिपे चेहरों का बेनकाब होना बाकी है।