गंगासागर मेले को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप, भाजपा सरकार ने पहले बजट में की बड़ी घोषणा
बंगाल में भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। ...और पढ़ें

गंगासागर मेले को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप।
HighLights
गंगासागर मेले को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक महोत्सव का दर्जा।
शक्तिपीठों के संरक्षण और विकास के लिए बनेगा विरासत आयोग।
चैतन्य महाप्रभु आध्यात्मिक सर्किट से भक्ति आंदोलन का संरक्षण।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार ने अपने पहले ही बजट में राज्य की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कई बड़ी घोषणाएं कर दी हैं।
राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने सोमवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए घोषणा की कि केंद्र सरकार के सहयोग से गंगासागर मेला को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विकसित किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल गंगासागर मेले को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वित्त मंत्री ने सदन में यह भी घोषणा की कि राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों - जगद्धात्री पूजा, तारकेश्वर मेला, बारुणी मेला, रास मेला और जलपेश मेला को भी राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
धार्मिक पर्यटन को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बजट में राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों के विकास पर भी विशेष जोर दिया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि कालीघाट मंदिर, तारापीठ मंदिर और कंकालीतल्ला मंदिर समेत प्रमुख शक्तिपीठों के संरक्षण और विकास के लिए एक विरासत आयोग का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही तीर्थस्थलों के आसपास संपर्क व्यवस्था, सड़क और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बंगाल शक्तिपीठ सर्किट विकसित करने की भी घोषणा की गई है।
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राज्य सरकार ने भक्ति आंदोलन की विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से चैतन्य महाप्रभु आध्यात्मिक सर्किट विकसित करने का भी एलान किया है, जिससे धार्मिक पर्यटन के साथ बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिल सके।
चुनावी वादों को तेजी से जमीन पर उतारने का प्रयास
मालूम हो कि भाजपा ने हाल ही में संपन्न बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जारी अपने संकल्प पत्र (चुनावी घोषणापत्र) में राज्य की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने को प्रमुख एजेंडा बनाया था। पार्टी ने केंद्र सरकार के सहयोग से गंगासागर मेला, महेश का रथ, बारुणी मेला और बांदना उत्सव को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विकसित करने तथा इन्हें यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करने का वादा किया था।
इसी संकल्प पत्र में भाजपा ने राज्य के सभी शक्तिपीठों को जोड़ने के लिए शक्तिपीठ सर्किट के निर्माण और भक्ति आंदोलन के सम्मान में चैतन्य महाप्रभु आध्यात्मिक सर्किट भी विकसित करने का वादा किया था। अब भाजपा सरकार ने अपने पहले ही बजट में बड़ी घोषणाओं के जरिए इन वादों को अमलीजामा पहनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकेत दिया है।
भाजपा अपने चुनावी वादों को तेजी से जमीन पर उतारकर राज्य की राजनीतिक और सांस्कृतिक दिशा बदलने का स्पष्ट संदेश देना चाहती है। बजट की इस घोषणा को राज्य की सांस्कृतिक पहचान व धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।