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    बंगाल चुनाव: बीजेपी के 70% तो TMC के 43% प्रत्याशी दागदार, किसने उतारा सबसे अमीर उम्मीदवार?

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 10:21 PM (IST)

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 1475 उम्मीदवारों में से 23% पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 20% पर गंभीर आरोप हैं। भाजपा के 70% और तृणमूल ...और पढ़ें

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    बंगाल चुनाव में बीजेपी के 70% तो TMC के 43% प्रत्याशी दागदार

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही समय बाकी है। इस चरण में 1478 प्रत्याशी मैदान में हैं। 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स' (एडीआर) और 'पश्चिम बंगाल इलेक्शन वाच' द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण के कुल में से 1475 उम्मीदवार के शपथपत्र का आकलन किया गया है जिसमें से 345 यानी 23 प्रतिशत के शपथपत्र में आपराधिक मामलों के उल्लेख हैं।

    इनमें से 294 (20 प्रतिशत) उम्मीदवारों पर हत्या, हत्या के प्रयास और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा के 70 प्रतिशत, माकपा के 44 प्रतिशथ और तृणमूल कांग्रेस के 43 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।

    किसने उतारा सबसे अमीर उम्मीदवार?

    रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में कुल 309 (21 प्रतिशत) उम्मीदवार करोड़पति हैं। तृणमूल कांग्रेस के 72 प्रतिशथ और भाजपा के 47 प्रतिशत उम्मीदवार इस सूची में शामिल हैं। इस चरण के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति लगभग 1.34 करोड़ रुपये आंकी गई है।

    बंगाल में सबसे धनी प्रत्याशी तृणमूल के जंगीपुर (मुर्शिदाबाद) के प्रत्याशी जाकिर हुसैन 133 करोड़ की संपत्ति के साथ हैं। इसके बाद बांकुड़ा के बरजोरा के तृणमूल प्रत्याशी गौतम मिश्रा (श्याम) का नाम आता है जो 105 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। वहीं दुर्गापुर पश्चिम से तृणमूल प्रत्याशी कबी दत्ता 72 करोड़ की सपंत्ति के साथ तीसरे स्थान पर है।

    66 निर्वाचन क्षेत्रों 'रेड अलर्ट' घोषित 

    एडीआर ने 66 निर्वाचन क्षेत्रों को 'रेड अलर्ट' (संवेदनशील) घोषित किया है, जहां तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की है। 

    सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे जिन के खिलाफ आपारधिक मामले दर्ज हैं ऐसे उम्मीदवारों के चयन का कारण अपनी वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित करें। दलों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने बिना आपराधिक रिकार्ड वाले व्यक्ति को टिकट क्यों नहीं दिया।