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    चीन-पाकिस्तान मिलकर बना रहे हैं परमाणु मिसाइलें, निशाने पर ये देश; US खुफिया प्रमुख की रिपोर्ट में खुलासा

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 11:07 PM (IST)

    अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने अपनी गवाही में चीन और पाकिस्तान को अमेरिका के लिए बढ़ते परमाणु खतरे क ...और पढ़ें

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    चीन और पाकिस्तान मिलकर बढ़ा रहे हैं परमाणु मिसाइलें; अमेरिकी खुफिया प्रमुख की रिपोर्ट में खुलासा

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने अपनी गवाही में चीन और पाकिस्तान को अमेरिका के लिए बढ़ते परमाणु खतरे के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश ऐसी उन्नत मिसाइलें विकसित कर रहे हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका को उनकी मारक क्षमता में ला सकती हैं।

    2026 के वार्षिक खतरे के आकलन को पेश करते हुए गैबार्ड ने बताया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरे बने हुए हैं। ये देश परमाणु और पारंपरिक हथियारों से लैस विभिन्न प्रकार की मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जो अमेरिकी धरती को निशाना बना सकती हैं।

    गैबार्ड ने विशेष रूप से चीन और रूस की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे ऐसी एडवांस्ड डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने या चकमा देने में सक्षम हैं।

    उत्तर कोरिया की आईसीबीएम पहले से ही अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने में सक्षम हैं, और प्योंगयांग अपना परमाणु हथियार भंडार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उत्तर कोरिया के रूस और चीन के साथ गहरे होते संबंधों पर चिंता जताई, जिससे वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

    पाकिस्तान के संदर्भ में गैबार्ड ने कहा कि इस्लामी गणराज्य लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिनमें संभावित रूप से आईसीबीएम शामिल हो सकती हैं, जो अमेरिका पर हमला करने की क्षमता रखती हैं।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की अनुमानित संख्या 2025 में लगभग 3,000 से बढ़कर 2035 तक 16,000 हो सकती है।

    ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गैबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों (जिसमें "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" या इसी तरह के अभियानों का जिक्र) के बाद ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो गया था, और उसके बाद संवर्धन क्षमता बहाल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।

    गैबार्ड ने अपने तैयार बयान में कहा कि ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के परिणामस्वरूप ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह से नष्ट हो गया। तब से उनकी संवर्धन क्षमता को फिर से स्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।