'मुझे सच में कोई परवाह नहीं', ट्रंप का ईरान युद्ध दुनिया को किस ओर धकेल रहा?
ईरान युद्ध से पहले अमेरिका का रवैया अलग था, लेकिन अब उसने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे मिडिल ईस्ट में अफरा-तफरी मच गई। ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान युद्ध से पहले जियोपॉलिटिकल तौर पर अमेरिका का अपने साथियों के प्रति रवैया बिल्कुल अलग था लेकिन इस जंग के बाद उन्होंने अपने कई दोस्तों को बताए बिना ही इजरायल के साथ मिलकर हमला कर दिया।
अमेरिका और इजरायल के हमलों से मिडिल ईस्ट में अफरा-तफरी मच गई है। यूरोप और मिडिल ईस्ट की सरकारों को अचानक एक ऐसी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है जो उनकी नहीं थी और ज्यादातर देश इसे चाहते भी नहीं थे। बढ़ती लड़ाई वाले इलाके में फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया। बढ़ती तेल की कीमतों ने कमजोर इकॉनमी वाले देशों को और नुकसान पहुंचाया और कई देशों में हंगामा मच गया।
कई देशों की शांति भंग
गल्फ में अमेरिका के साथियों को ड्रोन और मिसाइल हमले का सामना करना पड़ा। रेगिस्तान के चमचमाते कांच के शहरों की शानदार शांति को तोड़ दिया और दुनिया भर में एविएशन का एक चौराहा बंद कर दिया। अब तो कुछ साथी देश बढ़ते आर्थिक खर्च, अपने नागरिकों की परेशानी और ईरान से माइग्रेशन के डर को लेकर परेशान हो रहे हैं। अमेरिका के साथी देशों को चिंता सता रही है कि अब आगे क्या होगा?
युद्ध अंत कैसा होगा?
ट्रंप प्रशासन के आलोचकों ने अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध की तुलना इराक के साथ खड़ी हुई मुश्किलों से की है। इसके बावजूद, यह अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल है कि इस युद्ध का अंत कैसा होगा?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले किसी मिलिट्री एक्शन से ज्यादा राजनीतिक लगते हैं। इन हमलों को ईरान की ताकत को कमजोर करने और अपने पड़ोसी देशों में उसकी धमक को कम करने के तौर पर देखा जा रहा है। इससे ट्रंप को एक ताकतवर नेता के तौर दिखाया जा सकता है और इजरायल को खतरे से बचाने के तौर पर पेश किया जा सकता है।
नई जियोपॉलिटिक्स
इस युद्ध ने वेस्ट और मिडिल ईस्ट के देशों के लिए नई जियोपॉलिटिक्स की परिभाषा लिख दी है। वो ट्रंप के साथ भी नहीं रह सकते और उनके बिना भी नहीं रह सकते। युद्ध का अंत अमेरिकी सहयोगियों के लिए भी एक बारूदी सुरंग जैसा होगा। वहीं, खाड़ी में अमेरिका के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा, लेकिन ईरान के व्यवहार पर भी इसका असर पड़ेगा। ईरान युद्ध के नतीजे गंभीर और लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वे दुनिया को बदलने की ओर इशारा कर रहे हैं।
ट्रंप के तरीके से दुनिया परेशान!
ट्रंप का खास तरीका है कि वे पहले से बने-बनाए ढांचों को तोड़ देते हैं, यह देखने से पहले कि टुकड़े कहां गिरेंगे और जीत का ऐलान करने का कोई तरीका ढूंढते हैं। मिडिल ईस्ट में यह तरीका लागू होने पर यह रणनीति बहुत ज्यादा रिस्की हो सकता है और साथियों के लिए इस युद्ध के अंजाम का अंदाजा लगाना नामुमकिन है।
ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में द अटलांटिक को बताया था कि अपने पहले टर्म में उन्हें दो काम करने थे- देश चलाना और जिंदा रहना। उन्होंने आगे कहा था, “और दूसरी बार मैं देश और दुनिया दोनों को चलाऊंगा।”
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