Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कौन है घिसलेन मैक्सवेल, एपस्टीन स्कैंडल की ‘मास्टरमाइंड’ या पर्दे के पीछे की असली कड़ी?

    Updated: Tue, 10 Mar 2026 08:53 PM (IST)

    आज कहानी उस औरत की है, जो हमेशा जेफरी एपस्टीन के साथ खड़ी दिखाई देती थी घिसलेन मैक्सवेल। कई लोग उसे सिर्फ उसकी साथी कहते रहे, लेकिन अदालत में पेश सबूत ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    लोलिता एक्सप्रेस से जेल तक: घिसलेन मैक्सवेल और एपस्टीन नेटवर्क का सच

    गुरप्रीत चीमा, नई दिल्ली। कहानी 1991 से शुरू होती है। अटलांटिक महासागर में एक यॉट 'लेडी घिसलेन'। उसी साल घिसलेन मैक्सवेल के पिता रॉबर्ट मैक्सवेल की रहस्यमयी मौत हो गई। परिवार की हालत हिल गई। घिसलेन ने लंदन छोड़ दिया और न्यूयॉर्क आ गई। उसके पास दौलत भले कम रह गई थी, लेकिन बड़े घरानों और रसूखदार लोगों तक पहुंच अब भी थी।

    न्यूयॉर्क में उसकी मुलाकात जेफरी एपस्टीन से हुई। एपस्टीन अमीर था, लेकिन उच्च समाज में जगह बनाने के लिए उसे एक भरोसेमंद चेहरा चाहिए था। घिसलेन के पास वही पहचान थी। दोनों का रिश्ता गहरा होता गया, निजी भी और काम का भी। वे साथ पार्टियों में दिखते, बड़े नामों से मिलते और धीरे-धीरे उनका दायरा बढ़ता गया।

    फिर आता है वह हिस्सा, जिसने इस कहानी को अपराध की दुनिया में बदल दिया। अदालत में गवाहियों के मुताबिक, नाबालिग लड़कियों को मसाज के काम का लालच दिया जाता था। उन्हें कहा जाता था 'बस थोड़ा काम है, अच्छे पैसे मिलेंगे।' कई पीड़िताओं ने बताया कि शुरुआत सामान्य लगी, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे एक जाल में फंस चुकी हैं।

     

    मारिया फार्मर ने सबसे पहले 1996 में दर्ज की शिकायत

    यूं तो पीड़िताओं की संख्या कम नहीं थी। अलग-अलग शहरों से आई कई महिलाओं ने सालों बाद हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती साझा की। इन्हीं में से एक नाम था मारिया फार्मर का। मारिया पेशे से कलाकार थीं और 1990 के दशक में उन्होंने आरोप लगाया कि उनका सामना जेफरी एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल से हुआ। मारिया वह पहली पीड़िता थीं, जिन्होंने 1996 में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन उस समय उनकी आवाज़ अनसुनी रह गई। सिस्टम की चुप्पी ने उनके भीतर गुस्सा, डर और बेबसी भर दी।

    यहीं से शुरू हुई उनकी कला की दूसरी कहानी। मारिया ने तय किया कि अगर उनकी बात फाइलों में दबा दी जाएगी, तो वह उसे रंगों में दर्ज करेंगी। उन्होंने कैनवस पर ताकतवर लोगों के प्रतीक, टूटी हुई आकृतियां और डार्क रंगों के जरिए अपना दर्द उकेरा। उनके लिए यह सिर्फ पेंटिंग नहीं थी, बल्कि सबूत की तरह एक बयान था एक ऐसी डायरी, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।

    WhatsApp Image 2026-03-05 at 7.30.38 PM

    वहीं अदालत में भी इस मामले में कई खुलासे हुए। अभियोजन पक्ष ने कहा कि एक 'चेन सिस्टम' बनाया गया था। एक लड़की से कहा जाता कि वह अपनी सहेलियों को भी लाए। भरोसे का फायदा उठाया जाता। इस तरह एक नेटवर्क खड़ा हुआ। जूरी ने 2021 में घिसलेन मैक्सवेल को नाबालिगों की यौन तस्करी में मदद करने का दोषी माना।

    लोलिता एक्सप्रैस की कहानी

    एपस्टीन का निजी जेट, जिसे मीडिया ने 'लोलिता एक्सप्रेस' कहा, यह भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। यह विमान न्यूयॉर्क, फ्लोरिडा और उसके निजी द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' के बीच उड़ता था। कुछ सर्वाइवर्स यानी पीड़िताओं ने अदालत में कहा कि इन यात्राओं के दौरान भी उनका शोषण हुआ।

    Epstein Maxwell (1)

    मीडिया रिपोर्ट्स और अदालत में पेश उड़ान रिकॉर्ड के मुताबिक, इस विमान में कई प्रभावशाली लोग सफर कर चुके थे। लॉगबुक में दर्ज नामों को लेकर लंबे समय तक बहस होती रही। हालांकि, किसी का नाम दर्ज होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता, लेकिन इन रिकॉर्ड्स ने जांच एजेंसियों और पत्रकारों का ध्यान खींचा।

    विमान के अंदर लग्जरी सुविधाएं थीं। जैसे; सोफे, निजी केबिन और सोने की जगह। कुछ पीड़िताओं ने अदालत में गवाही दी कि यात्राओं के दौरान भी उनका शोषण हुआ। अभियोजन पक्ष ने यह दलील दी कि यह जेट सिर्फ यात्रा का साधन नहीं था, बल्कि नेटवर्क का हिस्सा था, जहां से लोगों को अलग-अलग जगहों पर ले जाया जाता था।

    फ्लाइट लॉग्स में दर्ज यात्राएं अक्सर उस निजी द्वीप तक जाती थीं, जिसे मीडिया ने 'एपस्टीन आइलैंड' कहा। जांच में यह भी सामने आया कि विमान का इस्तेमाल अलग-अलग देशों के बीच लगातार आने-जाने के लिए होता था। यह जेट इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इससे जुड़े दस्तावेजों ने कई बड़े नामों को सार्वजनिक बहस के दायरे में ला दिया। लेकिन यह समझना जरूरी है कि अदालत में दोष सिद्ध वही हुआ जो सबूतों के आधार पर साबित किया गया।

    'लोलिता एक्सप्रेस' इस केस का सिंबल बन गया। एक ऐसा विमान, जो सिर्फ उड़ान नहीं भरता था, बल्कि अपने साथ कई सवाल भी लेकर चलता था।

    अमेरिका की इस पत्रकार ने खोले राज़

    2017 से 2018 के बीच अमेरिका की खोजी पत्रकार जूली के. ब्राउन, जो मियामी हेराल्ड में वरिष्ठ रिपोर्टर रहीं, उन्होंने इस केस की फाइलें दोबारा खंगालनी शुरू कीं। उन्होंने पुरानी अदालत की कार्यवाही पढ़ी, पीड़िताओं से संपर्क किया और उन लड़कियों की कहानी सुनी, जिनकी आवाज पहले कभी ठीक से सामने नहीं आई थी। उनकी रिसर्च रिपोर्ट की सीरीज़ 'परवर्ज़न ऑफ जस्टिस' ने दिखाया कि 2008 का समझौता कितनी गोपनीयता में हुआ था और कई पीड़िताओं को न्याय नहीं मिला था।

    Brown

    फोटो- सोशल मीडिया

    ब्राउन ने फ्लाइट्स रिकॉर्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों पर भी रिपोर्टिंग की। उनकी स्टोरी ने यह सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े नेटवर्क के बावजूद सजा इतनी हल्की कैसे मिली। जैसे ही यह सीरीज़ प्रकाशित हुई, पूरे अमेरिका में दबाव बढ़ा। मामला फिर से राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

    2019 में जेफरी एपस्टीन की मौत

    2019 में संघीय एजेंसियों ने दोबारा कार्रवाई की और एपस्टीन को फिर से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी सीधे तौर पर ब्राउन की रिपोर्टिंग के बाद बढ़े दबाव से जुड़ी मानी गई। उसी साल एपस्टीन की हिरासत में मौत हो गई, लेकिन जांच यहीं नहीं रुकी। 2020 में एफबीआई ने घिसलेन मैक्सवेल को गिरफ्तार किया। मुकदमा चला, गवाहियां हुईं, दस्तावेज़ पेश हुए। आखिरकार जूरी ने उसे दोषी ठहराया और 2022 में उसे 20 साल की सजा सुनाई गई।

    आज घिसलेन जेल में है। लेकिन इस केस से जुड़े सवाल अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। क्या पूरा सच सामने आ गया? क्या हर जिम्मेदार व्यक्ति तक कानून पहुंचा? या कुछ परतें अब भी खुलनी बाकी हैं?

    यह कहानी हमें याद दिलाती है कि अपराध हमेशा अंधेरे कोनों में नहीं होता। कभी-कभी वह रोशनी, रुतबे और रिश्तों के बीच भी छिपा होता है।

    यह भी पढ़ें: बिना डिग्री का Maths टीचर कैसे बना अरबपति? जेफरी एपस्टीन की रहस्यमयी दौलत की अंदर की कहानी