नासा का ऐतिहासिक रेस्क्यू मिशन: अपने पुराने टेलीस्कोप को गिरने से बचाने के लिए अंतरिक्ष में भेजेगा रोबोट
नासा अपने पुराने 'स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' टेलीस्कोप को धरती पर गिरने से बचाने के लिए एक रोबोटिक मिशन शुरू कर रहा है। 'लिफ्ट' नामक यह रोबोट टेलीस्कोप को प ...और पढ़ें

नासा।
HighLights
नासा 'स्विफ्ट' टेलीस्कोप को बचाने के लिए रोबोटिक मिशन शुरू कर रहा है।
'लिफ्ट' रोबोट टेलीस्कोप को पकड़कर सुरक्षित ऊंची कक्षा में पहुंचाएगा।
यह मिशन भविष्य में 'हबल' टेलीस्कोप को बचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। नासा अंतरिक्ष में एक बेहद अनोखा और ऐतिहासिक मिशन शुरू करने जा रहा है। अपने एक पुराने और कीमती स्पेस टेलीस्कोप को धरती पर गिरकर नष्ट होने से बचाने के लिए नासा एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट (अंतरिक्ष रोबोट) भेजने की तैयारी में है। अमेरिका के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी रोबोट के जरिए अंतरिक्ष में पहले से मौजूद सैटेलाइट को बचाने और उसकी जगह बदलने की कोशिश की जा रही है।
मिडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी हफ्ते करीब 250 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन लॉन्च हो सकता है। इसका मकसद नासा के 'स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' टेलीस्कोप को पकड़कर अंतरिक्ष में और ऊपर पहुंचाना है, ताकि वह ब्रह्मांड के शक्तिशाली विस्फोटों की स्टडी जारी रख सके।
समझिए कौन करेगा रेस्क्यू?
बता दें कि इस काम का ठेका अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी 'कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज' को मिला है। कंपनी ने 'लिफ्ट' नाम का एक अंतरिक्ष रोबोट बनाया है, जिसके तीन हाथ हैं। इसे मार्शल आइलैंड्स से पेगासस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा।
अब समझिए खतरे में क्यों है टेलीस्कोप?
सामने आई जानकारी के अनुसार, स्विफ्ट टेलीस्कोप साल 2004 से अंतरिक्ष में काम कर रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय में सूरज की तेज हरकतों के कारण यह तेजी से अपनी ऊंचाई खो रहा है। अभी यह धरती से 360 किलोमीटर ऊपर है, जिसे बढ़ाकर 600 किलोमीटर करना है। अगर यह 300 किलोमीटर से नीचे गिर गया, तो इसे बचाना नामुमकिन हो जाएगा।
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कैसे काम करेगा रोबोट?
अंतरिक्ष में 'लिफ्ट' रोबोट को टेलीस्कोप तक पहुंचने में करीब एक महीने का समय लगेगा। वहां पहुंचकर यह अपने तीन रोबोटिक हाथों और उंगलियों जैसे ग्रिपर्स से स्विफ्ट टेलीस्कोप को मजबूती से जकड़ लेगा। इसके बाद, अगले दो महीनों में यह धीरे-धीरे धक्का देकर टेलीस्कोप को सुरक्षित और ऊंची कक्षा में पहुंचा देगा। अहम बात यह है कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो सितंबर से यह टेलीस्कोप फिर से काम करना शुरू कर देगा।
मिशन इतना मुश्किल क्यों है?
गौरतलब है कि नासा के अधिकारियों का कहना है कि यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि जब स्विफ्ट टेलीस्कोप को बनाया गया था, तब उसे इस तरह से डिजाइन नहीं किया गया था कि अंतरिक्ष में कोई उसे छू सके या उसकी मरम्मत कर सके।
ऐसे में नासा के एस्ट्रोफिजिक्स डायरेक्टर शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने माना कि शुरुआत में किसी को भरोसा नहीं था कि यह संभव भी हो पाएगा। नासा ने फिलहाल समय बचाने के लिए फरवरी से ही इस टेलीस्कोप के वैज्ञानिक उपकरणों को बंद कर रखा है ताकि इसके गिरने की रफ्तार थोड़ी कम हो सके।
इस मिशन की सफलता क्यों जरूरी है?
नासा की साइंस मिशन चीफ निकी फॉक्स ने कहा कि अगर हमने इसे नहीं बचाया, तो हम एक बेहतरीन क्षमता खो देंगे, क्योंकि हमारे पास नया टेलीस्कोप बनाने का बजट नहीं है। गौर करने वाली बात यह है कि अब तक सिर्फ चीन ने 2022 में ऐसा कारनामा किया है। अमेरिका के लिए यह पहला मौका है।
इस बात को प्राथमिकता दिया जाए तो अगर यह मिशन कामयाब रहा, तो नासा अपने 36 साल पुराने मशहूर 'हबल स्पेस टेलीस्कोप' को बचाने के लिए भी इसी तकनीक का इस्तेमाल करेगा। हबल भी सूरज की हरकतों के कारण धीरे-धीरे नीचे गिर रहा है। कंपनी का मानना है कि 2028 तक वे हबल को बचाने के लिए और एडवांस रोबोट तैयार कर लेंगे।