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    तेल का बदलेगा खेल... OPEC+ के सात देश अगस्त से बढ़ाएंगे प्रोडक्शन; भारत को क्या फायदा?

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 10:00 PM (IST)

    ओपेक प्लस के सात सदस्य देशों ने अगस्त से तेल उत्पादन में 1.88 लाख बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपल ...और पढ़ें

    ओपेक प्लस ने अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया

    ओपेक प्लस ने अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया

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    डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस के सात सदस्य देशों ने अगले महीने से तेल उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इससे वैश्विक बाजार में अतिरिक्त कच्च तेल उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईंधन की कीमतें घटकर पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर आ गई हैं।

    ओपेक प्लस ने रविवार को घोषणा की कि सात देशों ने अगस्त में कुल 188,000 बैरल प्रति दिन तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह लगातार पांचवां महीना है, जब तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति बनी है। रविवार के इस निर्णय में भाग लेने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं।

    ओपेक प्लस का अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला 

    तेल उत्पादक देशों के संगठन ने एक बयान में कहा, 'देश बाजार की स्थितियों की निगरानी व आकलन करना जारी रखेंगे और बाजार की स्थिरता का समर्थन करने के अपने निरंतर प्रयासों में उन्होंने सतर्क दृष्टिकोण अपनाने के महत्व की पुष्टि की।' पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौता होने पर कच्चे तेल की कीमतें कम हो गई थीं।

    समझौता होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। हालांकि अभी तक युद्ध से पहले वाली स्थिति बहाल नहीं हो पाई है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी जलमार्ग से गुजरता है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल प्रति बैरल करीब 72 डालर है। गत मार्च में युद्ध के दौरान इसकी कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी।

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    भारत को क्या फायदा?

    OPEC+ की ओर से अगस्त से कच्चे तेल के उत्पादन में 1.88 लाख बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी करने का फैसला भारत के लिए भी एक बड़ी राहत और पॉजिटिव संकेत है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है।

    इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई बढ़ने और हाल ही में तेल की कीमतें गिरकर युद्ध-पूर्व स्तर पर आने से भारत भी तेल का आयात बढ़ा सकता है।