'अमेरिका की संप्रभुता के लिए खतरा', इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को क्यों खत्म करना चाहते हैं ट्रंप?
ट्रंप प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया है, इसे अमेरिकी संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। ...और पढ़ें
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HighLights
ट्रंप प्रशासन ने ICC के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया।
अमेरिका ने ICC को अपनी संप्रभुता पर बड़ा खतरा बताया।
ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध, वीजा रद्द करने की तैयारी।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। डोनल्ड ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह न्यायाधिकरण अमेरिकी अधिकारियों और सैन्य कर्मियों की जांच करने और उन पर मुकदमा चलाने के अधिकार का दावा करके अमेरिकी संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक रणनीति का अनावरण किया, जिसे विदेश विभाग ने संपूर्ण-सरकार प्रतिक्रिया के रूप में वर्णित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यवस्थित रूप से आईसीसी की काम करने की क्षमता को पंगु बनाना है, ताकि वह अमेरिकी सैनिकों या अधिकारियों को निशाना न बना सके और अमेरिकी संप्रभुता को चुनौती न दे सके।
अमेरिकी संप्रभुता का तर्क
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि आईसीसी अमेरिकी संप्रभुता के लिए एक असहनीय खतरा है। विभाग ने तर्क दिया कि यह अदालत अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों पर मुकदमा चलाने और यहां तक कि उन्हें जेल में डालने के अधिकार का दावा करती है, जबकि अमेरिका ने कभी भी रोम संविधि की पुष्टि नहीं की है। गौरतलब है कि रोम संविधि वही संधि है जिसके तहत आईसीसी की स्थापना की गई थी।
कड़े प्रतिबंधों की तैयारी
इस नए अभियान के तहत, वाशिंगटन अन्य देशों को आईसीसी से हटने के लिए मनाने के अपने राजनयिक प्रयासों को काफी तेज करेगा। इसके साथ ही, अमेरिकी सरकार आईसीसी अधिकारियों और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ वीजा रद करने, यात्रा प्रतिबंध लगाने और प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रही है।
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विदेश विभाग के अनुसार, मार्को रुबियो, वरिष्ठ राजनयिक और अमेरिकी राजदूत विदेशी सरकारों से संपर्क करेंगे और उनसे अमेरिकी नागरिकों पर आईसीसी के तथाकथित अधिकार क्षेत्र को खारिज करने का आग्रह करेंगे।
जिन देशों में अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं, जो अमेरिकी कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग करते हैं या जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा सहायता मिलती है, उनसे भी अमेरिकियों पर अदालत के अधिकार क्षेत्र को अस्वीकार करने का आह्वान किया जा रहा है। जो देश अमेरिकी सहायता पर निर्भर रहने के बावजूद आईसीसी का समर्थन जारी रखेंगे, उन्हें आने वाले समय में कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ सकता है।
ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों पर मार्को रुबियो का प्रहार
एक वीडियो संदेश में विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि प्रशासन का यह कदम अपने नागरिकों पर शासन करने और उन पर मुकदमा चलाने के देश के अधिकार की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले 250 वर्षों से अमेरिकियों ने एक स्वतंत्र और संप्रभु लोगों के रूप में खुद पर शासन किया है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी अपने नेताओं को खुद चुनते हैं, अपने कानून खुद तय करते हैं और जब किसी पर अपराध का आरोप लगता है, तो वे अपने ही देश के लोगों की जूरी के सामने न्याय के लिए खड़े होते हैं। रुबियो ने इसे अमेरिकी शासन प्रणाली की एक अनिवार्य और अटूट विशेषता बताया।
रुबियो ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आईसीसी अब गैर-निर्वाचित वैश्विकतावादी नौकरशाहों द्वारा संचालित एक वैश्विक न्यायाधिकरण में बदल गया है, जो यह दावा करते हैं कि उनकी शक्ति लगभग असीमित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अदालत अब अमेरिकी राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था के हर पहलू के लिए खतरा बन चुकी है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी जनता ने कभी इन बातों को स्वीकार नहीं किया है और न कभी करेगी; अगर आईसीसी को लगता है कि वे अमेरिकियों को उनकी संप्रभुता से वंचित कर सकते हैं, तो अमेरिका उन्हें अपने दृढ़ संकल्प का पूरा मतलब समझाएगा।
इतिहास का हवाला और आईसीसी को ध्वस्त करने का संकल्प
द वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक विचार लेख में रुबियो ने प्रशासन के इस रुख को और विस्तार से समझाया। उन्होंने लिखा कि आईसीसी नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के खिलाफ मुकदमा चलाने के अपने मूल जनादेश से बहुत आगे निकल चुकी है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों के लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल होगा कि अमेरिकी सैनिकों, पुलिस अधिकारियों, सीमा गश्ती एजेंटों और निर्वाचित नेताओं को किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत के सामने घसीटा जाए, लेकिन आईसीसी अब इसी शक्ति का दावा कर रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में भी अमेरिकी प्रशासनों ने अमेरिकियों पर इस अदालत के अधिकार क्षेत्र को हमेशा खारिज किया है। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने सीनेट की मंजूरी के लिए रोम संविधि को कभी पेश नहीं किया था, और बाद में अमेरिकी कांग्रेस ने अपने कर्मियों को आईसीसी के मुकदमों से बचाने के लिए अमेरिकन सर्विसमेंबर्स प्रोटेक्शन एक्ट पारित किया था।
रुबियो ने अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों द्वारा कथित युद्ध अपराधों की 2020 की आईसीसी जांच का विशेष रूप से जिक्र किया और इसे अमेरिकी स्वशासन पर हमले की शुरुआत बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अधिकार को स्वीकार कर लिया गया, तो यह अमेरिकी संप्रभुता को सरेंडर करने जैसा होगा और यह अदालत आगे चलकर बॉर्डर पेट्रोल एजेंटों और संघीय अभियोजकों को भी निशाना बना सकती है।
उन्होंने अंत में दृढ़ता से लिखा कि ट्रंप प्रशासन हमेशा इस खतरे से अपने सेवा सदस्यों की रक्षा करेगा और सरकार के पास मौजूद सभी उपकरणों का उपयोग करके, यदि आवश्यक हुआ तो आईसीसी को ईंट से ईंट बजाकर ध्वस्त कर देगा।