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    खार्ग द्वीप पर कब्जे की ट्रंप की धमकी: लोकेशन से लॉजिस्टिक्स तक कई बड़ी चुनौतियां

    Updated: Tue, 31 Mar 2026 10:09 PM (IST)

    डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जे की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय हलचल बढ़ा दी है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। विशेषज्ञों का ...और पढ़ें

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    खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र माना जाता है

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जा करने की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है।

    यह द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम है क्योंकि यहीं से देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का निर्यात होता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा।

    क्यों महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप?

    खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल और स्टोरेज सुविधाएं मौजूद हैं। अगर इस द्वीप पर हमला या कब्ज़ा होता है, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

    लोकेशन बनी सबसे बड़ी चुनौती

    यह द्वीप ईरान की मुख्य भूमि के काफी करीब है, जिससे वहां तक पहुंचना और लंबे समय तक नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। ईरान की नौसेना और मिसाइल सिस्टम इस इलाके में काफी मजबूत माने जाते हैं, जो किसी भी सैन्य अभियान को जोखिम भरा बना देते हैं।

    लॉजिस्टिक्स और सप्लाई की दिक्कतें

    विशेषज्ञों के अनुसार, खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के बाद वहां सैनिकों और संसाधनों की लगातार सप्लाई बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। फारस की खाड़ी में ईरान की मौजूदगी और संभावित जवाबी कार्रवाई के चलते अमेरिकी सेना के लिए ऑपरेशन को लंबे समय तक चलाना कठिन हो सकता है।

    ईरान की जवाबी कार्रवाई का खतरा

    अगर अमेरिका इस तरह की कोई कार्रवाई करता है, तो ईरान की ओर से मिसाइल हमले, ड्रोन स्ट्राइक और समुद्री मार्गों को बाधित करने जैसी जवाबी कार्रवाई हो सकती है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।

    वैश्विक असर की आशंका

    खार्ग द्वीप पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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