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    ईरान पर हमले की धमकी के बाद ट्रंप का यू-टर्न,  सऊदी अरब की मध्यस्थता से समझौते की उम्मीद

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 10:45 PM (IST)

    ईरान पर सैन्य हमले की धमकी देने के कुछ दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यू-टर्न लिया है और पश्चिम एशियाई सहयोगियों की मध्यस्थता से संभावित समझौते क ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमले की धमकी से यू-टर्न लिया।

    2. पश्चिम एशियाई मध्यस्थता से ईरान संग संभावित समझौता तैयार।

    3. सऊदी अरब की चिंता के बाद अमेरिका ने हमले टाले।

    जेएनएन, नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की चेतावनी देने के कुछ ही दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों की मध्यस्थता से ईरान के साथ संभावित समझौते की रूपरेखा तैयार हो गई है।

    उन्होंने कहा कि इसी वजह से अमेरिका ने फिलहाल प्रस्तावित हमलों को स्थगित कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, यदि तेहरान शीघ्र समझौते को अंतिम रूप देता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद का समाधान भी निकाला जाएगा।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी संघर्ष रोकने की प्रतिबद्धता जताई है, हालांकि इजरायली सरकार ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की है। वहीं, ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब करीब पांच महीने से जारी संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजरानी प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इसी कारण अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सऊदी अरब ने हमला नहीं करने के लिए मनाया

    रायटर के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को ट्रंप से फोन पर बातचीत में क्षेत्रीय ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर संभावित ईरानी जवाबी हमलों को लेकर चिंता जताई थी। माना जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने सैन्य कार्रवाई टालते हुए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी।

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    हालांकि, तेहरान ने ट्रंप के बयान के बावजूद सख्त रुख बनाए रखा है। आइएएनएस के अनुसार, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रेज़ा ने कहा कि उनका देश किसी भी अमेरिकी या इजरायली धमकी को हल्के में नहीं लेता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर चेतावनी को ईरान अपनी सैन्य तैयारी और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने का अवसर मानता है और जरूरत पड़ने पर पूरी ताकत से जवाब देगा।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत, सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। उन्होंने दोहराया कि यदि अमेरिका या इजरायल ने नया हमला किया तो ईरान अपनी रक्षा के लिए हर विकल्प अपनाएगा और उसके परिणामों की जिम्मेदारी वाशिंगटन पर होगी।

    सैन्य सलाहकारों ने ट्रंप को किया था आगाह

    उधर, अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी बड़े सैन्य अभियान को लेकर सतर्कता दिखाई गई है। पिछले सप्ताह अमेरिकी सैन्य सलाहकारों ने ट्रंप को आगाह किया था कि व्यापक हमले की स्थिति में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य वायु रक्षा प्रणालियों का सीमित होता भंडार अमेरिका के लिए चुनौती बन सकता है। इसके अलावा लंबे संघर्ष का आर्थिक और राजनीतिक असर भी बढ़ रहा है।

    एपी के अनुसार, मध्यस्थता प्रयासों में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने, इराक में ईरान समर्थित समूहों के हमले रोकने और इसके बदले ईरान पर कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है। अमेरिकी नाकेबंदी हटाने और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का भी प्रस्ताव ईरान को दिया गया है। हालांकि, अभी तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और बातचीत जारी है।