होर्मुज से लेकर वेटिकन तक... ट्रंप के पोस्ट से बढ़ा रोष, पोप लियो ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और वेटिकन के पोप लियो के बीच धर्म और राजनीति पर तीखी बयानबाजी शुरू ...और पढ़ें
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वेटिकन और व्हाइट हाउस आमने-सामने ट्रंप की पोस्ट पर पोप लियो की कड़ी प्रतिक्रिया (फाइल फोटो)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और वेटिकन के प्रमुख पोप लियो के बीच धर्म और राजनीति को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है।
ट्रंप प्रशासन जहां ईरान के खिलाफ अपनी नीति को आगे बढ़ा रहा है, वहीं वेटिकन ने इस पर अप्रत्यक्ष रूप से कड़ी आपत्ति जताई है। पोप लियो ने बिना नाम लिए कहा कि धर्म और भगवान के नाम का इस्तेमाल सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक फायदे के लिए करना गलत है।
यह बयान उस समय आया जब ट्रंप की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें उन्हें यीशु मसीह के साथ दिखाया गया था। इससे पहले भी एक तस्वीर में उन्हें 'उद्धारकर्ता' के रूप में दिखाया गया था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी मजाक और आलोचना हुई।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
ट्रंप ने अलग-अलग समय पर इन तस्वीरों को लेकर अलग-अलग बयान दिए। कभी उन्होंने कहा कि उन्होंने पोस्ट किया, फिर इससे इनकार किया और बाद में कहा कि अगर पोस्ट किया भी तो यह उन्हें 'डॉक्टर' के रूप में दिखाने के लिए था। इन बयानों पर लोगों ने भरोसा नहीं किया और सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई।
इंटरनेट पर इसको लेकर कई मीम्स बने, जिनमें ट्रंप को अलग-अलग रूपों में दिखाया गया। यहां तक कि ईरान से जुड़े कुछ लोगों ने भी इस ट्रेंड में हिस्सा लिया। वहीं वेटिकन ने सीधे इन तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने संदेश के जरिए शांति और जिम्मेदारी की बात कही। पोप लियो ने कहा कि शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है, खासकर सरकारों की।
धार्मिक बहस भी हुई तेज
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो हाल ही में कैथोलिक धर्म अपनाने वाले नेता हैं उन्होंने भी पोप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धर्म से जुड़े मुद्दों पर बोलते समय सावधानी जरूरी है और बातें सच्चाई पर आधारित होनी चाहिए।
इस बयान की आलोचना भी हुई, क्योंकि उस समय पोप लियो अल्जीरिया के अन्नाबा शहर में थे, जो सेंट ऑगस्टीन से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान है। सेंट ऑगस्टीन को ईसाई धर्म का बड़ा विचारक माना जाता है और 'जस्ट वॉर' सिद्धांत भी उनसे जुड़ा है।
चर्च के कई नेताओं का मानना है कि ईरान के खिलाफ चल रही कार्रवाई इस सिद्धांत पर खरी नहीं उतरती। पहले भी पोप जॉन पॉल द्वितीय कह चुके हैं कि युद्ध में हमेशा मानवता की हार होती है।
बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी
ट्रंप के समर्थकों ने पोप लियो की आलोचना करते हुए उन्हें 'वामपंथी सोच वाला' तक कहा और आरोप लगाया कि वेटिकन राजनीति में दखल दे रहा है। ट्रंप खुद भी पहले इस तरह की बातें कह चुके हैं। वहीं अमेरिका में ट्रंप प्रशासन अपने रुख पर कायम दिख रहा है और पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने व्हाइट हाउस और वेटिकन के बीच टकराव को और खुलकर सामने ला दिया है।
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