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    अमेरिका ने ईरान को तेल प्रतिबंधों में दी ढील, वेंस का दावा- परमाणु निरीक्षण पर राजी हुआ तेहरान

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 02:13 AM (IST)

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विस आल्प्स में ईरानी नेताओं से वार्ता के बाद दावा किया कि ईरान IAEA निरीक्षकों को देश में वापस आने देने पर सहमत हो ...और पढ़ें

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विस(फाइल फोटो)

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विस(फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विस आल्प्स में ईरानी नेताओं के साथ दो दिनों की वार्ता के बाद दावा किया हैं कि उन्होंने तेहरान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को देश में वापस आने की अनुमति देने के लिए राजी कर लिया है, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी का रास्ता फिर से खुल गया है।

    टीओआई के अनुसार, इसके तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देते हुए अगस्त तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री व परिवहन को अधिकृत करने वाली 60 दिन की छूट जारी कर दी। यह एक ऐसी रियायत है जो बातचीत को जारी रखने के लिए दी गई है।

    जमी हुई संपत्ति से अमेरिकी किसानों को होगा फायदा

    प्रारंभिक दौर की वार्ता के अंत में, वेंस ने इन आलोचनाओं को खारिज कर दिया कि ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के सामने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि अंततः ईरान की जमी हुई संपत्ति को मुक्त किया जाता है, तो उस धन का उपयोग अमेरिकी कृषि उत्पादों को खरीदने के लिए किया जाएगा।

    वेंस ने कहा, "अगर ईरानी संपत्ति कभी भी मुक्त होती है, तो यह अमेरिकी किसानों को अमीर बनाएगी और ईरानी लोगों का पेट भरने में मदद करेगी।" उन्होंने इस विचार का श्रेय ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को दिया।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरानियों के साथ उनकी प्रारंभिक बातचीत के बाद अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के युद्धविराम विंडो के दौरान तकनीकी स्तर की वार्ता होगी।

    ट्रंप प्रशासन को राजनीतिक राहत

    ट्रंप प्रशासन के नजरिए से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि वेंस ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले देश में बढ़ती राजनीतिक बेचैनी को शांत करने के लिए एक अत्यंत आवश्यक संघर्ष विराम हासिल कर लिया है, क्योंकि खुद उपराष्ट्रपति का अपना राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा है।

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    लेकिन आलोचकों के लिए, यह सब संदेहजनक रूप से उस पुरानी व्यवस्था को दोबारा खोजने जैसा लगा जो पहले से ही मौजूद थी। विशेषज्ञों ने बताया कि IAEA का निरीक्षण ओबामा-युग के परमाणु समझौते (JCPOA) का ही हिस्सा था, जिसे 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप ने रद कर दिया था।

    एक विश्लेषक ने तंज कसते हुए कहा, "अगले हफ्ते ट्रंप घोषणा करेंगे कि उन्होंने पहिये का आविष्कार किया है, एक ऐसा गोल पहिया जैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा।" यह व्यंग्य स्विट्जरलैंड वार्ता को लेकर वाशिंगटन में व्याप्त व्यापक संदेह को दर्शाता है, जहां सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों के अनुसार माहौल बिल्कुल भी गर्मजोशी भरा नहीं था।

    तनावपूर्ण माहौल में कूटनीतिक ड्रामा

    दोनों पक्षों की बॉडी लैंग्वेज ने ही कूटनीतिक विशेषज्ञों को कई दिनों तक चर्चा करने के लिए पर्याप्त सामग्री प्रदान कर दी। वेंस ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उस बैठक कक्ष में किया, जो पहले से पाकिस्तानी और कतरी वार्ताकारों से भरा हुआ था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बाद में पहुंचे, संक्षेप में पाकिस्तानी अधिकारियों से बात की और चले गए।

    ऐसी खबरें हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के भड़काऊ बयानों और लेबनान में लगातार इजरायली हमलों के कारण उन्होंने अमेरिकियों के साथ संयुक्त रूप से फोटो खिंचवाने से भी इनकार कर दिया। नजरअंदाज किए गए हैंडशेक, वॉकआउट की धमकियां और स्पष्ट रूप से ठंडी बातचीत ने किसी बड़े सुलह का संकेत तो बिल्कुल नहीं दिया।

    ट्रंप की धमकियां के बाद वेंस की मध्यस्थता

    लगभग 80 मिनट की चर्चा के बाद, लेबनान के संबंध में ट्रंप की नवीनतम सोशल मीडिया धमकियों के विरोध में ईरानी वार्ताकारों ने कथित तौर पर वार्ता को निलंबित कर दिया। हालांकि, बाद में वे मेज पर लौट आए जब वेंस ने कथित तौर पर उन्हें समझाया कि ट्रंप की टिप्पणी ईरान के उकसावे वाले कदमों के जवाब में थी।

    चर्चा के अंत में, वाशिंगटन में भारी संदेह के बावजूद वेंस ठोस प्रगति का दावा करने में सक्षम रहे, जहां कई आलोचक मिशन के विफल होने का इंतजार करते हुए अपने चाकू तेज कर रहे हैं।

    जबकि ट्रंप और वेंस के समर्थकों ने ईरानी धन का उपयोग अमेरिकी गेहूं, मक्का और सोयाबीन खरीदने में एक शानदार समाधान के रूप में देखा, नीति विशेषज्ञ इससे बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुए, जिससे वाशिंगटन की यह चिंता दूर होगी कि पैसा सैन्य हथियारों में न जाए।

    उन्होंने 7 अक्टूबर के हमलों के बाद खुद वेंस की चेतावनियों को याद दिलाया, जब उन्होंने तर्क दिया था कि धन परिवर्तनीय है और एक क्षेत्र में तेहरान को मिलने वाली वित्तीय राहत अप्रत्यक्ष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मजबूत कर सकती है।


    प्रतिबंधों में छूट इजरायल के लिए बड़ा झटका

    इस स्पष्ट बदलाव ने कुछ रूढ़िवादियों को बयानबाजी के जाल में फंसा दिया है। विवाद को और बढ़ाते हुए, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को उल्लेखनीय गति से काम करते हुए वाशिंगटन की गंभीरता प्रदर्शित की, और अगस्त तक ईरानी तेल की बिक्री को अधिकृत करते हुए 60 दिन की व्यापक प्रतिबंध छूट जारी कर दी। यह छूट बैंकिंग, बीमा, परिवहन और वाणिज्यिक गतिविधियों को कवर करती है और हाल के वर्षों में ईरान के प्रति सबसे बड़ी रियायतों में से एक है।

    वाशिंगटन में इजरायल और उसके कई समर्थकों के लिए, यह घोषणा एक बंकर-बस्टर बम की तरह लगी। अमेरिका में इज़रायल समर्थक धड़ा अभी भी नए 'ट्रंप-वेंस फॉर्मूले' से उबर नहीं पा रहा है, जिसमें कहा गया है कि क्षेत्र के हर देश की अपनी वैध सुरक्षा चिंताएं हैं और उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है; और साथ ही भविष्य के निपटान ढांचे के तहत ईरान को भी पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बनाए रखने का अधिकार है।

    पाकिस्तान और कतर की अहम भूमिका

    व्यापक तस्वीर यह है कि वेंस ने उन वार्ताओं को किसी तरह सफल बनाने का प्रयास किया है जो MAGA बॉस डोनल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पर की गई बयानबाजी के बोझ तले बार-बार टूटने के कगार पर थीं। पूरी बातचीत के दौरान, ट्रंप ईरान पर निशाना साधते रहे और आगे तबाही की धमकी देते रहे, जिससे ईरानी प्रतिनिधि गुस्से में आ गए। वेंस के अनुसार, एक समय तो ईरानी लगभग मीटिंग छोड़कर चले ही गए थे, लेकिन वह स्थिति को संभालने में सफल रहे।

    पर्दे के पीछे, पाकिस्तान और कतर दो अप्रत्याशित कूटनीतिक सहयोगियों ने इस पूरी प्रक्रिया को लाइफ सपोर्ट पर रखने में मदद की। इन दोनों देशों ने मध्यस्थ के रूप में अहम काम किया, भले ही अमेरिका के भीतर इन दोनों ही देशों के कई आलोचक मौजूद हैं।