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    'रूस का तेल प्रोसेस कर बेच रहा भारत', डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी ने फिर उगला जहर

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 10:05 PM (IST)

    व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को क्रेमलिन का मददगार बताते हुए उस पर रूसी तेल के धन शोधन केंद्र होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत रूसी हथियार खरीद रहा है और अमेरिकी कंपनियों से सैन्य प्रौद्योगिकियों की मांग कर रहा है जो कि रणनीतिक मुफ्तखोरी है।

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    पीटर नवारो ने भारत को क्रेमलिन का मददगार बताया (फोटो: रॉयटर्स)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेन संघर्ष को मोदी का युद्ध कहने के एक दिन बाद व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को क्रेमलिन का मददगार बताया। उन्होंने भारत पर क्रेमलिन के लिए तेल धन शोधन केन्द्र होने का आरोप लगाया।

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    उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली रूसी हथियार खरीदना जारी रखे हुए है, जबकि अमेरिकी कंपनियों से संवेदनशील सैन्य प्रौद्योगिकियों को हस्तांतरित करने और भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की मांग कर रही है। यह रणनीतिक मुफ्तखोरी है।

    भारत पर लगातार साध रहे निशाना

    नवारो के बयान पर नई दिल्ली की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अगर भारत चाहता है कि उसके साथ रणनीतिक साझेदार जैसा व्यवहार किया जाए, तो उसे वैसा ही व्यवहार करना होगा। नवारो पिछले कुछ दिनों से लगातार भारत पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने दावा किया, 'भारत की बड़ी तेल लाबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लान्ड्रोमैट में बदल दिया है।'

    भारतीय रिफाइनर सस्ता रूसी तेल खरीदते हैं, उसे प्रोसेस करते हैं और यूरोप, अफ्रीका और एशिया को ईंधन निर्यात करते हैं। उन्होंने दावा किया, 'भारत प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम का निर्यात करता है, जो उसके द्वारा आयातित रूसी कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी ज्यादा है। भारत हमारे डॉलर का इस्तेमाल रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए करता है। भारतीय रिफाइनरियां अपने रूसी साझेदारों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में मोटा मुनाफा कमाने के लिए तेल बेचती हैं, जबकि रूस यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध के लिए इस मुद्रा का इस्तेमाल करता है।'

    उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले रूसी तेल भारत के आयात का एक प्रतिशत से भी कम था और आज यह 30 प्रतिशत से ज्यादा है यानी 15 लाख बैरल प्रतिदिन से भी अधिक। उन्होंने आरोप लगाया, 'यह उछाल घरेलू मांग से प्रेरित नहीं है। इसके लिए यूक्रेन में खून-खराबे और तबाही की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है।'

    (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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