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    चिनफिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट पर मंडराया खतरा, चीनी वैज्ञानिकों का दावा- ब्रह्मपुत्र पर बांध से कभी भी आ सकती है तबाही

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 04:09 PM (IST)

    चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बना रहा है, जिस पर उसके अपने भूवैज्ञानिकों ने सक्रिय फॉल्ट लाइन पर होने के क ...और पढ़ें

    चीन के सबसे बड़े बांध पर भूवैज्ञानिकों की चेतावनी (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

    चीन के सबसे बड़े बांध पर भूवैज्ञानिकों की चेतावनी (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)

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    डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बनाने की होड़ में लगा हुआ है। चिनफिंग के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर उनके अपने ही भूवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह विशाल बांध एक सक्रिय फॉल्ट लाइन के ऊपर स्थित है और इससे भूस्खलन और भूकंप का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

    चीनी भूवैज्ञानिकों के इस निष्कर्ष ने भारत के लिए इसके व्यापक प्रभावों को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, जहां यह नदी ब्रह्मपुत्र के रूप में बहती है और बांग्लादेश में प्रवेश करने से पहले लाखों लोगों का जीवनयापन करती है।

    चीन की सरकारी पत्रिका 'सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' में प्रकाशित एक नए शोध पत्र के अनुसार, पैझेन फॉल्ट सीधे उस क्षेत्र से होकर गुजरता है जहां जलविद्युत परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।

    चेंगदू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और चीन भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह फॉल्ट लाइन बांध, सड़कों और पुलों जैसी बुनियादी संरचनाओं की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।

    राजनीतिक तनाव

    बता दें कि चीनी वैज्ञानिकों की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब बीजिंग की विशाल बांध परियोजना पहले ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन चुकी है।

    भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की गतिविधियों को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त की है, जिसमें जल सुरक्षा, पारिस्थितिकी और निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए संभावित खतरों का हवाला दिया गया है।

    क्यों है लैंडस्लाइड का खतरा?

    रिसर्च के अनुसार, इस क्षेत्र की चट्टानें अत्यधिक कमजोर हैं और यहां की ढीली मिट्टी के कारण बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड की आशंका बनी रहती है। यह बांध थ्री गोरजेस बांध की तुलना में तीन गुना अधिक बिजली उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी नींव की भार वहन क्षमता फॉल्ट गतिविधि के कारण असुरक्षित है। इससे कभी भी तबाही मच सकती है।

    यह फॉल्ट लाइन बांध हिमालय की उन सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के बीच स्थित है जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का टकराव होता रहता है, जिससे भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। चीनी वैज्ञानिकों ने 2017 में मिलिन में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप का हवाला देते हुए इसे वास्तविक आपदा जोखिम बताया है।

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    भारत पर क्या होगा असर

    गौरतलब है ब्रम्हपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कृषि, मत्स्य पालन और आजीविका का मुख्य आधार है। यदि इसके धारा में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव होता है और उसमें बदलाव होता है तो इसका असर अरुणाचल प्रदेश से लेकर असम और बांग्लादेश तक करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ेगा।

    हालांकि, इसको लेकर चीन का दावा है कि परियोजना का उद्देश्य केवल जलविद्युत उत्पादन है, लेकिन अपने ही वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकार की गई यह भूवैज्ञानिक चेतावनी भारत की उन चिंताओं को सही साबित करता है जो वह पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश में निचले इलाकों की पारिस्थितिकी, जल सुरक्षा और लाखों लोगों के जीवन पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को लेकर बार-बार उठाता रहा है।

    भारत पर पड़ सकता है बड़ा असर

    बताते चले कि यारलुंग त्सांगपो नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी के नाम से जानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के इतने बड़े बांध से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह में बदलाव आ सकता है, जिससे अरुणाचल प्रदेश और असम में कृषि, पर्यावरण और जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। वहीं, अचानक पानी छोड़े जाने की स्थिति में विनाशकारी बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।