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    परमाणु मिसाइल साइलो के पास विशाल सैन्य परिसर बना रहा चीन, रेगिस्तान में बना रहे बेस; सेटेलाइट तस्वीरों में खुलासा

    Updated: Sun, 31 May 2026 06:57 AM (IST)

    चीन अपने सुदूर रेगिस्तानी इलाके में परमाणु मिसाइल साइलो के पास विशाल सैन्य परिसर बना रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि बीजिंग अपने परमाणु मिस ...और पढ़ें

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    परमाणु मिसाइल साइलो के पास विशाल सैन्य परिसर बना रहा चीन (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. उपग्रहों से प्राप्त हालिया तस्वीरों में दिखे तस्वीरों में 80 से अधिक लांच पैड

    2. मोबाइल मिसाइल लांचर, एयर डिफेंस सिस्टम के लिए हो सकता है इस्तेमाल

    रॉयटर, वाशिंगटन। चीन अपने सुदूर रेगिस्तानी इलाके में परमाणु मिसाइल साइलो के पास विशाल सैन्य परिसर बना रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि बीजिंग अपने परमाणु मिसाइल साइलो के पास विस्तृत नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिसमें लांच पैड, बंकर और संचार केंद्र शामिल हैं।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चीन के परमाणु जखीरे पर अमेरिका के किसी भी हमले को बेअसर किया जा सके। इसके साथ ही जवाबी कार्रवाई की चीन की क्षमता भी सुरक्षित रहे।

    चीन की परमाणु मिसाइलें पहले से ही अमेरिका के किसी भी शहर तक पहुंच सकती हैं। "परमाणु साइलो" में चीनी सेना की सबसे लंबी दूरी की मिसाइलें रखी जाती हैं।

    चीन के रेगिस्तानी क्षेत्रों में बनाया है बेस

    परमाणु साइलो को छिपाने, सुरक्षित रखने और सीधे जमीन के नीचे से दागने के लिए बनाई जाती है। यह अत्यंत मजबूत कंक्रीट और स्टील से बनी होती है। चीन के रेगिस्तानी क्षेत्रों में बनाया जा रहा सैन्य परिसर अमेरिका और बीजिंग के बीच बढ़ती परमाणु प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। खासकर ताइवान की संप्रभुता जैसे मुद्दों पर तनाव बढ़ने के साथ यह और अहम है।

    तस्वीरों में 80 से अधिक लांच पैड दिखे हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल मिसाइल लांचर और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा संभावित इलेक्ट्रानिक वारफेयर, सेटेलाइट कम्युनिकेशन और कमांड आपरेशन से जुड़े केंद्र भी नजर आए हैं।

    परमाणु हथियारों का पहले उपयोग नहीं करने की चीन की नीति

    परमाणु हथियारों का पहले उपयोग नहीं करने की चीन की नीति है। इसका अर्थ है कि उसकी सेना परमाणु युद्ध की शुरुआत नहीं करेगी, लेकिन कुछ वरिष्ठ पश्चिमी राजनयिकों का कहना है कि ताइवान को लेकर किसी भी संघर्ष में बाहरी हस्तक्षेप को सीमित करने के लिए चीन संभवतः परमाणु दबाव का सहारा ले सकता है।

    खबरें और भी

    चीन के रक्षा मंत्रालय ने अपने परमाणु कार्यक्रम और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में सामने आए घटनाक्रमों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। पेंटागन ने कहा कि वह खुफिया मामलों पर टिप्पणी नहीं करेगा।

    पूर्वी शिनजियांग में पिछले छह वर्षों में दो सैन्य प्रतिष्ठान बनाए गए

    पूर्वी शिनजियांग में पिछले छह वर्षों में दो सैन्य प्रतिष्ठान बनाए गए हैं। ये परमाणु साइलो क्षेत्र से क्रमशः लगभग 140 और 230 किलोमीटर दूर स्थित हैं। इन परिसरों में सैन्य कर्मियों और बड़े सैन्य वाहनों के लिए सुविधाएं मौजूद हैं।

    इनके आसपास बख्तरबंद बंकर, हथियार भंडारण क्षेत्र, हवाई पट्टियां और रेल संपर्क भी दिखाई देते हैं। तस्वीरों से पता चलता है कि इस महीने और अप्रैल के दौरान बड़े सैन्य वाहनों से जुड़े अभ्यास हुए।

    रेगिस्तान में बनाए गए गुप्त प्रक्षेपण स्थल

    हाल की तस्वीरों में बड़े-बड़े तंबू , रेगिस्तान में बनाए गए गुप्त प्रक्षेपण स्थल भी दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से कुछ में वायु रक्षा मिसाइल बैटरियां लगी हुई हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन पैड पर कौन-से हथियार तैनात किए जाएंगे या ऑक्टागन परिसरों में वास्तव में क्या गतिविधियां होती हैं।

    इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को एशियाई सहयोगियों से चीन की बढ़ती शक्ति का मुकाबला करने और क्षेत्र में उसके प्रभुत्व को रोकने के लिए सैन्य खर्च बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने चीन द्वारा तेजी से सैन्य अवसंरचना के निर्माण पर चिंता जताई।