'ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे बांध का भारत पर नहीं होगा असर', चीनी राजदूत बोले- सिर्फ बिजली पैदा करने पर फोकस
चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध निर्माण का बचाव करते हुए कहा कि इससे भारत और बांग्लादेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री ली कियांग ने अरुणाचल प्रदेश के नजदीक न्यिंगची शहर में बांध निर्माण की शुरुआत की घोषणा की। इस परियोजना से हर साल 300 बिलियन किलोवाट घंटे से ज्यादा बिजली पैदा होने की उम्मीद है।

पीटीआई, बीजिंग। चीन ने बुधवार को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध निर्माण कार्य शुरू करने का बचाव किया है। साथ ही कहा है कि भारत और बांग्लादेश पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध के निर्माण पर कड़ी नजर रखे हुए है।
चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नजदीक स्थित न्यिंगची शहर में ब्रह्मपुत्र नदी के निचले हिस्से में बांध के निर्माण की शुरुआत की घोषणा की, जिसे स्थानीय रूप से यारलुंग जांगबो के नाम से जाना जाता है।
300 बिलियन किलोवाट घंटे से ज्यादा बनेगी बिजली
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बांध को लेकर भारत और बांग्लादेश की चिंताओं पर कहा कि इस परियोजना का निचले इलाकों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस बांध से हर साल 300 बिलियन किलोवाट घंटे से ज्यादा बिजली पैदा होने की उम्मीद है, जो 30 करोड़ से ज्यादा लोगों की वार्षिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
गुओ ने कहा कि चीन ने इस परियोजना पर दोनों देशों के साथ आवश्यक संवाद किया है। चीन ने 2015 में तिब्बत में सबसे बड़े 1.5 अरब डॉलर के जम हाइड्रोपावर स्टेशन को पहले ही चालू कर दिया है, जिससे भारत में चिंताएं पैदा हो गई हैं।
वहीं, बांग्लादेश में चीनी दूत याओ वेन ने आश्वासन दिया है कि उनका बांध केवल बिजली उत्पादन के लिए है और इससे निचले देशों में जल प्रवाह प्रभावित नहीं होगा। एक मीडिया रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, 'चीन इस परियोजना से न तो पानी निकालेगा और न ही इसका उपयोग करेगा।'
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