चीन ने बनाया 582 टन वजन का दुनिया का सबसे बड़ा चुंबक, कृत्रिम सूर्य बनाने की तैयारी
चीन ने न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिये 582 टन वजन का दुनिया के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन चुंबक बना लिया है और उसका परीक्षण भी कर लिया है। ...और पढ़ें

चीन ने बनाया 582 टन वजन का दुनिया का सबसे बड़ा चुंबक
HighLights
21 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा है अंग्रेजी के 'डी' अक्षर के आकार का यह चुंबक
हाई-टेंपरेचर सुपरकंडक्टिंग सेंट्रल सोलेनाइड काइल का भी किया परीक्षण
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। चीन ने न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिये 582 टन वजन का दुनिया के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन चुंबक बना लिया है और उसका परीक्षण भी कर लिया है।
यह उपलब्धि साल 2030 तक फ्यूजन पावर या संलयन की शक्ति से बिजली पैदा करने की चीन की महत्वाकांक्षी योजना में एक अहम पड़ाव है। इसके साथ ही बीजिंग कृत्रिम सूर्य बनाने के और करीब पहुंच गया है, हालांकि अभी भी कई बड़ी तकनीकी बाधाएं मौजूद हैं।
इस चुंबक को इंस्टीट्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स ने विकसित किया है। अंग्रेजी के डी अक्षर के आकार का यह चुंबक 21 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा है। इसका वजन 582 टन है।
शोधकर्ताओं ने एक हाई-टेंपरेचर सुपरकंडक्टिंग सेंट्रल सोलेनाइड काइल का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिसे अक्सर फ़्यूज़न रिएक्टर का 'दिल' कहा जाता है। कार के इंजन में लगे स्पार्क प्लग की तरह ही, यह फ़्यूज़न रिएक्शन के लिए ज़रूरी प्लाज़्मा को बनाए रखने में मदद करता है।
न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर होगा कृत्रिम सूर्य
नकली या कृत्रिय सूर्य न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर होगा। इसमें उसी तरह ऊर्जा पैदा होगी जैसे सूर्य में विशाल ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर हाइड्रोजन परमाणुओं का संलयन करेगा।
इस प्रक्रिया में कार्बन डाइआक्साइड बने बिना भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। विज्ञानियों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक असीमित ऊर्जा का स्रोत साबित होगी। चुंबक का काम बहुत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाना है, जो प्लाज्मा—यानी लगभग 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक गर्म गैस—को रिएक्टर के अंदर ही रोककर रखे।