China-Philippines Relations: चीन की 'दादागीरी', सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट से की फिलीपींस के जहाज को रोकने की कोशिश
China-Philippines Relationsफिलीपींस ने चीन पर विवादित चीन सागर में तैनात अपने सैन्य दल के लिए खाना और रसद पहुंचाने जा रहे जहाज का रास्ता रोकने का आरोप लगाया है। फिलीपींस ने कहा कि सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट से उनके जहाज को रोकने की कोशिश की गई है।

मनीला, एजेंसी। चीन की दादागीरी का मामला सामने आया है। चीन ने सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट का इस्तेमाल कर फिलीपींस के जहाज को रोकने की कोशिश की है। फिलीपींस ने सोमवार चीनी तट रक्षकों पर आरोप लगाया है कि वे विवादित चीन सागर में उनके द्वारा एक एटॉल (प्रवालद्वीप) पर तैनात दल के लिए चलाए जा रहे सप्लाई मिशन के जहाज को रोकने की कोशिश की गई। इसके लिए उन्होंने सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट का भी इस्तेमाल किया है।
सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट का किया इस्तेमाल
फिलीपींस के तट रक्षकों ने एक बयान में कहा कि यह घटना 6 फरवरी को सेकेंड थॉमर शोल में हुई, जब चीनी तट रक्षकों के जहाज ने फिलीपींस के जहाज को रोकने के लिए सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट का इस्तेमाल किया। इससे जहाज पर सवार चालक दल के सदस्यों को कुछ देर के लिए दिखना बंद हो गया था। बता दें कि ये जहाज सैन्य दल के लिए खाना और रसद पहुंचाने जा रहा था। फिलीपींस ने कहा कि हमारे जहाज को जानबूझकर रोका जाना, वेस्ट फिलीपींस सागर में उनके अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
चीन ने नहीं की कोई टिप्पणी
मनीला में स्थित चीनी दूतावास ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन जनवरी में राष्ट्रपति फर्दीनांद मार्कोस की चीन यात्रा के दौरान चीन ने कहा था कि वह फिलीपींस के साथ मित्रता के जरिए समुद्रीय मामलों को निपटाने के लिए तैयार है।
1999 में तैनात की गई थी सेना
बता दें कि सेकेंड थॉमस शोल को आयूंगीन के नाम से जाना जाता है। ये फिलीपींस के पलावन प्रांत से 105 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। यहां एक पुराने जहाज पर फिलीपींस सेना का एक दल तैनात है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय के इस जहाज की तैनाती 1999 में द्वीवसमूह पर मनीला के प्रभुत्व को साबित करने के लिए की गई थी।
जापान से संबध मजबूत कर रहा फिलीपींस
चीन द्वारा रीसप्लाई को बाधित करने की यह घटना तब सामने आई है, जब मार्कोस ने समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से जापान के साथ विजिटिंग फोर्स एग्रीमेंट के प्रति सकारात्मक रुझान दिखाया है। तट रक्षकों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि अगस्त में भी चीनी तट रक्षक जहाज पर सवार सैन्य दल ने फिलीपींस तट रक्षक जहाज का रास्ता रोका था। यह जहाज नेवी रीसप्लाई नौकाओं का सुरक्षा प्रदान कर रहा था।
अमेरिकी सेना को भी दे चुका है अनुमति
मार्कोस पिछले हफ्ते जापान के साथ सुरक्षा संबंधों का मजबूत करने के उद्देश्य से पांच दिन के लिए टोक्यो की यात्रा पर थे। इलाके में चीन की आक्रामक कार्रवाई को देखते हुए इसकी घोषणा दिसंबर में की गई थी। इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य सहयोग की तरह देखा जा रहा है। पद संभालने के बाद राष्ट्रपति का यह पहला जापान दौरा है। इससे पहले हाल ही में विजिटिंग फोर्स एग्रीमेंट के तहत अमेरिका को अतिरिक्त सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति भी प्रदान की गई है। चीन का मानना है कि इस कदम से क्षेत्र की अस्थिरता उत्पन्न होगी और तनाव बढ़ेगा।
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