ईरान युद्ध में झलकी अमेरिकी सैन्य क्षमता पर चीन ने उठाए सवाल, हथियार भंडार को लेकर कही ये बात
चीनी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि लंबे संघर्ष ने अमेरिकी हथियार भंडार को कमजोर कर दिया है, जिससे ताइवान की रक्षा करने की उसकी क्षमता पर भी असर पड़ स ...और पढ़ें

ईरान युद्ध में झलकी अमेरिकी सैन्य क्षमता पर चीन ने उठाए सवाल (फोटो- रॉयटर)
न्यूयार्क टाइम्स, बीजिंग। ईरान युद्ध में अमेरिकी हथियारों और मिसाइलों के तेजी से इस्तेमाल ने चीन को अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाने का नया मौका दे दिया है।
चीनी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि लंबे संघर्ष ने अमेरिकी हथियार भंडार को कमजोर कर दिया है, जिससे ताइवान की रक्षा करने की उसकी क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
यह स्थिति अगले सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले अमेरिकी दबाव की ताकत को कमजोर कर सकती है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के आंतरिक आकलनों के मुताबिक फरवरी के अंत से शुरू हुए युद्ध में अमेरिका अपने लंबी दूरी के स्टेल्थ क्रूज मिसाइलों का लगभग आधा भंडार खर्च कर चुका है।
इसके अलावा अमेरिका एक साल में जितनी टॉमहॉक मिसाइलें खरीदता है, उससे करीब 10 गुना अधिक इस युद्ध में दाग चुका है।
चीनी विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिकी वैश्विक सैन्य वर्चस्व की सीमाएं उजागर हुई हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सेवानिवृत्त कर्नल यूए गांग ने कहा कि अमेरिका लगातार युद्ध की स्थिति में अपने हथियारों की भरपाई तेजी से नहीं कर पा रहा, जिससे उसकी युद्ध क्षमता कमजोर दिख रही है।
चीनी राष्ट्रवादी हलकों में यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि अमेरिका ईरान जैसे क्षेत्रीय शक्ति वाले देश के खिलाफ त्वरित जीत हासिल नहीं कर सका, तो वह चीन के खिलाफ और कठिन स्थिति में होगा। इससे ताइवान को लेकर चीन का आत्मविश्वास बढ़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप पहले शी चिनफिंग से मुलाकात में तेज जीत की छवि के साथ दबाव बनाना चाहते थे, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने से उनकी स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि दोनों देश फिलहाल रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अपना समर्थन कम करे, जबकि ट्रंप प्रशासन व्यापार घाटा कम करने और चीन द्वारा ईरानी तेल खरीद पर दबाव डालने की कोशिश करेगा।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने टिप्पणी की कि यदि अमेरिकी सेना दुनिया भर में हथियार तैनात करने में कठिनाई महसूस करती है, तो वह “लंगड़े दानव'' जैसी बन सकती है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।