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    भूकंप प्रभावित क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र पर बांध बना रहा चीन, अरुणाचल प्रदेश के निकट हैं परियोजना

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 03:34 AM (IST)

    चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर एक विशाल बांध बना रहा है जो भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में है। चीनी भूगर्भशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि भूकंप आने पर तिब्ब ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. चीन ब्रह्मपुत्र पर भूकंप-प्रवण क्षेत्र में बांध बना रहा है।

    2. भूगर्भशास्त्रियों ने अरुणाचल प्रदेश पर गंभीर प्रभाव की आशंका जताई।

    3. भारत के विरोध के बावजूद चीन ने नदी का बहाव बदला।

    पीटीआई, बीजिंग। भारत की सीमा के नजदीक ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहा चीन का विशाल बांध भूकंप के खतरे वाले क्षेत्र में है। अगर वहां पर भूकंप आया तो न केवल नजदीक का तिब्बती इलाका बल्कि अरुणाचल प्रदेश समेत कई भारतीय इलाके गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। यह आशंका चीन के ही भूगर्भ विज्ञानियों ने जताई है।

    चीन तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना पर कार्य कर रहा है। इसके लिए ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल बांध बन रहा है। तिब्बत के जिस इलाके में यह बांध बन रहा है वह भारतीय सीमा और अरुणाचल प्रदेश से ज्यादा दूरी पर नहीं है।

    लेकिन जिस भूमि पर बांध बन रहा है उसके नीचे के भूगर्भ में चट्टानों की अक्सर टूट-फूट होती रहती है और बड़ी हलचल का भी खतरा है।

    धरती के भीतर चट्टानों की बड़ी हलचल के परिणामस्वरूप ही भूकंप आते हैं। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट के मुताबिक भूगर्भ विज्ञान के शोधार्थियों ने पाया है कि क्षेत्र में धरती के भीतर प्लेस्टोसीन काल से गड़बड़ चल रही है।

    यह स्थिति प्राचीन काल से है जब क्षेत्र में हमेशा बर्फ जमी रहती थी। यह तथ्य चीन सरकार की जानकारी में है क्योंकि यह शोध कार्य चाइना जियोलाजिकल सर्वे के निर्देशन में हुआ है।

    लेकिन चीन सरकार का दावा है कि परियोजना में सभी तरह की दैवी आपदा से सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चीन सरकार ने परियोजना को स्वीकृति देकर जुलाई 2025 में उस पर कार्य शुरू कर दिया है। करीब 168 अरब डालर की लागत वाली इस परियोजना के पूर्ण होने पर उससे प्रतिवर्ष 300 अरब किलोवाट घंटा बिजली का उत्पादन होगा।

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    इतनी बिजली से 30 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इस परियोजना के लिए चीन ने भारत के विरोध के बावजूद ब्रह्मपुत्र के बहाव को भी बदला है जिसका असर भारत और बांग्लादेश को नदी से मिलने वाले पानी पर पड़ा है।