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    ड्रैगन को भी सताने लगा AI का डर, चीनी सेना ने एआई को बताया सबसे बड़ा खतरा

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 11:57 PM (IST)

    पीएलए के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि युद्धक्षेत्र में एआई का अत्यधिक उपयोग एक अत्यंत खतरनाक समस्या बन सकती है। ...और पढ़ें

    चीनी सेना ने एआई को बताया सबसे बड़ा खतरा

    चीनी सेना ने एआई को बताया सबसे बड़ा खतरा

    HighLights

    1. चीन का मानना है एआई का अत्यधिक उपयोग सैन्य क्षेत्र में परेशानी पैदा करेगा

    2. एआई को युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने में इंसान की जगह नहीं लेनी चाहिए

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने एक हैरान करने वाली चेतावनी जारी की है और यह चेतावनी किसी दुश्मन के बारे में नहीं, बल्कि खुद उनके अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में है।

    पीएलए के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि युद्धक्षेत्र में एआई का अत्यधिक उपयोग एक अत्यंत खतरनाक समस्या बन सकती है।

    लेख के अनुसार कि सैन्य क्षेत्र में एआई का अत्यधिक उपयोग के खतरे रोजमर्रा की जिंदगी से कहीं अधिक हैं, यह युद्ध की संज्ञानात्मक श्रृंखला, कमांड निर्णयों की गुणवत्ता और मानव-मशीन सहयोग की क्षमता को व्यवस्थागत रूप से नष्ट कर सकती है।

    पीएल डेली के अनुसार, एआई तत्काल किसी निर्णय लेने को लेकर परेशानी पैदा कर सकता है और इसका उपयोग पहले से तय निर्णयों को सही साबित करने के लिए आकलन को विकृत कर सकती है तथा विकल्पों को नजरअंदाज कर सकती है।

    सरल शब्दों में कहें तो अगर एक कमांडर किसी गलत रणनीति पर अड़ा है और एआई उसे सही बताता रहे, तो पूरी सेना गलत दिशा में चल पड़ेगी। युद्ध के मैदान में ऐसी गलती हजारों जानें ले सकती है।

    चीन भले ही एआई हथियारों की दौड़ में सबसे आगे हो, लेकिन बीजिंग ने बार-बार कहा है कि एआई को युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने में इंसान की जगह नहीं लेनी चाहिए। पीएलए ने अपने कई मानवरहित हथियार प्लेटफार्मों पर एआई का उपयोग स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय इंसान का ही होना चाहिए।

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    यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब चीन एटलस ड्रोन स्वार्म जैसी स्वायत्त प्रणालियां विकसित कर रहा है और अमेरिका के साथ एआई सैन्य तकनीक की होड़ में लगा है। चीनी रणनीतिकारों का मानना है कि भविष्य के युद्ध में वही सेना जीतेगी जो सूचना को सबसे बेहतर तरीके से इकट्ठा और उपयोग कर सके और इसी के लिए एआई में भारी निवेश किया जा रहा है।